निर्भया के दरिंदों के बाद अब दो सगी बहनों की हो सकती है फांसी की सजा
- 42 बच्चों की कातिल हैं कोल्हापुर की दोनों बहनें, हो चुकी है फांसी की सजा
- जेल में हुई मां की मौत, बेटियों को मिली है सजा ए मौत
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निर्भया के दरिंदों को सात साल के बाद ही सही, लेकिन कानून के लंबे हाथ ने उन्हें फांसी के फंदे तक पहुंचा ही दिया। इसके बाद अब नंबर है, महाराष्ट्र के कोल्हापुर की दो सगी बहनों का, जिन्हें जल्द ही फांसी हो सकती है। नाम हैं रेणुका शिंदे और सीमा गावित। आजाद भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा जब किसी महिला को फांसी दी जाएगी।
दोनों बहनें बीते 25 साल से पुणे की यरवडा की उस जेल में बंद हैं, जहां आतंकी अजमल कसाब को फांसी दी गई थी। बच्चों का अपहरण और उसकी क्रूर हत्या के मामले में रेणुका और सीमा के साथ उसकी मां अंजनीबाई गावित की अहम भूमिका थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तीनों महिलाएं 42 बच्चों की कातिल हैं। हालांकि कोर्ट में 42 में से अपराध के 9 मामले ही साबित हो पाए। कोल्हापुर की दोनो महिलाएं बच्चों का अपहरण करती थीं। उसे अपनी सुरक्षा के लिए ढाल के तौर पर इस्तेमाल करती थीं और मकसद पूरा हो जाने पर बेरहमी से उसकी हत्या कर देती थीं।
ऐसे हुई अपराध की शुरुआत
90 के दशक में दोनो बहनों ने मां के साथ चोरी से हत्या की दुनिया में कदम रखा। तब बड़ी बेटी रेणुका की उम्र 17 साल और छोटी बेटी सीमा की उम्र 15 साल थी, जब इन्होंने अपनी मां के साथ मिलकर पहले बच्चे की हत्या की थी। अंजनीबाई को उसके पति ने छोड़ दूसरी महिला से शादी कर ली।
इसके बाद रुपए कमाने के लिए अंजनीबाई ने अपराध की दुनिया में कदम रखा। रेणुका का एक बेटा भी था। एक दिन उसने मंदिर में चोरी की और जब पकड़ी गई तो बेटे को आगे कर उस पर सारा इल्जाम डाल दिया। लोगों ने रहम कर बेटे और मां को छोड़ दिया।
कहा जाता है कि यहीं से रेणुका और उसकी मां-बहन को बच्चा चोरी का ख्याल आया। उसके बाद रेणुका अपनी बहन सीमा और मां के साथ मिलकर बच्चा चोरी करती थी। जब बच्चे अपराध की दुनिया में पुराने हो जाते थे और उन्हें लोग पहचानने लगते थे, तो ये महिलाएं उनकी हत्या कर देती थीं।
हत्या के बाद थिएटर में देखी फिल्म
इन महिलाओं ने जो हत्याएं की उस हत्या की कुछ कहानियां रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं। कहा जाता है कि एक सात महीने के बच्चे को तो सिर्फ इसलिए जमीन पर पटककर मार डाला था, क्योंकि वह ज्यादा रो रहा था।
वहीं दो साल के एक बच्चे का सिर पहले दीवार से पटककर उसकी जान ले ली और फिर उसके टुकड़े-टुकड़े कर थैले में भरा। उसके बाद कोल्हापुर के एक थिएटर में सिनेमा देखने गई थीं।
नासिक पुलिस ने गिरफ्तार कर भेजा था जेल
एक बच्चे के अपहरण के आरोप में नासिक पुलिस ने इन तीनों को गिरफ्तार किया था और नवंबर, 1996 में पुलिस ने तीनों को जेल में डाल दिया। पूछताछ के दौरान जो मामले सामने आए, उससे न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि देशभर में हलचल मच गई थी।
तीनों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे। रेणुका का पति इस मामले में मुख्य गवाह बन गया, तो उसके खिलाफ सारे मामले हटा लिए गए। दिसंबर, 1997 में अंजनीबाई की गिरफ्तारी के एक साथ बाद ही जेल में मौत हो गई।
अब दोनों को है सजा का इंतजार
29 जून 2001 को सेशन कोर्ट ने दोनों हत्यारी बहनों को फांसी की सजा सुनाई। अगस्त 2006 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी यही सजा बरकरार रखी। 14 अगस्त 2014 को राष्ट्रपति के पास दया याचिका दी।
उस समय प्रणव मुखर्जी देश के राष्ट्रपति थे। बाद में राष्ट्रपति ने भी दोनों बहनों की दया याचिका खारिज कर दी। अब दोनों को सजा-ए-मौत का इंतजार है।