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Hindi News ›   Crime ›   around 56 rti activists killed till 2016

अब तक 56 RTI कार्यकर्ताओं की हत्या, ये राज्य हैं सबसे ज्यादा खतरनाक

Thu, 20 Oct 2016 12:24 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 20 Oct 2016 12:24 PM IST
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around 56 rti activists killed till 2016
RTI - फोटो : PTI

मुंबई में आरटीआई कार्यकर्ता भूपेंद्र वीरा के साथ हुई वारदात के बाद हत्याओं की यह संख्या 56 तक पहुंच गई है। सुरक्षा में कमी होने की वजह से बदमाश बड़ी आसानी से आरटीआई कानून कार्यकर्ता पर हमला करते हैं और हत्या या गंभीर रूप से घायल करके फरार हो जाते हैं।

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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार 2005 में लागू हुए कानून के बाद  हत्या, धमकी और मारपीट के मामलो की संख्या 311 दर्ज की गई है। 2005 से 2016 के बीच कुल 56 मामलों में 51 की हत्या की गई है, जबिक 5 ने सुसाइड का कदम उठाया है।

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मर्डर करने की लिस्ट में महाराष्ट्र सबसे ऊपर

around 56 rti activists killed till 2016
RTI

मर्डर की लिस्ट में महाराष्ट्र सबसे ऊपर है जहां 10 कत्ल और दो सुसाइड के मामले सामने आए। गुजरात में 8 हत्याएं और एक सुसाइड वहीं उत्तर प्रदेश में 6 हत्याएं और एक सुसाइड किया गया है। 130 हमलों की लिस्ट में महाराष्ट्र ही शीर्ष पर रहा है, जहां 29 मामले दर्ज किए गए। इतना ही नहीं गुजरात में 15, दिल्ली (12), कर्नाटक (10), उत्तर प्रदेश (9) और ओडिशा में भी 9 मामले दर्ज किए गए हैं।

कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर बनाए जा रहे व्हिसल ब्लोअर बिल अभी भी खाली डब्बे में पड़ा है और उसके पास होने के लिए सरकार पर जोर भी बनाया जा रहा है। लेकिन, कार्यकर्ताओं की हत्या और जानलेवा हमले सरकार के लिए चिंता की वजह बनते जा रहे हैं।

घर के बाहर से ही फायरिंग कर रहे थे बदमाश

around 56 rti activists killed till 2016
RTI
बताते चलें कि वीरा को उनके घर में ही मौत के घाट उतारा गया था। वीरा अपने घर में बैठ कर टीवी देख रहे थे तभी हमलावरों ने घर के बाहर से ही गोलीबारी शुरू कर दी। इसमें वीरा को गोली लगी और मौके पर ही मौत हो गई। इस आरोप में कांग्रेस के पूर्व पार्षद रजा खान को गिरफ्तार किया गया और पुलिस नेता से पूछताछ कर रही है।

​बताया जा रहा है कि वीरा ने गैरकानूनी ढंग से किए निर्माण पर सवाल उठाए हुए थे और यह कई सालों से चला आ रहा था। पुलिस के मुताबिक हत्या से ठीक पहले नेता को लोकआयुक्त की ओर अवैध निर्माण के लिए नोटिस भी भेजा गया था, जिसके तहत उनकी कई बिल्डिंगों को गिराया जा सकता है।
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