गडकरी की टिप्पणी भाजपा के अंदर उठ रही आवाज को करती है प्रदर्शित : राकांपा
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वहीं, कांग्रेस के एक नेता ने गडकरी पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रवक्ता नवाब मलिक ने केंद्रीय मंत्री की टिप्पणी के एक दिन बाद आज दावा किया कि गडकरी खुद को ‘‘मोदी के एक विकल्प’’ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि भाजपा आगामी लोकसभा चुनाव हारने जा रही है।
मलिक ने कहा, ‘‘तीन राज्यों (राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़) में हुए विधानसभा चुनावों के बाद गडकरी जी जिस तरह से मुखर हुए हैं, उससे संकेत मिलता है कि चुनाव के बाद मोदी या भाजपा की सरकार नहीं रहने वाली है।’’
गौरतलब है कि पिछले महीने हिंदी पट्टी के इन तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में राकांपा की सहयोगी पार्टी कांग्रेस विजेता बन कर उभरी थी और उसने वहां भाजपा को सत्ता से बेदखल कर दिया।
मलिक ने कहा, ‘‘कहीं ना कहीं, मोदी की नाकामी को लेकर भाजपा के अंदर भी आवाज उठ रही है। चूंकि भाजपा हारने जा रही है, इसलिए वह (गडकरी) खुद को मोदी के विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।’’
इस बीच, नागपुर से कांग्रेस नेता आशीष देशमुख ने गडकरी पर प्रहार करते हुए कहा कि वह झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री अलग विदर्भ राज्य और नागपुर की अंबाजारी झील में ‘सी - प्लेन’ को लेकर लोगों से किए अपने वादे को पूरा नहीं कर रहे हैं।
देशमुख ने कहा कि गडकरी की टिप्पणी मंत्री पर भी लागू होती है।
एक बयान में देशमुख को उद्धृत करते हुए कहा गया है कि इसलिए नागपुर के लोग किसानों से किए वादों और युवाओं से किए गए रोजगार के वादों को पूरा नहीं करने को लेकर उन्हें आगामी चुनाव में झटका देने के लिए व्यग्र हैं।
दरअसल, केंद्रीय जल संसाधन मंत्री गडकरी ने रविवार को कहा था कि जो नेता लोगों को सपने बेचते हैं, लेकिन उन्हें पूरा कर पाने में नाकाम रहते हैं तो जनता उनकी पिटाई भी करती है।
मंत्री ने जोर देते हुए कहा था कि वह अपने वादों को पूरा करने में यकीन रखते हैं।
इससे पहले, पिछले महीने गडकरी ने पुणे में एक कार्यक्रम में कहा था कि नेतृत्व के पास शिकस्त और नाकामियों को स्वीकार करने की प्रवृत्ति होनी चाहिए। उनकी यह टिप्पणी हालिया विधानसभा चुनावों में भाजपा को मिली हार के बाद आई थी।
इस बीच, यवतमाल में 13 जनवरी को वार्षिक मराठी साहित्य उत्सव में गडकरी ने कहा था कि नेताओं को अन्य क्षेत्रों में दखल नहीं देना चाहिए।
साहित्य उत्सव में शामिल होने के लिए लेखिका नयनतारा सहगल को दिया गया न्योता कथित तौर पर एक राजनीतिक दल के दबाव में आकर वापस लिए जाने के बाद हुए विवाद के बाद गडकरी ने यह टिप्पणी की थी।