फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   City & states ›   Complete inside storty of Bihar's Political Update, Nitish became CM Again

बिहार में बहार है: थ्रिलर मूवी सी स्क्रिप्ट रच नीतीश कुमार रिकॉर्ड छठी बार बने मुख्यमंत्री

Thu, 27 Jul 2017 12:54 PM IST
amarujala.com- Written by: श्रवण शुक्ला
amarujala.com- Written by: श्रवण शुक्ला Updated Thu, 27 Jul 2017 12:54 PM IST
विज्ञापन
Complete inside storty of Bihar's Political Update, Nitish became CM Again
सीएम नीतीश कुमार - फोटो : self
'बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है' ये नारा बिहार के विधानसभा चुनाव 2015 में लगातार लग रहा था। ये नारा 'अबकी बार, बीजेपी सरकार' के जवाब में आम बिहारियों के मस्तिष्क पटल पर छाया था। वाकई, बिहार में बहार आया और बिहार की सियासी जमीन पर दोनों ही नारों ने गुल खिलाया। वो अलग बात है कि बीजेपी सरकार को सत्ता पाने में और भी दो साल लग गए, पर बिहार में नीतीशे कुमार पहले भी थे और आज भी हैं। हां, कुछ बदल गया है, तो वो हैं उनके साथी।
विज्ञापन


कभी साल 2013 में नरेंद्र मोदी के लगातार आगे बढ़ते रहने का विरोध करते-करते नीतीश कुमार ने एनडीए गठबंधन से अलग होने के अलावा मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा तक दे दिया था, तो 2014 में लोकसभा चुनाव में भी जमकर नरेंद्र मोदी की मुखालफत की और फिर साल 2015 के चुनाव में तो बाकाया नरेंद्र मोदी की अगुवाई में लगातार आगे बढ़ रहे बीजेपी के चुनावी विजय रथ को रोका, बल्कि लालू प्रसाद यादव के साथ प्रचंड बहुमत की सरकार भी बनाई। 
विज्ञापन


LIVE: गठबंधन टूटने पर बोले लालू- नीतीश कुर्सी के लालची, आपके कफन में जेब नहीं झोला है
विज्ञापन
विज्ञापन


अब साल बदल चुका है। समय बदल चुका है। राजनीति भी बदल चुकी है, तो नीतीश ने अपने साथी भी बदल लिए हैं। इस दौरान उनके बेहद खास रहे मांझी को उन्हें दूर करना पड़ा, तो अपने सबसे बड़े दुश्मन लालू प्रसाद यादव को बड़ा भाई मानकर सत्ता साझा करनी पड़ी। और जब 'बिहार के बहार' ने करवट बदली, तो इन्हीं नीतीशे कुमार ने अपने साथी बदल लिए। उसी नरेंद्र मोदी और बीजेपी के साथ सुशील मोदी को गले से लगा लिया, जो जेडीयू से अलगाव के बाद भी उन्हें 'अपना' मान रहे थे। नीतीश के पास मौका भी था, और दस्तूर भी। उन्होंने समय के हिसाब से न सिर्फ अपनी गति बदली, बल्कि पूरी दिशा ही बदलते ही सेंट्रल पॉपुलिज्म के समाजवादी साथियों से हाथ छिटकाकर राइटिस्ट पॉपुलिज्म के अपने पुराने घर में वापसी भी कर ली।

कदम दर कदम कुछ यूं हुई तकरार

Complete inside storty of Bihar's Political Update, Nitish became CM Again
नीतीश कुमार - फोटो : self
आरजेडी के सीनियर लीडर रघुवंश प्रसाद सिंह ने सबसे पहले बिहार कानून व्यवस्था के सवाल पर नीतीश कुमार को घेरा। ये खाईं उसी दिन से बढ़ने लगी थी। ये तारीख थी 21 जनवरी 2016 की। और फिर इसमें 10 सितंबर 2016 को माफिया डॉन और राजद नेता रहे शहाबुद्दीन ने आग में घी डालने का काम किया। शहाबुद्दीन ने जेल से निकलते ही लालू को अपना नेता बनाया और कहा कि नीतीश परिस्थितियों के सीएम हैं। इसके दूसरे ही दिन यानि 11 सितंबर 2016 को नीतीश ने जवाबी हमला किया। उन्होंने सभी को उनकी हैसियत की ओर इशारा करते हुए कहा कि बिहार की जनता को सब पता है कि बिहार का असली नेता कौन है। ये वो तारीख थी, जिसके बाद नीतीश खुद को लालू का छोटा भाई समझने लगे और मुख्यमंत्री होकर भी अपनी बेकद्री का अहसास करने लगे।

