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लंगर में रोज बन रही हैं 35 हजार रोटियां और सात क्विंटल चावल, 100 लीटर दूध से बनती है चाय

Thu, 17 Dec 2020 04:05 PM IST
Harendra Chaudhary राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली
राहुल संपाल, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 17 Dec 2020 04:05 PM IST
सार

लंगर में तैयार होने वाली सब्जियां सीधे हरियाणा और पंजाब के खेतों से पहुंच रही हैं। हर दिन के हिसाब से अलग-अलग मेन्यू तैयार किए गए हैं। दोपहर में सब्जी-दाल-चावल और पनीर की सब्जी बनाई जाती है...

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Farmers Protest: 35 thousand rotis and 7 quintals of rice are being made daily in langar, tea is made from 100 kg of milk
लंगर में भोजन तैयार करता किसान - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े किसानों ने अपनी जरुरतों के हिसाब से प्रदर्शन स्थलों पर सामान जुटाना शुरु कर दिया है। प्रदर्शनकारी किसान भले ही अपने घरों से दूर हों लेकिन उन्हें घर जैसा खाना जरूर मिल रहा है। शुरुआती दौर में किसान मिल बांटकर काम कर रहे थे लेकिन अब सब मशीनों की मदद से हो रहा है। लंगर में रोटी बनाना हो या फिर चावल पकाना अब सभी कामों के लिए मशीनें लगा दी गई हैं। एक दिन में करीब 30 हजार रोटियां तैयार हो रही हैं। इसके अलावा 7 क्विंटल चावल भी रोज पकाए जा रहे हैं। लंगर में तैयार होने वाली पनीर की सब्जी और चने किसानों की पसंद बने हुए हैं। वहीं, लंगर में रोज पक रहे हजारों लोगों के खाने में सामान और पैसे का कोई एक निश्चित स्रोत नहीं है। किसानों के मुताबिक उन्हें हर जगह से राशन और आर्थिक मदद मिल रही है।

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लंगर में रोज 45 हजार किसान खा रहे खाना

प्रदर्शन स्थल में लगाए सबसे बड़े लंगर में रोज करीब 45 से 50 हजार किसान खाना खा रहे हैं। ये लंगर गुरदासपुर के एक गुरुद्वारे द्वारा लगाया जा रहा है। अमर उजाला से चर्चा में बाबा अमरीक सिंह ने बताया कि रोज सुबह 4 बजे चाय का दौर शुरू हो जाता है जो रात तक चलता रहता है। चाय में रोज 100 लीटर दूध लग जाता है। इसके बाद नाश्ते में पकोड़े तैयार किए जाते हैं। इसमें करीब 50 किलो बेसन उपयोग में आता है। इसके बाद दोपहर में खाने की तैयारी शुरू होती है। दोपहर से लेकर रात 12 बजे तक किसान लंगर खाते हैं।

उन्होंने बताया कि हमारे लंगर में रोज करीब 45 से 50 हजार किसान खाना खा रहे हैं। रोटी बनाने की मशीन के जरिए 7 क्विंटल आटा में 30 हजार से ज्यादा रोटियां तैयार हो रही हैं। वही 7 क्विंटल चावल भी रोज पकाया जा रहा है। खाना बनाने में आसानी हो इसलिए हम मशीनों की मदद ले रहे हैं। रोटी बनाने की मशीन एक घंटे में 1 क्विंटल आटे की 4 हजार रोटियां तैयार कर देती है। दाल और चावल पकाने के लिए हमने स्टीमर बायलर लगा दिए हैं। महज 20 से 25 मिनट में दो से ढाई हजार लोगों के लिए दाल और सब्जी पककर तैयार हो जाती है। 

 

हजारों किसानों का खाना तैयार करने में आ रही लागत और सामान की पूर्ति कैसे हो रही इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि, ये हमें भी नहीं पता कि पैसा कहां से आ रहा है। लोग यहां पहुंचा रहे हैं। हम लोगों की सेवा कर रहे हैं।

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Farmers Protest: 35 thousand rotis and 7 quintals of rice are being made daily in langar, tea is made from 100 kg of milk
प्रदर्शन स्थल पर भोजन बनाने के लिए मशीनें - फोटो : Amar Ujala

खेतों से आ रही सब्जियां, पूरी-चने किसानों की पसंद

लंगर में तैयार होने वाली सब्जियां सीधे हरियाणा और पंजाब के खेतों से पहुंच रही हैं। हर दिन के हिसाब से अलग अलग मेन्यू तैयार किए गए हैं। दोपहर में सब्जी, दाल, चावल और पनीर की सब्जी बनाई जाती है। शाम के समय में दाल, सब्जी और पूरी बनाई जाती है। आयोजकों ने अमर उजाला को बताया कि आटा, चावल और जरूरत का सारा सामान दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के किसान परिवारों के अलावा गुरुद्वारे के लोग भेज रहे है। हमें जिस भी चीज की जरूरत होती है वह एक दिन में यहां हाजिर हो जाती है। रोज करीब 10 हजार से ज्यादा पानी की बोतलें भी यहां पहुंच रही हैं।  

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ठंड से बचने के लिए गर्म हीटर

बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बढ़ती ठंड से बचने के लिए गैस हीटर लगाए हैं। एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि लोग लकड़ी जलाकर अपना काम चला रहे हैं। कुछ किसान नेताओं ने हीटर मंगाए हैं लेकिन ये गैस से चलते हैं। इसके लिए गैस की व्यवस्था भी आसानी से हो रही है। लकड़ी जलाने के लिए हर दिन ट्रक भरकर लकड़ियां पहुंच रही हैं। वहीं किसानों को ठंड की मार से बचाने के लिए बार्डर पर एक पेट्रोल पंप को टेंट सिटी में बदल दिया गया है। यहां एक एनजीओ ने टेंट लगावा दिए हैं। इसमें किसान आराम कर रहे हैं। इसकी सारी देखरेख भी एनजीओ द्वारा ही की जाती है। 

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