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Sachin Pilot Interview: मुख्यमंत्री के नाम पर आलाकमान ही लगाएगा मुहर, विधानसभा चुनाव पर कही बड़ी बात

Tue, 07 Nov 2023 05:41 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: जलज मिश्रा Updated Tue, 07 Nov 2023 05:41 AM IST
सार

 

यह सही है और मेरा भी मानना है कि विधायकों को लेकर जनता में कुछ नाराजगी रहती है। कुछ विधायकों का टिकट कटा भी है। ज्यादा रिपीट किए गए है, लेकिन पार्टी के स्तर पर यदि कुछ तय हो गया, उसके बाद मेरे के लिए कुछ कहने को नहीं बच जाता।

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Sachin Pilot Exclusive Interview Rajasthan Assembly Election
सचिन पायलट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

राजस्थान कांग्रेस में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर पांच साल तक अशोक गहलोत और सचिन पायलट के संघर्ष की सुर्खियां बनीं। 2018 के चुनाव में जिस तरह से सचिन पायलट सक्रिय और मुखर थे, अब 2023 में उतने ही खामोश हैं। अमर उजाला के प्रेम प्रताप सिंह ने राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट से बात की...

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पांच साल में सचिन पायलट कितना बदले?
जिस जोश और उत्साह से पांच साल पहले कांग्रेस को मजबूत किया। पार्टी को 21 से 100 सीटों पर पहुंचाया, उसी जोश और उत्साह से अब भी मैदान में डटा हूं। मेरी प्राथमिकता है कि प्रदेश की ढाई दशक पुरानी सियासी परंपरा टूट जाए।

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राजस्थान की राजनीति किस ओर जाती हुई दिख रही है?
तीन दशक बाद पहली बार राजस्थान में सरकार रिपीट होने जा रही है। केंद्र सरकार के दस साल के कुशासन से जनता नाराज है। 2018 में जारी घोषणापत्र के आधार पर कांग्रेस सरकार द्वारा किए कामों के आधार पर पार्टी जनता के बीच जा रही है।

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मौजूदा विधायकों के प्रति जनता में नाराजगी थी, फिर भी उन्हीं को टिकट
यह सही है और मेरा भी मानना है कि विधायकों को लेकर जनता में कुछ नाराजगी रहती है। कुछ विधायकों का टिकट कटा भी है। ज्यादा रिपीट किए गए है, लेकिन पार्टी के स्तर पर यदि कुछ तय हो गया, उसके बाद मेरे के लिए कुछ कहने को नहीं बच जाता।

आपने पेपरलीक का मामला उठाया, हुआ कुछ नहीं। इससे प्रदेश का युवा नाराज है।
पेपरलीक का मुद्दा बहुत बड़ा है। इससे सीधे तौर पर हमारे प्रदेश के युवाओं का भविष्य जुड़ा है। इस मामले को जब मैंने उठाया, उसी के बाद केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप से राज्य सरकार की ओर से सख्त कानून बनाया गया है।

आपकी तपस्या में कहां कमी रह गई थी?
मेरी तपस्या में कोई कमी नहीं रह गई। दो दशक में कांग्रेस नेतृत्व ने मुझे जो भी जिम्मेदारी दी, उसे निभाने की पूरी कोशिश की। पार्टी के हर फैसले को स्वीकार किया। ऐसे में मैंने कभी यह महसूस नहीं किया कि मेरी तपस्या में कोई कमी रह गई हो।

इस बार क्या आप टोंक तक सीमित रहेंगे या पूरे प्रदेश में चुनाव प्रचार करेंगे?
जिस सीट से मेरी डिमांड आएगी, वहां जाऊंगा। राजस्थान के अलावा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में भी प्रचार करने जाऊंगा।

जिन विधायकों ने 2020 में आपका साथ नहीं दिया था, क्या उनके लिए आप चुनाव प्रचार करेंगे?
पिछले 33 साल से राजस्थान में कांग्रेस की सरकार कभी रिपीट नहीं हो पाई है। सत्ता में वापसी के लिए हम सब मिलकर काम कर रहे हैं। मेरा किसी विधायक से मतभेद नहीं है, जो भी मुझे बुलाएगा। उसके लिए जाऊंगा।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ऐसे संकेत दे रहे है कि सरकार रिपीट होने पर सीएम मैं ही बनूंगा। सीएम की कुर्सी मुझे छोड़ नहीं रही, मैं तो छोड़ना चाहता हूं।
कौन क्या कह रहा है, इसका मैं जवाब नहीं दे सकता, लेकिन इतना जरूर कहना चाहूंगा कि कांग्रेस की एक परंपरा रही है। सत्ता में आने के बाद विधायक एक लाइन का प्रस्ताव पास करते है, उसी प्रस्ताव के आधार पर कांग्रेस नेतृत्व सीएम पद का फैसला करता है। 2018 के चुनाव भी ऐसे ही हुआ था। राहुल गांधी जब पार्टी के अध्यक्ष थे, तब उन्होंने ही अशोक गहलोत को सीएम बनाया था।

शांति धारीवाल, महेश जोशी को लेकर आपकी क्या राय है? क्या इन दो चेहरों ने आपको सीएम बनने से रोक दिया?
कोई एक या दो व्यक्ति किसी को सीएम बनने से नहीं रोक सकता। यह जरूर है कि इन लोगों ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ काम किया था। पार्टी ने इसका संज्ञान भी लिया था। उन्हें नोटिस भी दिया गया था, लेकिन कोई एक्शन क्यों नहीं हुआ। यह बताना मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी ने मुझसे कहा है कि पुरानी बातों को भूलो और माफ करो। आगे देखो, उस बात को लेकर मैं आगे चल रहा हूं।

पेपर लीक को लेकर जिन तीन मांगों को लेकर अल्टीमेटम दिया था, उसको लेकर राज्य सरकार ने तो कुछ नहीं किया।
पेपर लीक मामले में मेरी मांगों को सरकार ने क्यों नहीं माना। इस पर मैं ज्यादा कुछ नहीं कह पाऊंगा। पेपर लीक होने पर परीक्षा देने वाले बच्चों को आर्थिक मुआवजा मिलना चाहिए। आरपीएससी भंग करने से मेरा आशय उसकी बिल्डिंग तोड़ने से नहीं था। आरपीएससी को नए सिरे से मजबूत करने की जरूरत थी, जिससे अच्छे लोग आ सकें।

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