West Asia Conflict Live: पाकिस्तान की फजीहत, होर्मुज पार करने से पहले ही ईरान ने रोक दिया दो तेल टैंकर
West Asia Crisis Live Updates: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच इस्लामाबाद में शांति वार्ता को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। 21 घंटे की बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल है और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से लौटा गया। इससे अब एक बार फिर जंग शुरू होने की आशंका बढ़ गई है, हालांकि लेबनान को लेकर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है। अमर उजाला के इस लाइव ब्लॉग में पढ़ें पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से जुड़े तमाम पल-पल अपडेट्स...
लाइव अपडेट
पाकिस्तान की फजीहत, होर्मुज पार करने से पहले ही ईरान ने रोक दिया दो तेल टैंकर
हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास से एक बड़ी खबर सामने आई है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, पाकिस्तान के झंडे वाले दो तेल टैंकर रास्ते से ही वापस लौट गए। रिपोर्ट के अनुसार, इन टैंकरों के नाम खैरपुर और शलामार बताए गए हैं। ये दोनों जहाज हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन किसी वजह से आगे नहीं बढ़ सके और उन्हें वापस लौटना पड़ा।
हालांकि टैंकरों के लौटने की सटीक वजह साफ नहीं बताई गई है, लेकिन माना जा रहा है कि इलाके में बढ़ते तनाव और सुरक्षा खतरे इसके पीछे हो सकते हैं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का एक बेहद अहम समुद्री मार्ग है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल का व्यापार होता है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं वैश्विक तेल सप्लाई और कीमतों पर असर डाल सकती हैं।
ईरान युद्ध में इस्राइल के अबतक 11 अरब डॉलर खर्च
इस्राइल ने ईरान के खिलाफ अमेरिका के साथ मिलकर जो युद्ध शुरू किया, उससे देश को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। इस्राइल के वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इस युद्ध पर अब तक करीब 11 अरब डॉलर (लगभग 35 अरब शेकेल) खर्च हो चुके हैं। मंत्रालय ने बताया कि कुल खर्च में से करीब 22 अरब शेकेल सिर्फ रक्षा (डिफेंस) पर खर्च किए गए हैं। यह एक शुरुआती अनुमान है और आगे खर्च बढ़ भी सकता है।सरकार ने यह भी कहा कि इस पूरे खर्च को 2026 के बजट में पहले ही शामिल कर लिया गया है। यानी आने वाले समय में देश की आर्थिक योजनाओं पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
पाकिस्तान से ईरानी प्रतिनिधिमंडल की वापसी
पाकिस्तान में हुई उच्च स्तरीय वार्ता के बाद ईरान का प्रतिनिधिमंडल वापस लौट गया है। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब अमेरिका-ईरान वार्ता किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंच सकी।दक्षिण लेबनान में इस्राइली हमला, 5 की मौत
लेबनान के दक्षिणी शहर काना में इस्राइली हमले में 5 लोगों की मौत और कई अन्य के घायल होने की खबर है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, बचाव दल घायलों को अस्पताल पहुंचाने में जुटे हुए हैं। इसके अलावा टायर जिले के अन्य इलाकों में भी हमलों की खबरें सामने आई हैं, जहां कई लोग घायल हुए हैं। काना शहर पहले भी 1996 और 2006 में बड़े हमलों का गवाह रहा है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, संघर्ष की शुरुआत से अब तक हजारों लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। हालिया हमलों में भी कई लोगों की मौत और घायल होने की पुष्टि की गई है।ईरान का कूटनीतिक रुख कायम
ईरान ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि कूटनीति का रास्ता कभी समाप्त नहीं होता और वह बातचीत के लिए हमेशा तैयार है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, कूटनीति राष्ट्रीय हितों की रक्षा और उन्हें आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि ईरान, पाकिस्तान और अन्य मित्र देशों के साथ परामर्श की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, संवाद और बातचीत के रास्ते खुले रहेंगे। क्षेत्रीय मुद्दों पर विभिन्न देशों के साथ संपर्क और चर्चा जारी रखने पर जोर दिया गया है।
ईरान बोला- बहाना तलाश रहा था वॉशिंगटन
ईरानी पक्ष से जुड़े एक सूत्र ने दावा किया है कि अमेरिका वार्ता से बाहर निकलने के लिए बहाना तलाश रहा था। सूत्र के मुताबिक, अमेरिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए बातचीत का इस्तेमाल करना चाहता था, लेकिन मौजूदा मतभेदों और युद्ध जैसे हालात के चलते कोई समाधान नहीं निकल सका। सूत्र ने यह भी संकेत दिया कि ईरान ने फिलहाल आगे की वार्ता को लेकर कोई योजना नहीं बनाई है, जिससे कूटनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।