JDU-BJP सरकार बनाकर बोले नीतीश, बिहार हित में लिया फैसला, सुशील मोदी डिप्टी CM

बिहार के सबसे बड़े नेता और परिस्थितियों के मुख्यमंत्री जैसे बाणों से घायल नीतीश कुमार ने तुरंत पैंतरेबाजी शुरू कर दी और 'देश के लिए' 29 सितंबर 2016 के दिन सर्जिकल स्ट्राइक की तारीफ की। जिसके विरोध में उनके सभी साथी थे, पर वो दबे मुंह ही सर्जिकल स्ट्राइक की तारीफ कर रहे थे। लेकिन नीतीश ने सभी को नजरअंदाज करते हुए खुले मन से सर्जिकल स्ट्राइक की तारीफ की। इसके सवा महीनों के बाद ही नोटबंदी का समय आया और 9 नवंबर 2016 को नीतीश ने नोटबंदी की जमकर तारीफ कर दी। वहीं, लालू को अब महसूस हो चला था कि नीतीश अलग रास्ते की ओर देखने लगे हैं, बावजूद इसके उन्होंने आदतन नोटबंदी को मोदी का फ्रॉड करार दिया। यहां से जनता के बीच सरकार दो दलों की है, ये बात जाने लगी थी। हालांकि सरकार दोनों ही दल चला रहे थे, पर अबतक नीतीश कुमार को कोई चुनौती नहीं मिल रही थी। पर नोटबंदी ने आरजेडी-जेडीयू के बीच मुद्दों के मतभेद को जगजाहिर कर दिया। 

साल 2017 की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार को करीब आने का मौका दिया। उन्होंने 5 जनवरी 2017 नीतीश के साथ मंच साझा किया और मुक्तकंठ से शराबबंदी अभियान की तारीफ की। ये वो समय था, जब महागठबंधन को लेकर कयास लगने शुरु हो गए। इसे 26 मई 2017 को बल मिला, जब नीतीश विपक्ष के राष्ट्रपति तय करने वाले सोनिया की लंच मीटिंग में नहीं आए, जबकि दूसरे ही दिन यानि 27 मई 2017 को नीतीश ने पीएम मोदी की लंच मीटिंग में हिस्सा लिया।

राष्ट्रपति चुनाव के समय नीतीश ने तैयार की थ्रिलर मूवी की असली स्क्रिप्ट

Complete inside storty of Bihar's Political Update, Nitish became CM Again
फाइल फोटो
राष्ट्रपति चुनाव महागठबंधन के लिए निर्णायक साबित हुआ। यहां लालू ने खुलकर नीतीश कुमार का विरोध किया और फिर महागठबंधन लगातार कमजोर होता चला। नीतीश ने 21 जून 2017 
को एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का समर्थन किया। नीतीश ने इसके पीछे निजी पंसद को वजह बताया, साथ ही उन्होंने कोविंद के बिहार का राज्यपाल होना भी वजह बताया। पर लालू ने कहा कि नीतीश को अपने फैसले पर फिर से सोचना चाहिए, वर्ना दिक्कत पैदा हो सकती है। हालांकि तब महागठबंधन पर किसी ने कुछ भी नहीं कहा, सिवाय 'हम साथ-साथ हैं' के। इसके बाद 17 जून 2017 को लालू के ठिकानों पर सीबीआई ने छापेमारी की। इसमें लालू के बेटे और डिप्टी सीएम के खिलाफ लैंड स्कैम में सीबीआई ने आरोपी बनाया। फिर 8 जुलाई 2017 को लालू की बेटी मीसा भारती की संपत्तियों पर सीबीआई के छापे पड़े। इसके तुरंत बाद महागठबंधन डोलने लगा और जेडीयू नेताओं ने लालू के बेटे तेजस्वी यादव के इस्तीफे की मांग की। 

राहुल गांधी बोले- नीतीश ने दिया धोखा, दिग्विजय ने कहा- ट्रेन छूटी जा रही थी क्या?

तेजस्वी यादव के इस्तीफे को लेकर जेडीयू-आरजेडी के बीच खाईं इतनी चौड़ी हो गई कि 10 जुलाई 2017 को आरजेडी को बैठक बुलानी पड़ी। बैठक के बाद लालू ने ऐलान किया कि तेजस्वी यादव इस्तीफा नहीं देंगे। इसके दूसरे ही दिन 11 जुलाई 2017 को नीतीश ने जेडीयू विधायकों की बैठक में लालू परिवार के खिलाफ छापों पर विचार-विमर्श किया। और जेडीयू के विधायकों ने तेजस्वी के इस्तीफे की मांग तेज कर दी। जेडीयू विधायको ने तेजस्वी यादव के इस्तीफा न देने की स्थिति में उन्हें बर्खास्त करने तक की बात की, पर नीतीश कुमार ने अपने विधायकों पर कोई कार्रवाई नहीं की। इस दौरान लालू प्रसाद यादव अपने किले को बचाने में लगे रहे, पर नीतीश कुमार चुपचाप महागठबंधन के दुर्ग को ध्वस्त करने की रणनीति पर काम करते रहे। इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी से भी मुलाकात की और राष्ट्रपति चुनाव के बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बातचीत करके अपने लिए जमीन तैयार कर ली। 

