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यूपी बोर्ड रिजल्ट की 5 दिलचस्प कहानियां!

Mon, 26 May 2014 05:59 PM IST
Updated Mon, 26 May 2014 05:59 PM IST
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5 intresting stories about UP result

जिंदगी में यदि कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी चीज रुकावट नहीं बन सकती, चाहे वह गरीबी ही क्यों न हो। इसे साबित किया है सेक्टर-10 की 6×4 की झुग्गी में रहने वाली पूजा मंडल ने।

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आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद यूपी बोर्ड 12वीं में नोएडा में टॉप कर पूजा ने अपने स्कूल और शहर का नाम रोशन किया है।

बंगाली परिवार से ताल्लुक रखने वाली पूजा का परिवार सेक्टर-10 की झुग्गी में रहता है। कमरा इतना छोटा है कि खड़े होने पर सिर छत से टकरा जाता है, लेकिन उसके इरादों के आगे हर चुनैतियों ने घुटने टेक दिए।

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हौसला तो है, पर गरीबी ने डाली बेड़ियां

5 intresting stories about UP result

यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट की परीक्षाओं में इन छात्राओं ने अच्छे नंबर लाकर अपने हौसले और जज्बे का सुबूत तो दे दिया, लेकिन घर की गरीबी ने इनके पैरों में बेड़ियां डाल दी हैं। इनके परिवार इतने आर्थिक मजबूत नहीं कि अपनी बच्चियों को बेहतर शिक्षा दे पाएं।

केसीएस पब्लिक इंटर कॉलेज की छात्रा रुबिना ने आर्ट स्ट्रीम में 404 नंबर लाकर अपनी काबलियत का लोहा मनवाया है। परिवार में माता-पिता के अलावा एक भाई है। पिता सिराजुद्दिन एक कंपनी में नौकरी करते हैं। जबकि माता गृहिणी हैं।

रुबिना ने बड़े सपने के बारे में पूछने पर बताया कि परिवार में बात की, लेकिन अब आगे आर्थिक सहारा नहीं मिल पा रहा है, इसलिए टीचर ही बनूंगी। वहीं हरौला की रहने वाली अनीता को साइंस स्ट्रीम में 80 फीसदी नंबर मिले हैं। बावजूद इसके उनके पास कोई बड़ा सपना नहीं है।

40 की उम्र में पास किया इंटरमीडिएट

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ग्रेटर नोएडा के ईटा वन सेक्टर की चालीस साल की विवाहिता इंटरमीडिएट की परीक्षा में उत्तीर्ण हुई है। महिला ने परीक्षा में 76 फीसदी अंक प्राप्त किए हैं।

दनकौर के जगनपुर निवासी सरिता राठी की शादी 21 वर्ष की उम्र में बुलंदशहर निवासी वीपी राठी के साथ हुई। शादी के बाद वह वर्ष 2003 में परिवार समेत ग्रेटर नोएडा में आकर रहने लगे। सरिता राठी के तीन बच्चे हैं। दो बेटी और एक छोटा बेटा है।

सरिता का कहना है कि हाईस्कूल पास करने के बाद उनकी पढ़ाई छूट गई थी, लेकिन उन्होंने घर पर पढ़ना जारी रखा।
उन्होंने बताया कि शादी के 19 वर्ष बाद उन्होंने यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट का फार्म भरकर परीक्षा दी थी। रविवार को जब रिजल्ट आया तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने बताया कि परिवार के लोग भी काफी खुश हैं।

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इंजीनियर बनने के बीच गरीबी बन रही दीवार

5 intresting stories about UP result

छिजारसी में रहने वाले इंद्रेश इंजीनियर बनना चाहते हैं। लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति इस बात की इजाजत नहीं देती। चार भाइयों में सबसे छोटे इंद्रेश नोएडा में साइंस स्ट्रीम में सेकेंड टॉपर हैं।

उनके पिता राशन दुकानदार हैं। उनके बड़े भाई होमगार्ड हैं। एक भाई परचून की दुकान चलाता है। एक भाई अभी पढ़ाई कर रहा है।

इंद्रेश का साफ कहना है कि घर में पैसे की कमी है और उनका सपना पूरा नहीं हो सकता। घर से आगे की बेहतर पढ़ाई के लिए सपोर्ट नहीं मिल पा रहा है।

यहां गरीबी नहीं बन पाई राह में रोड़ा

5 intresting stories about UP result

नोएडा के बिलासपुर के एसडी कन्या इंटर कॉलेज की छात्रा मानसी उपाध्याय, साजिया, सुमैया, आजरा, शोभा सागर, राबिका गौतम और निशात सैफी सभी ने तंगहाली को मात देकर अच्छे नंबरों के साथ इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की है।

78 प्रतिशत नंबर लाने वाली मानसी उपाध्याय के पिता राजेश उपाध्याय बस स्टैंड पर रेहड़ी लगाते हैं। जबकि मां राखी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं। 80.4 प्रतिशत अंक लाने वाली साजिया के पिता टेलर हैं। 80.2 प्रतिशत नंबर लाने वाली सुमैया के पिता सिलाई का काम करते है।

वहीं 85.8 प्रतिशत लानेवाली राबिका गौतम के पिता छोटे किसान है। इसके अलावा राबिका अपने गांव आलौंदा से स्कूल कई किलोमीटर पैदल चलकर जाती है। 75 प्रतिशत अंक लाने वाली निशात सैफी के पिता दिल्ली में रोजाना कारोबार करने जाते है। 75 प्रतिशत अंक लाने वाली शोभा सागर के पिता भी मजदूरी करते हैं।

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