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Assembly Election 2022 : पांच साल में 357 प्रत्याशियों ने पार्टी बदलकर विधानसभा चुनाव लड़ा, पढ़िए इनमें से कितने जीत पाए?
सार
Assembly Election 2022: उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही दल बदलने का सिलसिला शुरू हो गया है। फिलहाल यूपी में इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है। यहां योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री से लेकर कई विधायक पार्टी छोड़कर दूसरे दल की तरफ बढ़ चुके हैं।
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Assembly Election 2022
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आमतौर पर नेताओं को लगता है कि पार्टी बदलने से वह चुनाव जीत जाएंगे। लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। राज्यसभा का चुनाव छोड़ दें तो लगभग हर चुनाव में दल बदलकर चुनाव लड़ने वाले कम ही प्रत्याशी जीत पाते हैं।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) की 2016 से 2020 के बीच की रिपोर्ट देखें तो सारी हकीकत आइने की तरह साफ दिखने लगती है। रिपोर्ट के अनुसार इन पांच साल के अंदर 357 नेताओं ने पार्टी बदलकर चुनाव लड़ा। इनमें 170 यानी 48% ही चुनाव जीत पाए। 187 नेताओं को हार का सामना करना पड़ा। जीतने वाले भी ज्यादातर वह प्रत्याशी रहे जो दूसरी पार्टी छोड़कर भाजपा में पहुंचे थे। पार्टी ने ऐसे 67 नेताओं को टिकट दिया था, जिसमें 54 जीत गए।
लोकसभा चुनाव में यह आंकड़ा और हैरान करने वाला है। इसमें कुल 12 नेताओं ने एक पार्टी छोड़कर दूसरे के टिकट पर चुनाव लड़ा और सभी हार गए। विधानसभा उपचुनाव में दल बदलने वाले नेताओं की परफॉरमेंस अच्छी रही है। ऐसे 48 नेताओं ने चुनाव लड़ा और इसमें 39 यानी 81% को जीत मिली।
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राज्यसभा चुनाव में 100% रिजल्ट
राज्यसभा चुनाव में दल बदलकर चुनाव लड़ने वाले नेताओं को 100% सफलता मिली है। इसके पीछे सदस्यों की तय संख्या का वोट करना होता है। इसमें चुनाव पब्लिक को नहीं बल्कि सदन के नेताओं को ही करना होता है। यही कारण है कि पार्टी को काफी हद तक मालूम रहता है कि अगर वह किसी प्रत्याशी को चुनाव में उतारता है तो उसके चीज की संभावना कितने प्रतिशत है?
ये भी जान लें
दूसरे दलों के सबसे ज्यादा विधायक भाजपा में आए
सबसे ज्यादा कांग्रेस विधायकों ने छोड़ा साथ
(आंकड़े 2016 से 2020 तक के हैं। इस दौरान कुल 405 विधायकों ने अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी जॉइन कर ली।)
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एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) की 2016 से 2020 के बीच की रिपोर्ट देखें तो सारी हकीकत आइने की तरह साफ दिखने लगती है। रिपोर्ट के अनुसार इन पांच साल के अंदर 357 नेताओं ने पार्टी बदलकर चुनाव लड़ा। इनमें 170 यानी 48% ही चुनाव जीत पाए। 187 नेताओं को हार का सामना करना पड़ा। जीतने वाले भी ज्यादातर वह प्रत्याशी रहे जो दूसरी पार्टी छोड़कर भाजपा में पहुंचे थे। पार्टी ने ऐसे 67 नेताओं को टिकट दिया था, जिसमें 54 जीत गए।
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लोकसभा चुनाव में यह आंकड़ा और हैरान करने वाला है। इसमें कुल 12 नेताओं ने एक पार्टी छोड़कर दूसरे के टिकट पर चुनाव लड़ा और सभी हार गए। विधानसभा उपचुनाव में दल बदलने वाले नेताओं की परफॉरमेंस अच्छी रही है। ऐसे 48 नेताओं ने चुनाव लड़ा और इसमें 39 यानी 81% को जीत मिली।
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राज्यसभा चुनाव में 100% रिजल्ट
राज्यसभा चुनाव में दल बदलकर चुनाव लड़ने वाले नेताओं को 100% सफलता मिली है। इसके पीछे सदस्यों की तय संख्या का वोट करना होता है। इसमें चुनाव पब्लिक को नहीं बल्कि सदन के नेताओं को ही करना होता है। यही कारण है कि पार्टी को काफी हद तक मालूम रहता है कि अगर वह किसी प्रत्याशी को चुनाव में उतारता है तो उसके चीज की संभावना कितने प्रतिशत है?
ये भी जान लें
- मध्य प्रदेश, मणिपुर, गोवा, अरुणाचल प्रदेश और कर्नाटक में विधायकों के दल बदलने के चलते सरकार गिर गई थी।
- 2019 लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के पांच सांसदों ने अन्य दलों में जाने के लिए पार्टी छोड़ दी थी।
दूसरे दलों के सबसे ज्यादा विधायक भाजपा में आए
| पार्टी | दूसरे दल के कितने विधायक आए? |
| भाजपा | 182 |
| कांग्रेस | 38 |
| टीआरएस | 25 |
| तृणमूल कांग्रेस | 16 |
| एनपीपी | 16 |
| जदयू | 14 |
| बसपा | 11 |
| सपा | 08 |
सबसे ज्यादा कांग्रेस विधायकों ने छोड़ा साथ
| पार्टी | कितने विधायकों ने साथ छोड़ा? |
| कांग्रेस | 170 |
| भाजपा | 18 |
| बसपा | 17 |
| टीडीपी | 17 |
| सपा | 12 |