अमर उजाला शब्द सम्मान 2024: 'पायो जी मैंने रामरतन धन पायो', डॉ. एन राजम के वायलिन से गूंजी सुरीली धुन
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Sat, 01 Mar 2025 03:49 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Sat, 01 Mar 2025 03:49 PM IST
खास बातें
अमर उजाला शब्द सम्मान समारोह सुविख्यात वायलिन वादक पद्मभूषण डॉ. एन. राजम के मुख्य आतिथ्य में हुआ। कार्यक्रम में डॉ. एन. राजम, उनकी बेटी संगीता शंकर और नातिन रागिनी शंकर ने वायलिन वादन से सभी का मन मोहा।
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डॉ. एन राजम की संगीत प्रस्तुति।
- फोटो : अमर उजाला
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लाइव अपडेट
08:08 PM, 28-Feb-2025
अमर उजाला शब्द सम्मान में मौजूद शब्द साधक और विलक्षण साधक।
- फोटो : अमर उजाला
07:58 PM, 28-Feb-2025
समारोह में बनारस के होली गीतों की भी धुन गूंजी। इसके बाद उन्होंने वायलिन पर राग भैरवी की प्रस्तुति दी।
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07:44 PM, 28-Feb-2025
अमर उजाला शब्द सम्मान समारोह में वायलिन वादन से पद्मभूषण डॉ. एन. राजम, उनकी बेटी संगीता शंकर और उनकी पुत्री रागिनी शंकर भजन की प्रस्तुति दे रही हैं। कार्यक्रम में राग श्याम कल्याण के बाद मीरा के भजनों की प्रस्तुति हो रही है। उन्होंने पायो जी मैंने राम रतन धन पायो भजन की प्रस्तुति दी।
07:41 PM, 28-Feb-2025
हमें पीढ़ियों को मूल्य देने होंगे: संगीता शंकर
वायलिन वादक और एम राजन की बेटी संगीता शंकर ने कहा कि साहित्यकारों की जमघट में हमें आनंद आ रहा है। गोविंद जी ने एक बात कही थी कि अंधकार को देखने की जगह हम अपनी शम्मा जला दें। हमें पीढ़ियों को मूल्य देने होंगे। संगीता शंकर ने बताया कि पांच से 15 साल के बच्चों को मूल्य आधारित शिक्षा देने के उद्देश्य से उन्होंने एक पहल शुरू की है। इसके तहत बच्चों के लिए कविताओं को रागों में संगीतबद्ध कर गीत बनाए जा रहे हैं। इन गीतों के जरिये किसी न किसी नैतिक मूल्य का संदेश दिया जा रहा है। ऐसे 30 गीतों को अब तक संगीतबद्ध किया जा चुका है।07:13 PM, 28-Feb-2025
वायलिन की प्रस्तुति।
- फोटो : अमर उजाला
06:51 PM, 28-Feb-2025
प्रख्यात संगीतज्ञ और वायलिन वादक डॉ. एन. राजम की संगीत प्रस्तुति शुरू हाे गई है। उनकी बेटी संगीता शंकर और उनकी पुत्री रागिनी शंकर भी प्रस्तुति दे रहीं हैं। तबले पर संगत पर बनारस घराने से अभिषेक मिश्र कर रहे हैं।
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06:47 PM, 28-Feb-2025
प्रख्यात संगीतज्ञ और वायलिन वादक डॉ. एन. राजम ने कहा कि इस समारोह में भाग लेते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। इतने बड़े बड़े लोगों को प्रत्यक्ष देखने का मौका मिला इसी से मैं सम्मानित हुई।
06:39 PM, 28-Feb-2025
भाषा कारागार नहीं पंख बने: सितांशु यशश्चंद्र
आकाशदीप सम्मान पाने वाले सितांशु यशश्चंद्र ने कहा कि आकाशदीप सम्मान के लिए अपनी मातृभाषा की तरफ से प्रसन्नता व्यक्त करता हूं। मातृभाषा क्या है और वो मेरी कैसे बनी? भाषा चाहें जो हो प्रत्येक का मातृत्व क्या है? एक युवती जब मां बनती है तो युवती से मां बन जाती है। वह व्यापक मानव संबंधों को जन्म देती है। वैसे ही एक भाषा जब एक साहित्य को जन्म देती है जैसे गुजराती हिन्दी उड़िया आदि तो गत समय में साहित्य को जन्म देने लगी, तो समस्त भाषा कुल में एक हलचल मच जाती है, भले ही दिखे नहीं। भाषा मातृ भाषा कब बनती है। गुजरात में हेमचंद्र ने गुजराती राजस्थानी मिला कर अनुशासन ट्राई लिखी थी। उन्होंने कहा कि सर्व भाषा परिणिता: ऐसी भाषा जो और सरल भाषाओं में परिणत हो सके। हेमचंद कहते हैं कि हमारी भाषा हमारा कारागार नहीं बनना चाहिए, बल्कि पंख बने। उन्होंने कहा कि एक अमेरिकी कवयित्री अंडे का व्यापार करती थी एक रोज जब उसने अंडे को उठाना चाहा तो उसमें एक बच्चा उड़ना चाह रहा था। ऐसे ही कवि के अंदर भी हलचल होती है। साहित्यकार का कर्म है कि जब तक प्रत्येक व्यक्ति की मातृभाषा मानव भाषा न बने तब तक हमें साहित्य का सृजन करना चाहिए, कविता कहते रहना चाहिए।06:36 PM, 28-Feb-2025
शब्दों के अर्थ धुंधले और उल्टे सीधे हो रहे :गोविंद मिश्र
आकाशदीप सम्मान पाने वाले साहित्यकार गोविंद मिश्र ने कहा कि लेखकों को जानने का सबसे अच्छ तरीका उन तक रचनाओं के माध्यम से पहुंचना है। शब्दों के मार्फत रचनाकार तक पहुंचना। मनुष्य की स्थिति आज गाजर मूली जैसी हो गई है, युद्ध को रोकने के बजाय खनिज पर लोगों की नजर है। शब्दों के अर्थ धुंधले और उल्टे सीधे हो रहे हैं। शब्द, धर्म, साहित्य, प्रेम, कर्म इनके मायने क्या हैं। उन्होंने कहा कि मुझे अपने गुरुजनों की याद आती है जिन्होंने मुझे पढ़ाई और फिर साहित्य से जोड़ा। मैं उनका अनुग्रही हूं। उन्होंने कहा कि इन दिनों धर्म के बारे में काफी कन्फ्यूजन है। लेकिन तुलसीदास ने बताया कि परहित सरस धर्म नहीं भाई। साहित्य और कर्म की भी परिभाषाएं हैं। उन्होंने अहमद फ़राज़ का एक शेर पढ़ा कि शिकवा ए जुल्मत ए शब से तो कहीं बेहतर था, कि अपने हिस्से के की कोई शम्मा जलाते जाते। उन्होंने कहा कि लेखन एकांत में पढ़ा जाता है तो आपकी आत्मा से संवाद करता है। संसार में जो कष्ट है उसे झेलने की ताकत देता है। सुंदरता ही संसार को बचाएगी। यानि अच्छाई ही संसार को बचाएगी।06:33 PM, 28-Feb-2025
अमर उजाला शब्द सम्मान में श्रेष्ठ कृतियों के लिए सम्मान पाने वाले साहित्यकार।