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लखनऊ विश्वविद्यालय में मिला 200 साल पुराना कुआं
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ
Updated Wed, 04 Dec 2013 02:47 AM IST
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एलयू में करीब 200 साल पुराना पानी का कुआं मिला है। कुएं को नवाब गाजीउद्दीन हैदर के समय में बनवाया गया था।
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सन् 1800 के आसपास बने इस कुएं के ऊपर विशेष आकार की गोल बिल्डिंग है, जिस पर स्लोप बना हुआ है।
इसकी पुष्टि आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया के उप अधीक्षक डॉ. राजीव द्विवेदी ने की। वह मंगलवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में मौजूद थे और उन्होंने प्रॉक्टर प्रो. मनोज दीक्षित के साथ कैंपस का दौरा भी किया।
डॉ. द्विवेदी के अनुसार एलयू के जेके ब्लॉक व एनसीसी की बिल्डिंग के पिछले हिस्से में बीचों-बीच खाली जगह पर बने इस कुएं की खासियत यह थी कि बैल इससे पानी घसीटते थे।
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फिर वह नालियों के माध्यम से एलयू में बनी कैनाल और फव्वारे में जाता था। एलयू जिस स्थान पर बना है, वह बादशाह बाग कहा जाता है और यहां पर नवाबी दौर में मनोरंजन की पर्याप्त व्यवस्था की गई थी।
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फिलहाल यह एक अनूठा कुआं है और इस तरह की वॉटरबॉडी के मिलने से विश्वविद्यालय प्रशासन भी उत्साहित है। एलयू के प्रॉक्टर प्रो. मनोज दीक्षित ने बताया कि इस ऐतिहासिक कुएं के मिलने के बाद आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया से मिलकर इसको संवारा जाएगा।
इसकी देखभाल के इंतजाम भी किए जाएंगे, ताकि ऐतिहासिक धरोहरों को हम समेट कर रख सकें। वर्ष 1857 में जब गदर हुई तो यह कुआं यहां पर मौजूद था। खुद आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया इसकी पुष्टि कर रही है।
वहीं, जेके ब्लॉक के सामने जो कब्र बनी है, वह राजा कपूरथला के पौत्र व पौत्री की है। दरअसल, राजा कपूरथला के बेटे ने क्रिश्चियन लड़की से शादी की थी। सन् 1857 की गदर केबाद उनके बेटे व बहू को यही पर अंग्रेजों ने शरण दी थी।
इन दोनों से एक बेटी व एक बेटा था, कालांतर में वह हैजा फैलने के कारण मर गए। ऐसे में यह स्थल भी ऐतिहासिक है।
वहीं आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया के उप अधीक्षक डॉ. राजवी द्विवेदी ने लाल बारादरी का भी दौरा किया। उन्होंने यहां तहखाना भी देखा।