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फीस वृद्धि मामला: एपीजे स्कूल विवाद के बीच बाल भारती स्कूल की टेक ओवर प्रक्रिया शुरू, उपराज्यपाल ने भी दी अनुमति
Thu, 29 Jul 2021 07:35 PM IST
Harendra Chaudhary
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Thu, 29 Jul 2021 07:35 PM IST
सार
शिक्षा निदेशालय ने अपनी जांच में पाया था कि बाल भारती स्कूल के पास वर्ष 2017-18 में 23.81 करोड़ रुपये बैलेंस था। इस धनराशि में से 20.94 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया था। इस खर्च के बाद भी स्कूल के पास लगभग 2.87 करोड़ रुपये शेष बचते थे...
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मनीष सिसोदिया
- फोटो : Amar Ujala (File)
विस्तार
एपीजे स्कूल के टेक ओवर विवाद के बीच दिल्ली सरकार ने एक अन्य बेहद प्रतिष्ठित स्कूल बाल भारती स्कूल के टेक ओवर की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बाल भारती स्कूल पर भी एपीजे स्कूल की तरह संस्थान के पास पर्याप्त फंड होने के बाद भी छात्रों से ज्यादा फीस लेने का आरोप था। उपराज्यपाल अनिल बैजल से भी अनुमति मिल जाने के बाद यह प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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इसके पूर्व, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बाल भारती स्कूल के प्रबंधन को सरकार के हाथ में लेने के लिए शिक्षा निदेशालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। यह फाइल एलजी के पास भेजी गई थी, जिसे अब स्वीकृति मिल गई है।
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शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि वे पूरी दिल्ली के अभिभावकों को आश्वस्त करना चाहते हैं कि वे शिक्षा जगत में माफियाराज नहीं चलने देंगे। कोई भी संस्थान मानक से ज्यादा फीस वसूली नहीं कर पाएगा। अगर किसी संस्थान ने ज्यादा फीस लेने की कोशिश की तो उसके साथ सख्ती से व्यवहार किया जाएगा।
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शिक्षा निदेशालय ने अपनी जांच में पाया था कि बाल भारती स्कूल के पास वर्ष 2017-18 में 23.81 करोड़ रुपये बैलेंस था। इस धनराशि में से 20.94 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया था। इस खर्च के बाद भी स्कूल के पास लगभग 2.87 करोड़ रुपये शेष बचते थे। इससे यह साफ हो जाता है कि स्कूल को फीस बढ़ाने की कोई आवश्यकता नहीं थी। यही कारण है कि सरकार ने सत्र 2017-18 के लिए स्कूल द्वारा फीस बढ़ाने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था।
शिक्षा निदेशालय के इस स्पष्ट नीति के बाद भी आरोप है कि स्कूल ने अगले ही सत्र में फीस बढ़ा दी। अभिभावकों ने इसके विरुद्ध शिक्षा निदेशालय को शिकायत की थी। आरोप है कि बार-बार स्पष्टीकरण मांगे जाने के बाद भी स्कूल ने फीस बढ़ाने के संदर्भ में कोई जवाब नहीं दिया था, जिसके बाद स्कूल के मैनेजमेंट को सरकार ने अपने हाथों में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी। इसके संदर्भ में स्कूल को 10 मई 2019 को नोटिस भी जारी किया गया था।