कोरोना से जंग: कोविड से युद्धस्तर पर निपट रही दिल्ली सरकार, ऑक्सीजन और बेड्स की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर
कोरोना की दूसरी लहर (चौथी लहर) से मुकाबला करने के लिए दिल्ली सरकार ने युद्ध स्तर पर प्रयास तेज कर दिए हैं। ऑक्सीजन की कमी सुधारने, बेड्स की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ गरीबों को आर्थिक सहयता देने पर सरकार ने ध्यान दिया है...
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कोरोना ने महाराष्ट्र के बाद दिल्ली को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। महामारी की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने इस स्थिति से निबटने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास तेज कर दिए हैं। ऑक्सीजन प्लांट्स लगाने, राज्यों से ऑक्सीजन की सहायता लेने से लेकर ऑक्सीजन टैंकर मंगवाने तक की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसी हफ्ते इसका परिणाम भी दिखाई पड़ जाएगा। इसी बीच सरकार ने कोरोना मरीजों के इलाज के लिए अब तक 20 हजार से ज्यादा बेड्स की उपलब्धता सुनिश्चित कर चुकी है। सरकार ने गरीब लोगों के भोजन के साथ-साथ निर्माण श्रमिकों को पांच-पांच हजार रुपये की आर्थिक सहयता उपलब्ध कराने का काम भी शुरू कर दिया है।
ऑक्सीजन की कमी से निपटने को सरकार ने उठाया ये कदम
शुरुआत में राजधानी में ऑक्सीजन की भारी कमी थी, लेकिन इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने तेजी से ऑक्सीजन उपलब्धता बढ़ाने के लिए कदम उठाया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सभी राज्यों से भी पत्र लिखकर दिल्ली को ऑक्सीजन की सहायता देने के लिए पत्र लिखा था। मुख्यमंत्री की इस मांग पर छत्तीसगढ़, झारखंड ने दिल्ली को ऑक्सीजन उपलब्ध कराया है। हिमाचल प्रदेश ने भी दिल्ली को ऑक्सीजन देने की बात कही है। उम्मीद है कि ये ऑक्सीजन इसी हफ्ते के अंत में मिलने लगेगी।
मुख्यमंत्री ने उच्चाधिकारियों के साथ बैठक कर ऑक्सीजन बढ़ाने के लिए 44 विशेष प्लांट्स स्थापित करने का निर्णय लिया है। इनमें से केंद्र सरकार द्वारा लगाये जाने वाले आठ ऑक्सीजन प्लांट इसी हफ्ते काम करना शुरू कर देंगे, जबकि 36 अन्य प्लांट्स को लगाने में लगभग एक महीने का समय लग सकता है। फ्रांस से आने वाली 21 ऑक्सीजन प्लांट्स मशीनें लगभग तैयार स्थिति में आएंगी, जिससे तत्काल ऑक्सीजन पैदा करना संभव हो जाएगा, जबकि 15 ऑक्सीजन प्लांट्स देसी कंपनियां लगाएंगी।
ऑक्सीजन की आपूर्ति बड़ी समस्या बनकर उभरी है। इस कमी से निपटने के लिए सरकार ने थाईलैंड से 20 ऑक्सीजन टैंकर मंगाने का निर्णय लिया है। उम्मीद है कि जब इन ऑक्सीजन प्लांट्स से उत्पादन शुरू हो जाएगा, तब दिल्ली ऑक्सीजन के मामले में आत्मनिर्भर हो जायेगी और भविष्य में इस तरह ऑक्सीजन संकट की कोई स्थिति पैदा नहीं होगी।
नहीं दी कोटे की पूरी ऑक्सीजन
आम आदमी पार्टी का आरोप है कि केंद्र ने उसे 490 मीट्रिक टन का ऑक्सीजन कोटा निरधारित अवश्य कर दिया, लेकिन उसे यह कोटा कभी पूरी तरह उपलब्ध नहीं कराया गया। अब तक सबसे ज्यादा एक दिन में 400 मीट्रिक टन ऑक्सीजन ही मिली है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली को 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन उपलब्ध कराने की मांग की थी। इसी बीच राघव चढ्ढा ने कहा है कि केंद्र सरकार ने ऑक्सीजन वितरित करने के लिए गलत फार्मूला इस्तेमाल किया है। सही तरीके से वितरण किया जाये तो राजधानी को 900 मीट्रिक टन से ज्यादा ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
कोरोना बेड बढ़ाये
कोरोना मरीजों के इलाज के लिए सरकार ने राजधानी के अस्पतालों में रिकॉर्ड स्तर पर बेड्स की संख्या बढ़ाई है। अब राजधानी में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए 20,819 कोविड बेड्स उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इनमें 1723 बेड्स वेंटीलेटर सुविधा के साथ हैं जबकि 3180 बेड्स वेंटीलेटर रहित लेकिन आईसीयू सुविधायुक्त हैं। वहीं, नॉन-कोविड मरीजों के लिए 1113 आईसीयू बेड्स बनाये गये हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि अगले कुछ ही दिनों में राधास्वामी सेंटर में 200 आईसीयू बेड्स और 500 अन्य बेड्स बढ़ाये जाएंगे। इन सबके अलावा पांच हजार अन्य कोरोना बेड्स बढ़ाने की योजना है।
यहां भी बढ़े कोरोना बेड्स
नरेला के श्री राजा हरिश्चंद्र हॉस्पिटल में बेड की संख्या बढ़ाई गई है। यहां पर पहले 130 बेड थे जिन्हें बढ़ाकर दो दिन में 400 किया गया है। मोती नगर स्थित श्री भिक्षु हॉस्पिटल में 150 बेड को बढ़ाकर 400 किया गया है। दीन दयाल हॉस्पिटल में 500 बेड से बढ़ाकर 1000, बुराड़ी अस्पताल में 320 से बढ़ाकर 800, अम्बेडकर नगर अस्पताल में 200 से बढ़ाकर 600 बेड्स की व्यवस्था कर दी गई है। इसके अलावा दीनदयाल अस्पताल में बेड्स 250 से बढ़ाकर 750 की गई है। यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 800 अतिरिक्त बेड बढ़ाए गए हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज में भी 500 ऑक्सीजन बेड बढाए गए हैं। राउस एवेन्यू स्थिति सरकारी स्कूल में भी 100 बेड लगाए गए हैं।
श्रमिकों को पहुंचाई मदद
दिल्ली में लॉकडाउन लगाने से श्रमिकों के कामकाज पर असर पड़ा है। लेकिन ऐसे लोगों को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए सरकार ने राहत योजना की शुरुआत की है। योजना के मुताबिक दिल्ली के सभी निर्माण श्रमिकों को पांच-पांच हजार रुपयों की आर्थिक मदद दी जा रही है। सरकार ने इसके लिए 100 करोड़ रुपयों का फंड भी जारी कर दिया है। अनुमान है कि इससे राजधानी के 2.10 लाख श्रमिकों को लाभ मिलेगा।
कोरोना इलाज के लिए पांच से दस हजार रुपयों की मदद
निर्माण श्रमिकों को कोरोना होने पर सरकार ने उन्हें पांच से दस हजार रुपयों की नकद आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। यह मदद RT-पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट देने के बाद ही मिलेगी। इस योजना से एक लाख से अधिक निर्माण श्रमिकों को मदद मिलने का अनुमान है।
जिलों में चल रहे भोजन सेंटर
लॉकडाउन में किसी श्रमिक-गरीब को भूखे न सोना पड़े, सरकार ने इसके लिए राजधानी के सभी जिला मुख्यालयों सहित लगभग 150 स्थानों पर भोजन बांटने का काम शुरू कर रखा है। सभी जगहों पर गरीबों को दोनों टाइम का भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।