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हर धमाके के पीछे था इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी कुरैशी का दिमाग, हुलिया बदलने में था माहिर
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Tue, 23 Jan 2018 06:13 AM IST
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abdul subhan qureshi
- फोटो : kumar sanjay
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स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया यानी सिमी पर 2001 में पाबंदी के बाद पैदा हुए आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के संस्थापक सदस्यों में शामिल अब्दुल सुभान कुरैशी को बम बनाने और हुलिया बदलने में माहिर माना जाता है। वर्ष 2008 में देश के अलग-अलग शहरों में हुए सीरियल बम धमाकों में शामिल आतंकियों को बम बनाना इसी ने सिखाया था। एनआईए ने 2012 में उस पर चार लाख रुपये का इनाम रखा था।
अंग्रेजी माध्यम से की पढ़ाई
अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए पहले उत्तर प्रदेश के रामपुर से मध्य प्रदेश के जबलपुर और फिर वहां से मुंबई पहुंचे कुरैशी के पिता ने अपने बच्चों को मदरसों के बजाय अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पढ़ाया। अब्दुल सुभान ने भी 1988 में एंटोनियो डिसूजा हाई स्कूल से 76.6 फीसदी अंकों के साथ हायर सेकेंड्री की परीक्षा पास की और 1995 में भारतीय विद्यापीठ से इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रानिक्स में डिप्लोमा हासिल करने के बाद 1996 में सीएमएस इंस्टीट्यूट से सॉफ्टवेयर मेंटीनेंस का कोर्स किया।
इन योग्यताओं के साथ उसे अच्छी नौकरी ढूंढने में कोई परेशानी नहीं हुई और तीन साल के अंदर उसकी कमाई पांच अंकों में पहुंच गई थी। उसने 1999 में भारत पेट्रो केमिकल्स के लिए विप्रो द्वारा तैयार की गई इंट्रानेट परियोजना में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद उसे कंप्यूटर क्षेत्र की अग्रणी कंपनी डाटामैटिक्स में नौकरी मिल गई।
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अंग्रेजी माध्यम से की पढ़ाई
अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए पहले उत्तर प्रदेश के रामपुर से मध्य प्रदेश के जबलपुर और फिर वहां से मुंबई पहुंचे कुरैशी के पिता ने अपने बच्चों को मदरसों के बजाय अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पढ़ाया। अब्दुल सुभान ने भी 1988 में एंटोनियो डिसूजा हाई स्कूल से 76.6 फीसदी अंकों के साथ हायर सेकेंड्री की परीक्षा पास की और 1995 में भारतीय विद्यापीठ से इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रानिक्स में डिप्लोमा हासिल करने के बाद 1996 में सीएमएस इंस्टीट्यूट से सॉफ्टवेयर मेंटीनेंस का कोर्स किया।
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इन योग्यताओं के साथ उसे अच्छी नौकरी ढूंढने में कोई परेशानी नहीं हुई और तीन साल के अंदर उसकी कमाई पांच अंकों में पहुंच गई थी। उसने 1999 में भारत पेट्रो केमिकल्स के लिए विप्रो द्वारा तैयार की गई इंट्रानेट परियोजना में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद उसे कंप्यूटर क्षेत्र की अग्रणी कंपनी डाटामैटिक्स में नौकरी मिल गई।
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अचानक छोड़ी नौकरी
abdul subhan qureshi
- फोटो : kumar sanjay
अपने सहकर्मियों के बीच असाधारण प्रतिभाशाली कर्मचारी के रूप में चर्चित कुरैशी ने अचानक 26 मार्च, 2001 को यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि वह एक साल तक धार्मिक एवं आध्यात्मिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है। इसके बाद से उसका कुछ पता नहीं चला। उससे परिजनों को भी उसकी कोई खोज-खबर नहीं थी।