21 घंटे की बातचीत विफल
अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई लंबी बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। 21 घंटे तक चली मैराथन वार्ता के बाद अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने किसी भी समझौते पर सहमति नहीं बनने की पुष्टि की और पाकिस्तान से वापस लौट गया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संक्षिप्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ईरान ने वाशिंगटन की शर्तों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसके कारण समझौता संभव नहीं हो सका।
West Asia Conflict Live: पाकिस्तान की फजीहत, होर्मुज पार करने से पहले ही ईरान ने रोक दिया दो तेल टैंकर
पाकिस्तान में रविवार को अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता जारी है। दो हफ्ते के अस्थायी संघर्षविराम की घोषणा के कुछ दिन बाद यह वार्ता हो रही है। पश्चिम एशिया में संघर्ष सातवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस युद्ध में हजारों लोगों की मौत हुई है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है।अमेरिकी सेना ने कहा कि उसके दो जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरे हैं, जो खाड़ी युद्ध क्षेत्र में बारूदी सुरंगों को हटाने की तैयारी से पहले हुआ है। लेकिन ईरान की सरकारी मीडिया ने कहा कि ईरान के संयुक्त सैन्य कमान ने इस दावे को खारिज कर दिया है।
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, हम होर्मजु जलडमरूमध्य को खाली कर रहे हैं। चाहे समझौता हो या न हो, मेरे लिए कोई फर्क नहीं पड़ता। यह बयान तब आया, जब बातचीत चल रही थी और इस्लामाबाद में समय करीब 2 बजे रात का हो रहा था। ट्रंप ने माना कि गंभीर वार्ता चल रही है। वहीं, ईरान के सरकारी टेलीविजन ने कहा कि बातचीत में 'गंभीर' मतभेद हैं।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं और ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ कर रहे हैं। दोनों पक्षों ने पाकिस्तान के साथ मिलकर संघर्षविराम को आगे बढ़ाने पर चर्चा की है। लेकिन यह संघर्षविराम गहरे मतभेदों और इस्राइल के लगातार हमलों से दबाव में है। इन हमलों में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह को भी नुकसान हुआ है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, मौत का आंकड़ा 2,000 से अधिक हो चुका है।
1979 की ईरान इस्लामी क्रांति के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सीधा संपर्क 2013 में हुआ था, जब राष्ट्रपति बराक ओबामा ने नए चुने गए राष्ट्रपति हसन रूहानी से बात की थी। बाद में 2015 के ईरान परमाणु समझौते की बातचीत के दौरान विदेश मंत्री जॉन केरी और ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ मिले थे। यह प्रक्रिया एक साल से ज्यादा चली थी।
ईरान की 'शर्तें'
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ने कहा कि त्रिपक्षीय वार्ता ईरान की पूर्व शर्तों के बाद शुरू हुई, जिनमें दक्षिण लेबनान में इस्राइली हमलों को रोकना भी शामिल था। ईरान के प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ बैठक में शर्तें रखीं। इनमें युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए मुआवजा और अमेरिका-इस्राइल की ओर से जब्त की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करना शामिल है। यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था।
इस युद्ध में अब तक ईरान में कम से कम 3,000 लोग मारे गए हैं। लेबनान में 2,020, इस्राइल में 23 और खाड़ी देशों में दर्जनों लोग मारे गए हैं। साथ ही कई खाड़ी देशों के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के नियंत्रण ने खाड़ी क्षेत्र के तेल और गैस निर्यात को काफी हद तक वैश्विक बाजार से काट दिया है, जिससे ऊर्जा की कीमतें बढ़ गई हैं। बढ़ते तनाव को देखते हुए क्षेत्रीय अधिकारियों ने बताया कि चीन, मिस्र, सऊदी अरब और कतर के अधिकारी इस्लामाबाद में मौजूद हैं, ताकि बातचीत को अप्रत्यक्ष रूप से आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर यह जानकारी दी।
पोप लियो चौदहवें ने की युद्ध की निंदा
तेहरान में लोगों ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि वे हालात को लेकर संशय में हैं, लेकिन उम्मीद भी रख रहे हैं, क्योंकि हफ्तों की बमबारी ने 9.3 करोड़ की आबादी वाले देश में भारी तबाही मचाई है। 62 वर्षीय आमिर रजाई फार ने कहा, शांति अकेले काफी नहीं है क्योंकि हमारे देश को बहुत नुकसान हुआ है। भारी कीमत चुकानी पड़ी है। पोप लियो चौदहवें ने भी इस युद्ध की निंदा की है। उन्होंने बताया कि 'सर्वशक्तिमान होने का भ्रम' है, जो इस संघर्ष को बढ़ा रहा है।