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ये हैं यूपी पुलिस की मैरी कॉम, बहादुरी को सरकार ने किया सलाम
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 05 Mar 2016 09:49 AM IST
सार
वह उत्तर प्रदेश की पहली महिला पुलिसकर्मी हैं जिन्होंने बॉक्सिंग रिंग में उतरकर विरोधियों को जबरदस्त चुनौती दी।
ऑल इंडिया पुलिस बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उन्होंने अपने जबरदस्त पंच से हरियाणा की चैंपियन को दिन में तारे दिखा दिए थे।
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उमा की उपलब्धि से पूरा स्टाफ उत्साहित है
- फोटो : amar ujala
विस्तार
हरियाणा की चैंपियन को किया था परास्त
नारी शक्ति की प्रतीक रानी लक्ष्मी बाई पुरस्कार से सम्मानित होने जा रहीं हेड कांस्टेबल (प्रोन्नत वेतनमान) उमा शर्मा उत्तर प्रदेश पुलिस की ‘मैरी कॉम’ हैं। उत्तर प्रदेश सरकार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर उन्हें रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से सम्मानित करेगी।
वह उत्तर प्रदेश की पहली महिला पुलिसकर्मी हैं जिन्होंने बॉक्सिंग रिंग में उतरकर विरोधियों को जबरदस्त चुनौती दी। 2009 में पुणे में आयोजित ऑल इंडिया पुलिस बॉक्सिंग चैंपियनशिप की 69 किलोग्राम वर्ग में उन्होंने अपने जबरदस्त पंच से हरियाणा की चैंपियन को दिन में तारे दिखा दिए थे। इस प्रतियोगिता में उमा ने सिल्वर मैडल जीतकर इतिहास रचा।
इसके बाद 2010 में केरल के त्रिचूर में आयोजित ओपन नेशनल चैंपियनशिप में भी उमा के मुक्कों ने कहर बरपाया। हालांकि, यहां उन्हें चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा। उमा कहती हैं, ‘यूपी पुलिस के अब तक के इतिहास में बॉक्सिंग रिंग से मैडल लाने वाली वह पहली और आखिरी महिला हैं।’
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नारी शक्ति की प्रतीक रानी लक्ष्मी बाई पुरस्कार से सम्मानित होने जा रहीं हेड कांस्टेबल (प्रोन्नत वेतनमान) उमा शर्मा उत्तर प्रदेश पुलिस की ‘मैरी कॉम’ हैं। उत्तर प्रदेश सरकार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर उन्हें रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से सम्मानित करेगी।
वह उत्तर प्रदेश की पहली महिला पुलिसकर्मी हैं जिन्होंने बॉक्सिंग रिंग में उतरकर विरोधियों को जबरदस्त चुनौती दी। 2009 में पुणे में आयोजित ऑल इंडिया पुलिस बॉक्सिंग चैंपियनशिप की 69 किलोग्राम वर्ग में उन्होंने अपने जबरदस्त पंच से हरियाणा की चैंपियन को दिन में तारे दिखा दिए थे। इस प्रतियोगिता में उमा ने सिल्वर मैडल जीतकर इतिहास रचा।
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इसके बाद 2010 में केरल के त्रिचूर में आयोजित ओपन नेशनल चैंपियनशिप में भी उमा के मुक्कों ने कहर बरपाया। हालांकि, यहां उन्हें चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा। उमा कहती हैं, ‘यूपी पुलिस के अब तक के इतिहास में बॉक्सिंग रिंग से मैडल लाने वाली वह पहली और आखिरी महिला हैं।’
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पुलिस में भर्ती होने के बाद शुरू की बॉक्सिंग
उमा की उपलब्धि से पूरा स्टाफ उत्साहित है
- फोटो : amar ujala
सीएम कार्यालय से घोषणा के बाद महिला थाने में जश्न
शुक्रवार सुबह सीएम कार्यालय से उन्हें रानी लक्ष्मी बाई पुरस्कार दिए जाने की घोषणा के बाद महिला थाने में जश्न का माहौल बन गया। अदम्य साहस के लिए जानी जाने वाली उमा की उपलब्धि से पूरा स्टाफ उत्साहित है। एसओ रूमा यादव ने पूरे स्टाफ को मिठाई बंटवाई।
उमा ने बताया कि वह मूलरूप से आगरा की रहने वाली हैं। 1997 में वह बतौर सिपाही पुलिस में भर्ती हुई थीं। इससे पहले उन्होंने कभी बॉक्सिंग नहीं की।