'नीतीशे कुमार' की स्क्रिप्ट कुछ ऐसी रही कि दोपहर में लालू प्रसाद यादव बयान देते हैं कि नीतीश ने कभी तेजस्वी का इस्तीफा नहीं मांगा। उनकी नीतीश से बातचीत होती है। तो उसी शाम यानि 26 जुलाई को नीतीश कुमार ने अपने विधायकों के बातचीत करके तेजस्वी यादव से इस्तीफा लेने की जगह खुद ही इस्तीफा दे दिया। उन्होंने तेजस्वी और लालू प्रसाद यादव को विक्टिम कार्ड खेलने का मौका दिए बगैर ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और पहले से तय सस्पेंस वाली स्क्रिप्ट में से सुशील मोदी ने आगे का काम कर दिया।

इस्तीफे दर इस्तीफे नीतीश चढ़े हैं राजनीतिक जीवन की सीढ़ियां

Complete inside storty of Bihar's Political Update, Nitish became CM Again
फाइल फोटो
नीतीश कुमार ने 26 मई 2017 को बिहार के सीएम पद से इस्तीफा दिया, तो उसी रात फिर से मुख्यमंत्री बनने के लिए अर्जी राजभवन भेज दिया। ऐसा पहली बार नहीं है कि नीतीश कुमार ने इस्तीफे के तुरंत बाद अपने राजनीतिक जीवन की नई सीढ़ी चढ़ी हो। दरअसल वो जितनी भी बार इस्तीफे का खेल खेलते हैं, उतनी ही बार आगे बढ़ जाते हैं।

नीतीश ने अपने राजनीतिक जीवन में कई बार इस्तीफे दिए हैं। हर बार राजनीतिक सुचिता या फिर भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाते हुए उन्होंने शासन में शुचिता और पारदर्शिता लाने पर जोर दिया। सबसे पहले साल 1999 में एक रेल दुर्घटना की जिम्मेदारी लेते हुए रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था। तब वो एनडीए की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री थे।

नीतीश ने इस्तीफे का नया खेल 2013 में खेला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एनडीए के पीएम कैंडिडेंट के तौर पर उभर कर सामने आए। नीतीश ने कहा कि मोदी का समर्थन कर वह राजनीति के अपने मूल सिद्धांतों से समझौता नहीं कर सकते। और एनडीए से अलग हो गए। 

बिहार के ‘सुशासन बाबू’ के रंग बदलते रहने की ये है पूरी फिल्मी कहानी!

इसके बाद उन्होंने दूसरी बार 17 मई 2014 में सीएम पद से इस्तीफा दिया। इस बार उन्होंने लोकसभा चुनावों में अपनी पार्टी की हार की जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ा था। जीतन राम मांझी को सीएम बनाया। लेकिन फरवरी 2015 में फिर सीएम बन गए। इस बीच वो लेकिन जिस भाजपा के साथ 17 सालों तक गठबंधन कर उन्होंने लालू यादव के आरजेडी को पीछे छोड़ा था, उसी आरजेडी से हाथ मिलकर 2015 के विधानसभा चुनाव में फिर से सीएम बने। और अब भ्रष्टाचार के नाम पर तेजस्वी के इस्तीफे का मसला उठाकर उन्होंने फिर से इस्तीफा दे दिया। और महज कुछ ही घंटों में फिर से मुख्यमंत्री पद पर काबिज हो गए।

नीतीश कुमार की राजनीति को समझने वाले लोग कहते हैं कि एक बार आप चीते की फुर्ती के बीच भी उसकी तेजी में आए उतार-चढ़ाव का अंदाजा लगा सकते हैं। पर 'बिहार में बहार' लाने वाले नीतीश कुमार की चाल का अंदाजा लगाना बेहद कठिन है। वो सुबह मुस्कराकर कुछ बयान देंगे और शाम तक खामोशी से कोई और कदम उठा चुके होंगे। तभी तो, बिहार के छठी बार मुख्यमंत्री बनते ही किसी ने कहा, ये नीतीश कुमार की फिल्म है। वही को-प्रोड्यूसर हैं, वही को-डायरेक्टर , वही लीड एक्टर हैं, वही उस फिल्म के सबकुछ हैं, जो 26 मई को शाम 4 बजे सोए व्यक्ति के सिर्फ 6 घंटों में सोकर उठने के तुरंत बाद बिहार की राजनीतिक फ्रेंचाइज फिल्म की नई 'सुपरहिट' मूवी दिखा देते हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed