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रेप के बाद गर्भवती हुई बच्ची खुद नहीं जानती, वो मां बनने वाली है

Tue, 08 Aug 2017 11:04 AM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Tue, 08 Aug 2017 11:04 AM IST
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The girl's story of pregnancy after the rape
मीडिया के बवंडर के केंद्र में फंसी 10 साल की गर्भवती बच्ची को बहुत कम जानकारी है कि उसकी कहानी कुछ हफ्तों से सुर्खियों में बनी हुई है। उसे इस बात की भी ठीक से जानकारी नहीं है कि उसे क्या परेशानी है। बीबीसी ने चंडीगढ़ जाकर उसकी कहानी जानी। वह खुशमिजाज बच्ची है जो तुरंत मुस्कुरा देती है। वह शर्मीली है और ज्यादा बात नहीं करती। अंग्रेजी और गणित छठी क्लास में पढ़ने वाली इस बच्ची के पसंदीदा विषय हैं।
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उसे चित्रकारी अच्छी लगती है और वह काफी अच्छी ड्रॉइंग भी कर लेती है। अपने पसंदीदा कार्टून 'छोटी आनंदी' और 'शिन चैन' देखकर उसकी जी नहीं भरता। उसे चिकन, मछली और आइसक्रीम खाना पसंद है। यह उस लड़की की प्रोफाइल है जिसका कथित तौर पर उसके रिश्तेदार ने कई बार रेप किया। इस रिश्तेदार को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है और मुकदमा अभी चल रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने इस बच्ची की तरफ से गर्भपात की इजाजत के लिए दायर याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि गर्भ 32 हफ्ते का हो गया है। डॉक्टरों के एक पैनल ने कोर्ट को सलाह दी थी कि इस स्टेज पर गर्भवात करवाना बच्ची और उसके भ्रूण, जो कि जिंदा है और ठीकठाक है, के लिए 'बेहद जोखिम भरा' हो सकता है। कोर्ट का यह आदेश लड़की के परिजनों के लिए निराशाजनक रहा।
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उन्हें उम्मीद थी कि कोर्ट से अबॉर्शन की इजाजत मिल जाएगी। 10 साल की इस बच्ची के मामले ने चंडीगढ़ समेत पूरे भारत को हिलाकर रख दिया। चंडीगढ़ स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के सदस्य सचिव महावीर सिंह ने बीबीसी को बताया, 'हमने 14-15 साल की उम्र में गर्भवती होने के कई मामले देखे हैं मगर 10 साल की बच्ची का मामला मैं पहली बार देख रहा हूं।'

भारत का कानून तब तक 20 हफ्तों के बाद गर्भपात की इजाजत नहीं देता, जब तक डॉक्टरों के मुताबिक मां की जिंदगी को कोई खतरा न हो। मगर हाल के कुछ सालों में अदालतों मे कई याचिकाएं आई हैं जिनमें 20 हफ्तों के बाद अबॉर्शन की इजाजत मांगी गई।

गर्भवती होने की जानकारी नहीं दी गई...

The girl's story of pregnancy after the rape
इनमें बहुत सी याचिकाएं रेप के शिकार हुए बच्चों की तरफ से भी थीं। ज्यादातर मामलों में गर्भ के बारे में देरी से पता चला क्योंकि बच्चों को खुद अपनी स्थिति के बारे में पता नहीं था। 10 साल की इस बच्ची के मामले में भी उसके गर्भवती होने का पता 3 हफ्ते पहले ही चला जब पेट के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत के बाद मां उसे डॉक्टर के पास ले गई। बच्ची के संपर्क में रहने वाले एक शख्स ने बताया, 'वह बहुत भोली है और उसे नहीं पता कि उसके साथ क्या हुआ।'

क्योंकि वह 'तंदरुस्त और गोलमटोल' सी है, इसीलिए शायद उसके माता-पिता को भी पता नहीं लग पाया। इसके अलावा वे सपने में भी कैसे सोच सकते थे कि उनकी बच्ची 10 साल की उम्र में गर्भवती हो जाएगी। बच्ची को अभी तक उसके गर्भवती होने की जानकारी नहीं दी गई है। जो उससे बात करते हैं, वे बड़ी सावधानी बरतते हैं। उसे बताया गया है कि उसके पेट में बड़ा सा पत्थर है और यह उभार इसी वजह से है।