पुलिस में भर्ती होने के बाद उन्होंने पहली बार बॉक्सिंग रिंग में उतरकर हाथ आजमाए। पुणे में सिल्वर मैडल जीतने के बाद उनकी हेड कांस्टेबल पद पर पदोन्नति हो गई। इसके बाद उमा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक सफलता की सीढ़ियां चढ़ती गईं।
शुक्रवार सुबह सीएम कार्यालय से उन्हें रानी लक्ष्मी बाई पुरस्कार दिए जाने की घोषणा के बाद महिला थाने में जश्न का माहौल बन गया। अदम्य साहस के लिए जानी जाने वाली उमा की उपलब्धि से पूरा स्टाफ उत्साहित है। एसओ रूमा यादव ने पूरे स्टाफ को मिठाई बंटवाई।
उमा ने बताया कि वह मूलरूप से आगरा की रहने वाली हैं। 1997 में वह बतौर सिपाही पुलिस में भर्ती हुई थीं। इससे पहले उन्होंने कभी बॉक्सिंग नहीं की।
पुलिस में भर्ती होने के बाद उन्होंने पहली बार बॉक्सिंग रिंग में उतरकर हाथ आजमाए। पुणे में सिल्वर मैडल जीतने के बाद उनकी हेड कांस्टेबल पद पर पदोन्नति हो गई। इसके बाद उमा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक सफलता की सीढ़ियां चढ़ती गईं।
उमा शर्मा
रेप के आरोपी को दौड़ाकर किया गिरफ्तार, जड़े थे जोरदार मुक्के
था। उमा की इसी बहादुरी पर एसओ रूमा यादव ने उनके नाम की संस्तुति रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार के लिए की थी। अधिकारियों ने एसओ के प्रस्ताव पर मुहर लगाकर इसे शासन को भेजा, जहां उमा को चुन लिया गया।
बकौल उमा, बीती 30 नवंबर को महिला थाने में गुडंबा निवासी राजेश रावत और कुलदीप त्रिवेदी पर रेप की एफआईआर दर्ज की गई थी। राजेश को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। कुलदीप की तलाश हो रही थी। एसओ रूमा यादव को कुलदीप के अपने घर के आसपास मौजूद होने की सूचना मिली जिस पर उन्होंने उमा और स्टाफ को साथ लेकर दबिश दी। कुलदीप मौके से भाग निकला। उमा अकेली उसके पीछे दौड़ पड़ी। सब्जी मंडी पर सरे शाम आदमी और उसके पीछे एक महिला पुलिसकर्मी को भागते देख सनसनी मच गई।
कुछ ही पलों में कुलदीप आंखों से ओझल हो गया। हालांकि, उमा ने हार नहीं मानी और वह उसे खोजती रहीं। उमा ने बताया कि कुलदीप पीली शर्ट पहने था। इसलिए भीड़ में उसे पहचानना आसान था। कुछ देर बाद कुलदीप सड़क किनारे खड़े ट्रकों की आड़ में शर्ट बदलते हुए दिख गया। उमा ने पीछे से उसकी पैंट पकड़ ली।
कुलदीप ने विरोध किया तो उसे जोरदार मुक्के मारकर काबू कर लिया। इसी बीच पीछे से एसओ और अन्य पुलिसकर्मी आ गए और कुलदीप को कब्जे में ले लिया।
था। उमा की इसी बहादुरी पर एसओ रूमा यादव ने उनके नाम की संस्तुति रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार के लिए की थी। अधिकारियों ने एसओ के प्रस्ताव पर मुहर लगाकर इसे शासन को भेजा, जहां उमा को चुन लिया गया।
बकौल उमा, बीती 30 नवंबर को महिला थाने में गुडंबा निवासी राजेश रावत और कुलदीप त्रिवेदी पर रेप की एफआईआर दर्ज की गई थी। राजेश को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। कुलदीप की तलाश हो रही थी। एसओ रूमा यादव को कुलदीप के अपने घर के आसपास मौजूद होने की सूचना मिली जिस पर उन्होंने उमा और स्टाफ को साथ लेकर दबिश दी। कुलदीप मौके से भाग निकला। उमा अकेली उसके पीछे दौड़ पड़ी। सब्जी मंडी पर सरे शाम आदमी और उसके पीछे एक महिला पुलिसकर्मी को भागते देख सनसनी मच गई।
कुछ ही पलों में कुलदीप आंखों से ओझल हो गया। हालांकि, उमा ने हार नहीं मानी और वह उसे खोजती रहीं। उमा ने बताया कि कुलदीप पीली शर्ट पहने था। इसलिए भीड़ में उसे पहचानना आसान था। कुछ देर बाद कुलदीप सड़क किनारे खड़े ट्रकों की आड़ में शर्ट बदलते हुए दिख गया। उमा ने पीछे से उसकी पैंट पकड़ ली।
कुलदीप ने विरोध किया तो उसे जोरदार मुक्के मारकर काबू कर लिया। इसी बीच पीछे से एसओ और अन्य पुलिसकर्मी आ गए और कुलदीप को कब्जे में ले लिया।
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