फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   15 professors of punjab university may retire anytime

रियाटरमेंट केस में पीयू के प्रोफेसर्स को बड़ा झटका

Sun, 12 Jul 2015 04:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 12 Jul 2015 04:20 PM IST
विज्ञापन
15 professors of punjab university may retire anytime

पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के करीब 15 प्रोफेसर को अब कभी भी रिटायरमेंट पर विदाई पार्टी मिल सकती है। ये प्रोफेसर करीब सालभर से पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से रियाटरमेंट उम्र 60 से 65 किए जाने का हवाला देकर विभागों में जमे थे।

विज्ञापन


मिनिस्ट्री ऑफ ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट (एमएचआरडी) ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट को चिट्ठी लिखकर स्पष्ट किया है कि पीयू सेंट्रल और सेंट्रल फंडिंड यूनिवर्सिटी नहीं है। सिर्फ सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों के लिए 65 साल की उम्र के बाद रिटायर किए जाने का नियम है।
विज्ञापन


हाईकोर्ट से स्टे लेने वालों में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के प्रो. बीएस घुम्मन, स्टेटेस्टिक्स विभाग के प्रो. अमरनाथ गिल, पत्राचार विभाग की प्रो. मंजू वर्मा, बॉटनी विभाग के प्रो. एएस अहलुवालिया, अंग्रेजी विभाग में प्रो. लवलीन सिंह, प्रो. ललित बंसल, प्रो. आरके गुप्ता, प्रो. रवि महाजन और प्रो. अश्वनी शर्मा सहित कई अन्य प्रोफेसर शामिल हैं। प्रोफेसरों की रिटायरमेंट स्टे पर अंतिम फैसला हाईकोर्ट इसी महीने के अंत तक कर देगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


दो साल में 70 प्रोफेसर रिटायर

हाईकोर्ट में स्टे के कारण चल रहे केस से अगर प्रोफेसरों को राहत नहीं मिली तो पीयू कैंपस से अगले दो साल मेें काफी संख्या में प्रोफेसर रिटायर हो जाएंगे। जानकारी के अनुसार 2015 में ही 30 से 40 प्रोफेसर विभिन्न विभागों से रिटायर होंगे। स्टे लेने वाले प्रोफेसर अभी पूरा वेतन और अन्य सुविधाएं ले रहे हैं।

पीयू सीनेट में प्रोफेसरों की रिटायरमेंट उम्र 65 करने का काफी विरोध भी हो रहा है। सीनेटर डीपीएस रंधावा का कहना है कि हर साल 230 से अधिक युवा पीएचडी कर रहे हैं। लेकिन प्रोफेसरों की रिटायरमेंट उम्र 65 किए जाने से युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही।

रिटायरमेंट के बाद भी 5 साल देंगे सेवा

पीयू कैलेंडर में रिटायरमेंट के बाद भी शिक्षकों को रीइम्पलाइमेंट का लाभ मिलता है। 60 साल में रिटायर होने वाले प्रोफेसर 5 साल तक विभाग में ही री-इम्पलाइमेंट के तहत नियुक्त रह सकता है। लेकिन इस अवधि में प्रोफेसर को कुल वेतन से पेंशन का हिस्सा काटकर वेतन दिया जाता है।


री-इम्पलाइमेंट में भी एक प्रोफेसर को मासिक वेतन 50 से 60 हजार तक मिलता है। सीनेट में नए नियमों के तहत अब री-इम्पलाइमेंट का लाभ पाने के लिए प्रोफेसर को हर साल अपने काम की समीक्षा रिपोर्ट विभागाध्यक्ष को जमा करानी जरूरी है। जिसके बाद ही कुलपति री-इम्पलाइमेंट की अवधि को आगे बढ़ाते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed