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Amar Ujala Exclusive: हरीश रावत बोले- कांग्रेस अध्यक्ष के बारे में बात करके आप हमारी कमजोर नब्ज को दबाते हैं

Thu, 12 Aug 2021 04:55 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी विनोद अग्निहोत्री
विनोद अग्निहोत्री Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Thu, 12 Aug 2021 04:55 PM IST
सार

उत्तराखंड में पार्टी को दुबारा सत्ता में लाने की रणनीति बनाने की बात हो या पंजाब में कैप्टन-सिद्धू के बीच सुलह कराने का मुद्दा। पार्टी आलाकमान ने अपने पुराने दमदार नेता हरीश रावत पर एक बार फिर भरोसा जताया है।

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Amar Ujala Exclusive: Special interaction with former Chief Minister of Uttarakhand Harish Rawat
अमर उजाला से बातचीत के दौरान हरीश रावत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत से कुछ ज्वलंत मुद्दों पर बातचीत की। इस बातचीत के दौरान उन्होंने अमर उजाला के पाठकों द्वारा पूछे गए सवालों के भी जवाब दिए और अपनी पार्टी और देश के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। इस बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि आपके यहां और आपकी पार्टी में सब ठीक चल रहा है तो आप कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव क्यों नहीं करा पा रहे हैं, इतना लंबा समय हो गया राहुल गांधी को अध्यक्ष पद से हटे हुए। आप अभी तक अपने लिए अध्यक्ष ही नहीं चुन पा रहे हैं, तो इसके उत्तर में हरीश रावत बोले- कांग्रेस अध्यक्ष के बारे में बात करके आप हमारी कमजोर नब्ज को दबाते हैं।

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सवाल :  इस बार चुनाव में विशेष क्या है? 
जवाब : हरीश रावत ने कहा कि हर चुनाव में विपक्ष अपना प्रचार करता है, लेकिन यह पहला ऐसा चुनाव देखने को मिल रहा है कि जब जनता ही कह रही है कि उसे बदलाव चाहिए। इसमें भाजपा का सबसे बड़ा हाथ है। चार महीने के अंदर तीन-तीन मुख्यमंत्री देकर उसने यह साबित कर दिया है कि उसके पास कोई प्लान नहीं है। एक बार वह जिसे सही कहती है, चंद दिनों के बाद मुख्यमंत्री बदलकर वह उसे ही गलत साबित कर देती है। इस प्रकार जनता की नाराजगी के पीछे भाजपा की ही सबसे बड़ी भूमिका है। बार-बार मुख्यमंत्रियों में बदलाव यह साबित करता है कि उसके पास सही सोच का अभाव है।
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सवाल: इस बार मुख्य मुद्दे क्या होंगे?
जवाब: दरअसल, इस चुनाव में मुद्दों का घालमेल हो गया है। केंद्र से लेकर राज्य तक हर जगह अनेक मुद्दे हैं जो जनता को परेशान कर रहे हैं। केंद्र सरकार हर आर्थिक मुद्दे पर असफल साबित हुई है। हर गृहणी किचन की हर चीज की बढ़ती महंगाई से परेशान है। वहीं, पेगासस जैसे मुद्दे ने देश के हर नागरिक के मन में असुरक्षा की भावना पैदा की है। इससे लोग चिंतित हो गए हैं। कोरोना काल में राज्य सरकार बुरी तरह असफल साबित हुई है। बेरोजगारी के कारण राज्य का हर युवा परेशान है। लोगों को समझ नहीं आ रहा है कि किस मुद्दे पर भाजपा के खिलाफ मतदान करें क्योंकि ये हर मुद्दे पर असफल साबित हुए हैं।
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सवाल- उत्तराखंड में आपने काफी अच्छी तरह सरकार चलाई थी, लेकिन इसके बाद भी कांग्रेस चुनाव में बुरी तरह हारी। इसका कारण क्या था? 
जवाब-  दरअसल, नरेंद्र मोदी ने पिछले चुनाव में उत्तर प्रदेश में जिस तरह आक्रामक प्रचार किया था, उसने उत्तराखंड में भी भारी असर डाला था जिसमें कांग्रेस को काफी नुकसान हुआ था। लेकिन इसके बाद भी आपको कहना चाहता हूं कि कांग्रेस ने भाजपा की तुलना में बेहद कम, केवल 0.1 प्रतिशत कम वोट प्राप्त किए थे। यह बात और रही कि इससे सीटों की संख्या काफी कम हो गई। आप ध्यान रखें कि यह चुनाव परिणाम हमारे कई नेताओं के पाला बदलने के बाद भी हासिल किया था। यह साबित करता है कि हमारा मतदाता हमारे साथ बना रहा है। यह हमारी बड़ी जीत है। हमारी यही ताकत इस चुनाव में कांग्रेस की जीत के लिए बड़ी भूमिका निभाएगी।






