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नाम के फेर में फंसे सूबे के 16 हजार छात्र
राजीव खत्री/ अमर उजाला, श्रीनगर
Updated Wed, 16 Oct 2013 10:38 AM IST
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राजनीतिक पार्टियों के खेल और शासन की उदासीनता का खामियाजा उत्तराखंड के 16 हजार छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
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दो साल से मार्कशीट नहीं मिल पाई
विश्वविद्यालय के नाम में फेरबदल किए जाने की वजह से छात्रों को दो साल से मार्कशीट नहीं मिल पाई है। इससे छात्र जहां आगामी कक्षाओं में प्रवेश नहीं ले पा रहे हैं, वहीं किसी प्रतियोगी परीक्षा में भी शामिल भी नहीं हो पा रहे हैं।
गढ़वाल विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा मिलने के बाद वर्ष 2011 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने लोगों की मांग पर टिहरी जिले के बदशाहीथौल में पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य विश्वविद्यालय की स्थापना की।
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इस दौरान यह तय किया गया था कि दीनदयाल उपाध्याय विवि से संबद्ध होने वाले महाविद्यालयों के पहले बैच की परीक्षा गढ़वाल विवि ही आयोजित करेगा। लेकिन इसी बीच कांग्रेस ने सत्ता में आते ही दीनदयाल उपाध्याय विवि का नाम बदलकर श्रीदेव सुमन विवि कर दिया।
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16 हजार छात्र-छात्राओं ने भाग लिया
वर्ष 2011-12 में गढ़वाल विश्वविद्यालय ने एमए और एमकॉम की व्यक्तिगत परीक्षा आयोजित की, जिसमें करीब 16 हजार छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। परीक्षा संपन्न हुए दो वर्ष होने को है, लेकिन छात्रों को मार्कशीट नहीं मिल पाई है।
गढ़वाल विवि शासन को पत्र भेजने की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ रहा है। वहीं श्रीदेव सुमन विवि का कहना है कि जिस विवि ने परीक्षाएं आयोजित करवाई हे, वही अंक तालिका देगा। विश्वविद्यालयों की लीपापोती और शासन की अनदेखी का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। छात्र दो साल से अंक तालिकाओं की बाट जोह रहे हैं।
गढ़वाल विवि के ओएसडी परीक्षा प्रो. एलजे सिंह ने बताया कि इस संबंध में शासन को चार अक्तूबर को पत्र भेजा जा चुका है। दिशा-निर्र्देश मिलते ही मार्कशीट जारी कर दी जाएगी।
मानसिक शोषण
गढ़वाल विवि के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष सुधीर जोशी का कहना है कि अब छात्रों का मानसिक शोषण और नहीं सहा जाएगा। यदि शीघ्र ही छात्रों को अंकतालिकाएं नहीं वितरित की जाती, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
दीनदयाल उपाध्याय विवि से एमए की व्यक्तिगत परीक्षा दी है, लेकिन अंक तालिका नहीं मिली है। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल नहीं हो पा रही हूं।
- दिनेश चंद्र
दीनदयाल विवि से एमकॉम द्वितीय वर्ष की व्यक्तिगत परीक्षा दी है। राजनैतिक पार्टियां अपनी राजनीति के लिए हमारे भविष्य से खेल रही है। अभी तक हमें मार्कशीट नहीं मिल पाई है।
- दीपा भंडारी
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