'बहुत अच्छा परिवार'

उसे खास डाइट के तहत अंडे, दूध, फल, मछली और चिकन दिया जा रहा है। खुद का इस तरह से ज्यादा ख्याल रखे जाने से वह खुश भी नजर आती है। मगर पिछले दिनों से घर पर पुलिस, सामाजिक कार्यकर्ताओं और वकीलों का आना जाना लगा हुआ है। घर के बाहर मीडिया का भी जमावड़ा लगा हुआ है। कुछ का कहना है कि शायद उसे अहसास है कि उसके साथ क्या हो रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया, 'उसे असल समस्या का पता नहीं होगा, मामले की गंभीरता का अहसास नहीं होगा मगर मुझे लगता है कि अब उसे कुछ-कुछ समझ आ गया होगा।'

उसके माता-पिता भी हालात से जूझ रहे हैं। परिवार गरीब है और एक कमरे के फ्लैट में रहता है। उसके पिता सरकारी नौकरी करते हैं और मां घरों में काम करती हैं। मामले की जांच करने वालीं महिला पुलिस अधिकारी प्रतिभा कुमारी बताती हैं कि यह 'बहुत अच्छा परिवार' है। वे इतने सीधे हैं कि उन्हें अहसास ही नहीं हुआ कि वह आदमी उनकी बेटी के साथ क्या कर रहा है।

शोषण के आंकड़े

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वह कहती हैं कि जाहिर तौर पर बच्ची के माता-पिता बहुत परेशान हैं।
उन्होंने बताया, 'ऐसा कभी नहीं हुआ जब उसकी मां बात करते हुए रोई न हों। पिता कहते हैं कि ऐसा लगता है कि मेरी बेटी का कत्ल हो गया है।'

भारत में ये हैं शोषण के आंकड़े
- हर 155 मिनट में 16 वर्ष से कम आयु के बच्चे का रेप होता है
- हर 13 घंटों में 10 साल के बच्चे से बलात्कार होता है
- 2015 में 10 हजार से ज्यादा बच्चों का रेप हुआ
- भारत में रहने वाली 24 करोड़ महिलाओं की शादी 18 साल से पहले हो गई थी
- सरकार द्वारा करवाए गए सर्वे में हिस्सा लेने वाले बच्चों में 53.22% का यौन शोषण हुआ था
- 50 फीसदी शोषण करने वाले लोग बच्चों के परिचित और भरोसे वाले थे
- स्रोत: भारत सरकार, यूनिसेफ


सरकार से मुआवजा

जब से बच्ची के रेप और गर्भवती होने की खबर सुर्खियों में आई है, पत्रकार परिवार के पीछे लगे हुए हैं। इससे उनकी स्थिति और भी खराब हो गई है। चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी के चेयरमैन नील रॉबर्ट्स ने बीबीसी को बताया, 'जब लड़की के पिता मुझसे मिलने आए तो उन्होंने बताया कि सबसी बड़ी समस्या प्रेस है। उन्होंने कहा कि उनके घर के बाहर हर वक्त रिपोर्टर रहते हैं और इससे उनकी निजता के साथ खिलवाड़ हो रहा है।' मीडिया में मामला आने से संभव है कि अब लड़की को बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें और सरकार से मुआवजा भी मिले।

मगर अवांछित प्रचार होने से परिवार का दुख और बढ़ गया है। कई पत्रकार चाइल्ड वर्कर्स बनकर उस वक्त घर में घुस गए जब पिता काम पर गए हुए थे। चूंकि कथित रेपिस्ट मां का चचेरा भाई था, कुछ ने सवाल उठाए कि उसे इसका पता था या नहीं। यह तक कहा गया कि इस सब में कहीं मां की सहमति तो नहीं थी। उन्होंने सवाल किए, 'उसे 7 महीनों तक कैसे पता नहीं चला कि उसकी बेटी गर्भवती है?' इस बात ने परिवार के लिए बहुत परेशानी खड़ी की है।
 

