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शिमला रेप: पॉलीग्राफी टेस्ट से खुल सकती है गिरफ्तार पुलिसवालों की पोल

Thu, 31 Aug 2017 11:50 AM IST
गुंजन कुमार, नई दिल्ली
गुंजन कुमार, नई दिल्ली Updated Thu, 31 Aug 2017 11:50 AM IST
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In Shimla rap case Polygraphy test can disclosed arrested policemen reality

सीबीआई इस सनसनीखेज मामले का सच जानने के लिए गिरफ्तार हिमाचल प्रदेश पुलिस अधिकारियों का पॉलाग्रीफी टेस्ट करवा सकती है।

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शिमला के बहुचर्चित गुड़िया दुराचार व हत्या कांड के आरोपी सूरज की लॉकअप में मौत के मामले में गिरफ्तार हिमाचल प्रदेश पुलिस अधिकारियों का लाई डिटेक्टर टेस्ट यानि पॉलाग्रीफी टेस्ट करवाया जा सकता है।

मामले की जांच कर रही सीबीआई इस सनसनीखेज मामले का सच जानने के लिए इस विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस मामले में मंगलवार को शिमला में गिरफ्तार आईजी एस जहूर जैदी, डीएसपी मनोज जोशी और छह अन्य पुलिसकर्मियों को देर शाम दिल्ली लाया गया। सीबीआई की विशेष टीम इनसे पहले घटना की बारिकियों के  बारे में पूछताछ करेगी।

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ब्रेन मैपिंग टेस्ट भी करवाया जा सकता है

In Shimla rap case Polygraphy test can disclosed arrested policemen reality

गौरतलब है कि सीबीआई की टीम ने इस मामले में अचानक आईजी और डीएसपी को गिरफ्तार को सब को चौंका दिया। आईजी जैदी इस मामले का सच जानने के लिए गठित एसआईटी के प्रमुख थे।

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तार पुलिस अधिकारी इस मामले का बड़ा सच लगातार छुपाने की कोशिश कर रहे हैं। एसआईटी की जांच की दिशा भी दूसरी तरफ मोड़ने के संकेत भी मिलें हैं। यह सभी पुलिस अधिकारी और कर्मी सीबीआई की जांच में सहयोग भी नहीं कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक यही वजह है कि उन्हें गिरफ्तार करना पड़ा। सीबीआई को शक है कि आरोपी सूरज की लॉकअप में हुई मौत के पीछे बड़ा राज छुपा है।

18 जुलाई को हुई यह मौत किसी दुर्घटना का नतीजा नहीं बल्कि साजिश का हिस्सा है। सूत्रों के मुताबिक जब इस पुलिसकर्मियों से कुछ संवेदनशील पहलुओं पर सवाल किया गया तो तर्कसंगत जवाब नहीं मिला। 

गिरफ्तार पुलिसकर्मी 4 सितंबर तक सीबीआई की हिरासत में हैं। जरूरत पड़ी तो एजेंसी इनकी रिमांड अवधि बढ़ाने की अदालत से गुजारिश करेगी। सूत्रों ने बताया कि यह आठ पुलिसकर्मी यहां भी जांच को भटकाने की कोशिश करेंगे। यही वजह है कि इनके झूठ पकड़ने वाले पॉलीग्राफी टेस्ट पर विचार किया जा रहा है। अगर पॉलीग्राफी टेस्ट से बात नहीं बनी तो ब्रेन मैपिंग टेस्ट भी करवाया जा सकता है। हालांकि अदालत टेस्ट के नतीजे को सबूत नहीं मानती है। लेकिन इससे इनकेदिमाग में छुपे सच का जानने में मदद मिलेगी।

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