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बंद होने वाले हैं यूपीटीयू के 22 कॉलेज

Fri, 09 May 2014 11:48 PM IST
Updated Fri, 09 May 2014 11:48 PM IST
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22 management colleges of uptu are going to be closed

दुकानों की तरह खुले कॉलेजों पर अब मंदी का असर पड़ने लगा है। चौंकाने वाली बात ये है कि उत्तर प्रदेश टेक्निकल यूनिवर्सिटी (यूपीटीयू) के लगभग 22 कॉलेजों में अब ताला लटने वाला है।

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इन कॉलेजों के मैनेजमेंट ने यूनिवर्सिटी को लिखी गई चिट्ठी में संस्थान बंद करने की मांग की है। इसके पीछे कई अहम मुद्दे गिनाए जा रहे हैं।

ऐसा पहली बार हो रहा है जब इतनी बड़ी संख्या में कॉलेज बंद होने जा रहे हैं। शासन आज इनके आवेदनों पर फैसला करेगा।

आखिर क्या है कारण?

22 management colleges of uptu are going to be closed

यूपीटीयू के प्रदेश भर में बीटेक, एमबीए, एमसीए, बीआर्क और बीफार्मा समेत कुछ अन्य कोर्सों के लगभग 700 कॉलेज हैं।

यूपीटीयू के रजिस्ट्रार यूएस तोमर ने बताया कि 21-22 कॉलेजों ने संस्थान बंद करने के लिए आवेदन किया है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या एमबीए कॉलेजों की है। इसके बाद एमसीए-फार्मेसी संस्थान है।

हालांकि इंजीनियरिंग का कोई कॉलेज इनमें शामिल नहीं है। उन्होंने बताया कि शासन इन पर निर्णय लेने जा रहा है। 15 मई तक ये कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी।

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तो ऐसे खुले थे कई कॉलेज

22 management colleges of uptu are going to be closed

दरअसल, पिछले कुछ साल से प्रदेश में बड़ी संख्या में कॉलेज खुले हैं। समाज कल्याण के जरिये छात्रवृत्ति पाने के गलत मकसद से भी कई कॉलेजों की कमाई होती रही है।

अब इस पर रोक और सख्ती बढ़ने से ये रास्ता भी खत्म हो गया है। सूत्रों के मुताबिक एक दर्जन से ज्यादा कॉलेज बिकने के लिए बड़े समूहों के संपर्क में हैं।

ऐसा माना जा रहा है कि यूपीटीयू के कॉलेजों में धांधली का ये खेल सामने आने के बाद जब सख्तह बरती गई तो मैनेजमेंट ने कई मुद्दे गिनाते हुए कॉलेजों को बंद करने का आवेदन यूनिवर्सिटी को भेज दिया।

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एमबीए का है बुरा हाल

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प्रदेश में यूपीटीयू से जुड़े एमबीए कॉलेजों की संख्या 384 के आसपास है। 2014-15 सत्र के लिए एमबीए में सीट 40 हजार से ज्यादा और दाखिले की कतार में मुश्किल से 8000 छात्र हैं।

एमबीए का बाजार इतना खराब है कि पिछले साल 250 कॉलेजों में एक भी दाखिला नहीं हुआ। यूनिवर्सिटी के नामी कॉलेजों में भी 30 फीसदी सीट खाली हैं।

सीट न भरने और छठे वेतन आयोग के मुताबिक शिक्षकों को सैलरी देने के बराबर पैसा भी न जुटा पाने के कारण एमबीए, एमसीए और फार्मेसी के दर्जनों कॉलेज बंद होने जा रहे हैं।

आईटी ब्रांच बंद करने की भी मांग

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इसे मार्केट फोर्स कहें, छात्रों का कम होता रुझान कहें या फिर कैंपस प्लेसमेंट में आईटी की कम होती डिमांड, क्योंकि इंजीनियरिंग एजूकेशन में इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी (आईटी) का रुतबा कम होता जा रहा है।

लिहाजा उत्तर प्रदेश टेक्निकल यूनिवर्सिटी (यूपीटीयू) के 20 इंजीनियरिंग कॉलेज 2014-15 के नए सेशन में आईटी ब्रांच बंद करने जा रहे हैं। इन कॉलेजों ने आईटी की जगह मैकेनिकल और सिविल ब्रांच शुरू करने के लिए यूनिवर्सिटी से अनुमति मांगी है।

यूपीटीयू के रजिस्ट्रार यूएस तोमर ने बताया कि सबसे ज्यादा आईटी ब्रांच बंद करने की एप्लीकेशन मिली हैं। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में 15 मई तक संबद्धता की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

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