परिवार की पहचान

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बच्ची के पिता बहुत नाराज हैं। फोन पर संक्षिप्त बातचीत में उन्होंने बताया, 'मैं चाहता हूं उसे कड़ी सजा मिले। उसे मौत की सजा मिलनी चाहिए या फिर उसे बाकी उम्र के लिए जेल में रखना चाहिए। उसने अपना अपराध स्वीकार किया है मगर हमसे एक बार भी माफी नहीं मांगी।' फोन रखने से पहले उन्होंने पूछा, 'आप क्यों मेरी बेटी के केस को फैला रहे हो? प्रेस ने तो इसे धंधा बना लिया है।' उनका गुस्सा समझा जा सकता है।

भले ही कानून पत्रकारों को रेप सर्वाइवर और बच्चों की पहचान जाहिर करने से प्रतिबंधित करते हैं, मगर इस मामले में लोग कड़ियां जोड़कर परिवार की पहचान करने में कामयाब रहे क्योंकि प्रेस में कथित आरोपी क नाम छाप दिया गया था। अब इस परिवार के पड़ोसी और साथ काम करने वालों को मामले की जानकारी है। संभव है कि स्कूल के दोस्तों को भी पता चल गया हो। शुरू में परिवार से मिलने वाले एक स्थानीय पत्रकार ने कहा कि माता-पिता अपनी बच्ची के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्हें यह चिंता भी सता रही है कि जब वह बड़ी होगी तो किस दशा से गुजरेगी। पिता ने उसकी सेहत को लेकर भी चिंताएं जाहिर की थीं।

जन्म देने के लिए बहुत छोटी है...

अभी तक मेडिकल टेस्ट बताते हैं कि उसकी सेहत 'अच्छी' है, हालांकि वह 'हल्के अनीमिया' से जूझ रही है। मगर चिंता के अन्य कारण भी हैं। वह दिल में छेद के साथ जन्मी थी जिसका इलाज 2013 में किया गया था। भले ही डॉक्टर कहते हैं कि इससे प्रेग्नेंसी में कोई दिक्कत नहीं होगी मगर सच यह भी है कि वह जन्म देने के लिए अभी बहुत छोटी है।

हर साल भारत में 45000 व्यस्क महिलाएं जन्म देते हुए मौत के मुंह में समा जाती हैं। 15 साल से कम उम्र में गर्भवती होने वाली लड़कियों की प्रसव के दौरान की मृत्यु दर 20 साल से ज्यादा उम्र की लड़कियों की तुलना में ढाई गुना ज्यादा है। डॉक्टर कहते हैं कि उम्र सिर्फ 10 साल होने पर यह खतरा और भी बढ़ जाता है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में भी आया था मगर जजों ने फैसला लिया कि प्रेग्नेंसी को रखा जा सकता है।

तो आगे क्या होगा?

The girl's story of pregnancy after the rape
जानकार बता रहे हैं कि सितंबर महीने के बीच में कभी भी प्रसव हो सकता है और डॉक्टरों ने तय कर लिया है कि यह सिजेरियन डिलीवरी होगी। अगर कोई समस्या आती है तो जन्म पहले भी हो सकता है। चूंकि लड़की के परिवार ने कहा है कि उन्हें बच्चे से कोई मतलब नहीं है, इसलिए उसकी देखभाल तब तक चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी करेगी, जब तक उसे गोद नहीं दे दिया जाता। मेडिकल एक्सपर्ट कहते हैं कि 10 साल की यह बच्ची मानसिक सदमे से गुजरेगी और उसे कुछ सालों तक बाल मनोचिकित्सक के परामर्श की जरूरत होगी। एक बाल अधिकार कार्यकर्ता कहते हैं, 'हम सब उसके लिए दुआ कर रहे हैं। क्या 10 साल की बच्ची जन्म दे सकती है? कहीं उसके लिए यह जानलेवा तो नहीं होगा? हम प्रार्थना कर रहे हैं कि उसके साथ कुछ बुरा न हो।'

 
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