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मतदान से 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार रोक देंगी सोशल मीडिया कंपनियां
Thu, 21 Mar 2019 04:32 AM IST
vivek shukla
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 21 Mar 2019 04:32 AM IST
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फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सएप जैसी दिग्गज सोशल मीडिया कंपनियां मतदान से 48 घंटे पहले अपने-अपने प्लेटफार्म पर किसी भी तरह का चुनाव अभियान बंद कर देंगी। यह बात इन सोशल मीडिया प्लेटफार्म की तरफ से तैयार किए गए वालंटरी कोड ऑफ एथिक्स में दी गई है। इन दिग्गज कंपनियों ने बुधवार को यह कोड ऑफ एथिक्स भारतीय चुनाव आयोग के पास जमा करा दिया। यह पहली बार है, जब इंटरनेट आधारित कंपनियों ने ऑनलाइन अभियान के मानकों को स्वैच्छिक तौर पर स्वीकार किया है।
चुनाव आयोग की तरफ से बताया गया कि मंगलवार को इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद यह कोड ऑफ एथिक्स तैयार किया गया है। सभी प्लेटफार्मों ने जनप्रतिनिधित्व कानून-1951 के सेक्शन-126 के तहत आचार संहिता के किसी भी तरह के उल्लंघन को तीन घंटे के अंदर आयोग को बताने पर सहमति जताई है।
ऐसा किए जाने की सिफारिश सिन्हा कमेटी ने भी की थी। फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप जैसी दिग्गज कंपनियों के साथ ही बिगो और बाइटडांस जैसी कंपनियों ने भी इस कोड ऑफ एथिक्स पर हस्ताक्षर किए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा, इस कोड का निर्माण करना एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन इसे अनिवार्य रूप से लागू करना होगा। इसे सही तरह से लागू करने के लिए आईएएमएआई को आयोग और सोशल मीडिया कंपनियों के बीच संयोजक की भूमिका दी गई है।
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चुनाव आयोग की तरफ से बताया गया कि मंगलवार को इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद यह कोड ऑफ एथिक्स तैयार किया गया है। सभी प्लेटफार्मों ने जनप्रतिनिधित्व कानून-1951 के सेक्शन-126 के तहत आचार संहिता के किसी भी तरह के उल्लंघन को तीन घंटे के अंदर आयोग को बताने पर सहमति जताई है।
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ऐसा किए जाने की सिफारिश सिन्हा कमेटी ने भी की थी। फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप जैसी दिग्गज कंपनियों के साथ ही बिगो और बाइटडांस जैसी कंपनियों ने भी इस कोड ऑफ एथिक्स पर हस्ताक्षर किए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा, इस कोड का निर्माण करना एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन इसे अनिवार्य रूप से लागू करना होगा। इसे सही तरह से लागू करने के लिए आईएएमएआई को आयोग और सोशल मीडिया कंपनियों के बीच संयोजक की भूमिका दी गई है।
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