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हाजिरी की यह शर्त पूरी नहीं की तो छात्र नहीं दे पाएंगे परीक्षा

Fri, 04 Sep 2015 12:43 PM IST
Updated Fri, 04 Sep 2015 12:43 PM IST
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75 percent attendance is compulsory for students in HPTU and its affiliated colleges.

तकनीकी कॉलेजों में 75 फीसदी से कम हाजिरी वाले छात्र सालाना परीक्षा में नहीं बैठ सकेंगे। तकनीकी विवि हमीरपुर सहित प्रदेश के सभी कॉलेजों में इस शर्त को लागू कर दिया गया है। खास परिस्थितियों में विवि के कुलपति के पास छात्रों को राहत देने की शक्ति रहेगी। इंजीनियरिंग, फार्मेसी, एमबीए और एमसीए समेत अन्य कोर्स कर रहे छात्रों को वार्षिक परीक्षा में भाग लेने के लिए अपनी अटेंडेंटस को पूरा करना अनिवार्य कर दिया गया है।

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विवि ने वार्षिक परीक्षा में भाग लेने के लिए सभी संकायों तथा विभागों के छात्रों को 75 फीसदी हाजिरी की शर्त लागू कर दी है। इससे कम हाजिरी वाले छात्र वार्षिक परीक्षाओं में भाग नहीं ले पाएंगे। हालांकि, विवि ने विशेष परिस्थितियों में 15 फीसदी हाजिरी की छूट की पावर विवि के कुलपति के हाथ में दी है।
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खेल टूर्नामेंट, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने तथा छात्र की बीमारी की स्थिति में विवि के कुलपति ऐसे छात्रों को वार्षिक परीक्षाओं में बैठने की अनुमति दे सकते हैं। इसके अलावा अब और कोई बहाना नहीं चलेगा। सभी छात्रों को अपने 75 फीसदी लेक्चर पूरे करने होंगे, तभी वार्षिक परीक्षाओं में भाग ले सकेंगे।

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केवल विशेष परिस्थितियों में छूट

75 percent attendance is compulsory for students in HPTU and its affiliated colleges.

तकनीकी विवि हमीरपुर के कुलपति प्रो. आरएल शर्मा ने बताया कि सभी छात्रों को अपने 75 फीसदी लेक्चर पूरे करने होंगे, तभी वार्षिक परीक्षाओं में भाग ले सकेंगे। विशेष परिस्थितियों में 15 फीसदी लेक्चर की छूट दी जा सकती है। विवि के निर्धारित लेक्चर पूरे नहीं करने वाले छात्रों को वार्षिक परीक्षाओं से वंचित रहना पड़ सकता है।

इंजीनियरिंग और फार्मेसी समेत दर्जनों कालेज- प्रदेश तकनीकी विवि से संबद्ध प्रदेश में दर्जनों कॉलेज चल रहे हैं। प्रदेश में चार सरकारी क्षेत्र और 18 प्राइवेट क्षेत्र में इंजीनियरिंग कॉलेज चल रहे हैं, जहां पर सिविल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रानिक्स एंड कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रीकल, मेकेनिकल, इलेक्ट्रीकल एंड इलेक्ट्रानिक्स, टेक्सटाइल और ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग हो रही है। इसके अलावा दर्जनों कालेजों में बी-फार्मेसी एलोपैथी, बी-फार्मेसी आयुर्वेदा, एमबीए, एमसीए, एमटेक और एम-फार्मेसी की पढ़ाई होती है।

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