राजनीति और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए हुई जामिया के बाद शाहीन बाग में गोलीबारी
- दिल्ली पुलिस के सामने बढ़ी चुनौती
- शाहीन बाग के वालेंटियर्स में भी बढ़ी चिंता
- वालेंटियर्स मान रहे हैं बड़ा षडयंत्र
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देश के गद्दारों को...गोली मारो...को। यह नारा नहीं बल्कि डर्टी पॉलिटिक्स है। इस गंदी राजनीति ने टीवी चैनल से लेकर मीडिया में आवारा किस्म के युवाओं को छा जाने का अवसर दे रही है। हालांकि शाहीन बाग के वालेंटियर्स का कहना है कि यह 15 दिसंबर से महिलाओं के चल रहे प्रदर्शन को खत्म करने के षडयंत्र का हिस्सा है।
सूत्र का कहना है कि केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री के इस तरह के आह्वान के ठीक बाद जामिया में एक शख्स ने गोली चलाई, एक युवक घायल हुआ। शनिवार को करीब पांच बजे एक अन्य युवक ने शाहीन बाग में पुलिस बैरिकेड के पास हवाई फायर किया। ताकि वह अपना मकसद पूरा कर सके और हत्या जैसे प्रयास की धारा 307 से भी बच सके। यह प्रयास जितना चिंतनीय है, उससे कहीं बड़ी दिल्ली पुलिस के लिए चुनौती है।
दिलचस्प है कि यह घटना केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा जामिया के पास गोली चलने और दिल्ली पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक से इसे लेकर बात करने के बाद घटी है। जिस युवक ने शाहीन बाग में शनिवार को गोली चलाई, इसका नाम कपिल (25) है, जो दिल्ली के दल्लूपुरा गांव का रहने वाला है और यह एक निजी कालेज में पढ़ता है।
अफवाह, चिंता और डर
शाहीन बाग में प्रदर्शन के साथ जुड़े वालेंटियर्स का कहना है कि यहां हमेशा एक अफवाह खत्म होती है, उससे पहले दस अफवाहों का बाजार चढ़ जाता है। हर दिन दो बार अफवाह उड़ती है कि दिल्ली पुलिस कभी भी बल प्रयोग कराकर महिलाओं के प्रदर्शन को खत्म करा देगी। सूत्र का कहना है कि पहली घटना भी जामिया और शाहीन बाग को संदेश देने के लिए हुई थी। दूसरी घटना भी डर्टी पालिटिक्स का हिस्सा है।
यह शाहीन बाग में प्रदर्शन कर रही महिलाओं के बीच डर पैदा करने की कोशिश है। क्योंकि धरना स्थल महिलाओं के साथ मासूम बच्चे भी हैं। वालेंटियर बताते हैं कि इस तरह की घटनाओं से लग रहा है कि सरकार सुरक्षा का खतरा पैदा करके इस तरह के प्रदर्शन को जबरिया खत्म कराने की जमीन तैयार कर रही है।
कब तक चलेगा प्रदर्शन
यूजमा खान का कहना है कि प्रदर्शन तो हमारी चिंता खत्म होने तक चलेगा। केंद्र सरकार हमारी चिंताओं को लेकर बिल्कुल संवेदनशील नहीं है और हम लोगों के पास इसके सिवाय कोई चारा नहीं है। वालेंटियर फराज का कहना है कि हमारी मांग तो बहुत सामान्य सी है। प्रधानमंत्री या गृहमंत्री हमारे बीच में आएं और हम सबकी चिंता का समाधान कर दें।
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में शाहीन बाग के वालेंटियर्स से बातचीत का प्रस्ताव किया है। क्या बातचीत की पहल होगी? शाहीन बाग के वालेंटियर का कहना है कि हमने कब इंकार किया। बशर्ते, कानून मंत्री बातचीत के लिए ईमानदारी से आगे बढ़ें। सूत्र का कहना है कि कानून मंत्री ने केवल पीछा छुड़ाने के लिए यह बयान दे दिया।
एक अन्य वालेंटियर का कहना है कि कानून मंत्री बातचीत का प्रस्ताव दे रहे हैं और भाजपा के प्रवक्ता सांबित पात्रा कड़वी भाषा बोल रहे हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का बयान हमें अलग बांट रहा है। वह दिल्ली की जनता से कह रहे हैं कि वह भारत माता के बेटों के साथ है या शाहीन बाग वालों के साथ? वालेंटियर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि आखिर कैसे भरोसा करें?
लोगों को हो रही है परेशानी
शाहीन बाग में 15 दिसंबर से चल रहे प्रदर्शन पर भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय का कहना है कि इससे लोगों को हो रही परेशानी से इनकार नहीं किया जा सकता। बच्चों को स्कूल जाने में, नौकरी पेशा वालों को काम पर जाने में, बीमार लोगों की एबुलेंस को रास्ता मिलने में परेशानी हो रही है। तमाम लोगों की दुकानें डेढ़ महीने से बंद हैं। उनका रोजगार ठप है।
अमित मालवीय सवाल उठाते हैं कि जिन्हें इससे परेशानी हो रही है, क्या उनकी भी कोई सुन रहा है? उनकी परेशानी से भी क्या किसी को वास्ता है? क्या उनका गुस्सा लोग समझ पा रहे हैं? अमित मालवीय का कहना है कि लोग सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। कोई बताए कि सीएए से कैसे किसी की नागरिकता जाएगी? मालवीय का कहना है कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने पहले स्पष्ट कर दिया है कि यह नागरिकता देने वाला कानून है। लेकिन फिर भी लोग विरोध कर रहे हैं। एनपीआर का विरोध कर रहे हैं।
लोग एनआरसी को मुद्दा बना रहे हैं, जो अभी तक आया ही नहीं है। कितनी अजीब बात है कि जो प्रावधान अभी आया नहीं है, लोग उसे लेकर रास्ता बंद करके प्रदर्शन कर रहे हैं? मालवीय सवाल उठाते हैं कि आखिर इसकी फंडिंग कौन कर रहा है? कहां से खर्चा आ रहा है? क्या इसके पीछे कोई षडयंत्र, ओछी राजनीति नहीं है।