सिमी से की शुरुआत
नौकरी से इस्तीफा देने से पहले वह सिमी का सक्त्रिस्य सदस्य था। 1998 में उस पर सार्वजनिक संपत्ति पर सिमी का पोस्टर चिपकाने का केस दर्ज किया गया था। अक्तूबर, 1999 में महाराष्ट्र के औरंगाबाद में वह सिमी के सम्मेलन के आयोजन में उसकी अहम भूमिका थी। वर्ष 2001 में सिमी के आखिरी सम्मेलन को सफल बनाने में भी कुरैशी ने बड़ा रोल अदा किया था। उसे बहुत अच्छा संगठनकर्ता माना जाता है।
हर बम धमाके में कुरैशी की छाप
वर्ष 2008 में दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद, बेंगलूरू और मुंबई में हुए सीरियल बम धमाकों में कुरैशी की नाम पहली बार उभर कर सामने आया। इन सभी धमाकों में काफी समानता थी। इन सभी धमाकों में प्रेशर कुकर बम या फिर टिफिन बम का इस्तेमाल किया गया था। ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने के लिए उनके अंदर आरडीएक्स और अमोनियम नाइट्रे़ट का इस्तेमाल किया गया था।
सिमी से की शुरुआत
नौकरी से इस्तीफा देने से पहले वह सिमी का सक्त्रिस्य सदस्य था। 1998 में उस पर सार्वजनिक संपत्ति पर सिमी का पोस्टर चिपकाने का केस दर्ज किया गया था। अक्तूबर, 1999 में महाराष्ट्र के औरंगाबाद में वह सिमी के सम्मेलन के आयोजन में उसकी अहम भूमिका थी। वर्ष 2001 में सिमी के आखिरी सम्मेलन को सफल बनाने में भी कुरैशी ने बड़ा रोल अदा किया था। उसे बहुत अच्छा संगठनकर्ता माना जाता है।
हर बम धमाके में कुरैशी की छाप
वर्ष 2008 में दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद, बेंगलूरू और मुंबई में हुए सीरियल बम धमाकों में कुरैशी की नाम पहली बार उभर कर सामने आया। इन सभी धमाकों में काफी समानता थी। इन सभी धमाकों में प्रेशर कुकर बम या फिर टिफिन बम का इस्तेमाल किया गया था। ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने के लिए उनके अंदर आरडीएक्स और अमोनियम नाइट्रे़ट का इस्तेमाल किया गया था।
हर धमाके के बाद ई-मेल
abdul subhan qureshi
- फोटो : kumar sanjay
उस साल हुए लगभग हर धमाके के बाद इंडियन मुजाहिदीन की ओर से मीडिया हाउस को ई-मेल भेजे गए थे। पुलिस के अनुसार ये सभी ई-मेल कुरैशी द्वारा ही भेजे गए थे।
2008- एक के बाद एक कई आतंकी विस्फोट
13 मई: जयपुर में 15 मिनट के अंदर 9 बम विस्फोट
90 लोगों की मौत, 216 घायल
11 जुलाई: मुंबई की उपनगरीय ट्रेनों में 10 मिनट के अंदर 7 बम विस्फोट, 189 लोगों की मौत
प्रेशर कुकर बम में आरडीएक्स और अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल
कुल 28 आरोपी, 13 गिरफ्तार, 15 फरार जिनमें ज्यादातर पाकिस्तानी नागरिक
सितंबर, 2015 में 13 आरोपियों में से पांच को फांसी और सात को आजीवन कारावास, एक बरी
25 जुलाई: बेंगलूरू में बम विस्फोट, 2 लोगों की मौत
26 जुलाई: अहमदाबाद में 23 बम विस्फोट, 51 लोगों की मौत, 200 से ज्यादा घायल
13 सितंबर: नई दिल्ली में कनाट प्लेस और करोल बाग सहित पांच स्थानों पर बम विस्फोट, 30 लोग मारे गए, 100 से ज्यादा जख्मी
2008- एक के बाद एक कई आतंकी विस्फोट
13 मई: जयपुर में 15 मिनट के अंदर 9 बम विस्फोट
90 लोगों की मौत, 216 घायल
11 जुलाई: मुंबई की उपनगरीय ट्रेनों में 10 मिनट के अंदर 7 बम विस्फोट, 189 लोगों की मौत
प्रेशर कुकर बम में आरडीएक्स और अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल
कुल 28 आरोपी, 13 गिरफ्तार, 15 फरार जिनमें ज्यादातर पाकिस्तानी नागरिक
सितंबर, 2015 में 13 आरोपियों में से पांच को फांसी और सात को आजीवन कारावास, एक बरी
25 जुलाई: बेंगलूरू में बम विस्फोट, 2 लोगों की मौत
26 जुलाई: अहमदाबाद में 23 बम विस्फोट, 51 लोगों की मौत, 200 से ज्यादा घायल
13 सितंबर: नई दिल्ली में कनाट प्लेस और करोल बाग सहित पांच स्थानों पर बम विस्फोट, 30 लोग मारे गए, 100 से ज्यादा जख्मी