सवाल: उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी के रूप में तीसरा मोर्चा आ गया है। क्या इससे कांग्रेस को मुश्किल होगी?
जवाब: आप उत्तराखंड के इतिहास को देखिए। यूकेडी ने राज्य के लिए नारा दिया, लेकिन चुनाव में जनता ने राष्ट्रीय दलों को चुना। चीन की सीमा पर बैठा आदमी भी राष्ट्रीय सोच से प्रभावित होता है। बसपा हरिद्वार में बहुत जोरशोर से आई और आठ सीटें जीत ले गई। अब हरिद्वार में भी हमारी और भाजपा की टक्कर है। चुनाव दो राष्ट्रीय दलों के बीच ही होगा, चाहे कोई क्षेत्रीय पार्टी आ जाए। हम दिल्ली नहीं हैं, हम विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र में फैले हुए राज्य में हैं। आप जिस तरह कनॉट प्लेस घूम सकते हैं, उस तरह देहरादून घूमने नहीं जा सकते। नुकसान भाजपा के वोट को होना है। वो बिजली का खिलौना लेकर जाते हैं, लेकिन पहले ही वह सब कर चुके हैं। हमने सस्ती बिजली दी थी, जीते तो कल भी सबसे सस्ती बिजली देंगे। भाजपा में असंतोष है। अब वहां के नेताओं को लग रहा है कि अंगूर खट्टे हैं। हम भी दरवाजे बंद कर नहीं रखेंगे। हम आकलन करेंगे। कई लोग बहुत कलाकार है, उनकी पाचन शक्ति बहुत भारी है। वे भाजपा को ही मुबारक हों। जो लोग सीधे-सादे हैं, वे जीतने लायक होंगे तो विचार करेंगे।
 

सवाल: इतनी संवेदनाएं कि कांग्रेस अब तक एक अध्यक्ष नहीं चुन पाई?
जवाब: सोनिया जी हमारी संकटमोचक हैं। 1998 में भी वे संकटमोचक रहीं। पहली जीत उत्तराखंड में मिली। केंद्र में 10 साल सरकार चली। कुछ बुराइयां जो सत्ता के साथ चलती हैं, वे कांग्रेस में जल्दी आ जाती हैं। अच्छी सरकार हमने गंवा दी। इससे देश का नुकसान हुआ। ये हमारी अपनी कमजोरियां थीं। जिस व्यक्ति के साथ हमने अपना भविष्य जोड़ा था, लेकिन हार की वजह से उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी ले ली। कुछ बातचीत हो जाती तो हम कहते कि हार के लिए हम सभी समान रूप से जिम्मेदार हैं। राहुल जी को दोबारा अध्यक्ष पद स्वीकार करना पड़ेगा। वे सहयोगियों की मानवीय संवेदनाओं और भावनाओं को दरकिनार नहीं कर सकते। वे समय ले रहे हैं। उन्हें निर्णय तो हम जैसे कार्यकर्ताओं के ही पक्ष में लेना पड़ेगा, अध्यक्ष पद संभालना पड़ेगा।

सवाल: कांग्रेस अपने बड़े नेताओं को संभाल क्यों नहीं पाती। बड़े-बड़े पदों पर रहने वाले आपके कई नेता दूसरे दलों में चले गए। इसका क्या कारण है? 
जवाब: मुझे लगता है कि जितिन प्रसाद के मामले में पार्टी से कुछ गलती हुई। इसे यह भी कह सकते हैं कि जितिन प्रसाद ने अपनी भावनाएं पार्टी के सामने रखने में कुछ कमी रखी। ऐसा नहीं होना चाहिए था। लेकिन अगर आप ज्योतिरादित्य सिंधिया की बात करें तो उन्होंने धैर्य नहीं दिखाया। अगर वे कुछ दिन धैर्य रखते तो वे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री होते। राजनीति में धैर्य रखना चाहिए।

सवाल: लेकिन इसी समय आपकी पार्टी में जी-23 का अलग ही प्रसंग चल रहा है। आप क्या कहेंगे? 
जवाब: कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है। वह इन सब बातों को पचाते हुए आज की कांग्रेस बनी है। इसलिए मुझे लगता है कि पार्टी के कुछ नेताओं का कुछ अलग विचार है तो भी उसे साथ लेकर चलना चाहिए और हम ऐसा करने में हर बार सक्षम रहे हैं, आगे भी सबको साथ लेकर आगे चलेंगे।

सवाल: पार्टी के सामने पंजाब का बड़ा संकट है। आपने इसे सुलझा लिया है, लेकिन अब आगे क्या संभावनाएं हैं? 
जवाब: मुझे लगता है कि पंजाब के सभी नेताओं ने समझ लिया है कि 2022 की जंग जीतने के लिए सभी को साथ आना पड़ेगा। सिद्धू के अध्यक्ष बनने पर जिस तरह सभी नेता साथ आए, उससे आप कह सकते हैं कि पार्टी ने सभी मामले सुलझा लिए हैं। सभी लोग साथ मिलकर लड़ेंगे और जीतेंगे।

सवाल: उत्तराखंड के चुनाव में आप किन मुद्दों को लेकर जाएंगे जिससे आपकी सत्ता में वापसी हो सके? 
जवाब: मुझे लगता है कि राज्य के युवाओं की बेरोजगारी हमारे लिए सबसे बड़ा मुद्दा है। बेरोजगारी के कारण युवा परेशान हो रहे हैं। हम इसे सबसे प्रमुख मुद्दा बनाएंगे। इसके बाद महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं बनाकर उनका विश्वास जीतना हमारी दूसरी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। महिलाएं महंगाई से लेकर अपनी उपेक्षा से सबसे ज्यादा परेशान हैं।

सवाल: सोशल मीडिया से आपके लिए एक सवाल आया है। हमारे उत्तराखंड के एक दर्शक ने पूछा है कि आप कहां से चुनाव लड़ेंगे? 
जवाब: पार्टी ने मुझे लंबे समय से बड़ी जिम्मेदारी दे रखी है। ऐसे में मैं पार्टी के ऊपर अपनी इच्छा का भार नहीं डालूंगा। पार्टी जहां से भी चुनाव लड़ाना बेहतर समझेगी। मैं चुनाव लड़ने के लिए तैयार हूं।
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