UGC Bill Row Live: यूजीसी के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को मंजूरी, पढ़ें पल-पल की ताजा अपडेट
UGC Bill 2026 Controversy News Live: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने जाति आधारित भेदभाव को कम करने और भारतीय परिसरों में समावेशिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026 पेश किए। सवर्ण समाज ने इन नियमों को अस्पष्ट या एकतरफा बताया है। देशभर में इन नियमों को वापस लेने की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस मामले पर लगातार छात्रों, शिक्षकों, शिक्षाविदों और राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
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लाइव अपडेट
क्या है यूजीसी?
- 1944 में तैयार की गई सार्जेंट रिपोर्ट में पहली बार विश्वविद्यालय अनुदान समिति बनाने की सिफारिश की गई।
- 1945 में यूजीसी का प्रारंभिक गठन अलीगढ़, बनारस और दिल्ली विश्वविद्यालयों के लिए किया गया।
- 1947 में इसे सभी विश्वविद्यालयों से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी मिली।
- 1948 में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग बना।
- 28 दिसंबर 1953 को तत्कालीन शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद ने यूजीसी का औपचारिक उद्घाटन किया।
- बाद में नवंबर, 1956 में यूजीसी अधिनियम, 1956 के तहत इसे कानूनी दर्जा मिला और यह एक स्थायी वैधानिक संस्था बन गई।
बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती की प्रतिक्रिया
2. जबकि पार्टी का यह भी मानना है कि इस प्रकार के नियमों को लागू करने के पहले अगर सभी को विश्वास में ले लिया जाता तो यह बेहतर होता और देश में फिर सामाजिक तनाव का कारण भी नहीं बनता। इस ओर भी सरकारों व सभी संस्थानों को ज़रूर ध्यान देना चाहिये।
3. साथ ही, ऐसे मामलों में दलितों व पिछड़ों को भी, इन वर्गों के स्वार्थी व बिकाऊ नेताओं के भड़काऊ बयानों के बहकावे में भी क़तई नहीं आना चाहिये, जिनकी आड़ में ये लोग आएदिन घिनौनी राजनीति करते रहते हैं अर्थात् इन वर्गों के लोग ज़रूर सावधान रहें, यह भी अपील।
1.देश की उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवादी भेदभाव के निराकरण/समाधान हेतु विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी, द्वारा सरकारी कॉलेज एवं निजी यूनिवर्सिटियों में भी ’इक्विटी कमेटी’ (समता समिति) बनाने के नये नियम के कुछ प्रावधानों को सामान्य वर्ग के केवल जातिवादी मानसिकता के ही लोगों…
— Mayawati (@Mayawati) January 28, 2026
यूजीसी नियम पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने की मंजूरी दे दी है। याचिका में नियम को गैर-समावेशी बताते हुए जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा पर सवाल उठाए गए हैं। इस मामले में उच्च शिक्षा से जुड़े कई अहम पहलुओं पर बहस होने की संभावना है।राष्ट्रपति के नाम खून से लिखा पत्र
मंगलवार को राष्ट्रीय सैनिक संस्था ने नगर पालिका परिसर स्थित शहीद स्तंभ पर धरना प्रदर्शन किया। संगठन के पदाधिकारियों ने इस कानून को वापस लेने की मांग करते हुए राष्ट्रपति के नाम खून से पत्र लिखा और इसे एसडीएम ईला प्रकाश को सौंपा।अर्धनग्न प्रदर्शन और मशाल मार्च
अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो उन्होंने देशभर में आंदोलन की चेतावनी भी दी। प्रदेश अध्यक्ष दुर्गेश सिंह दीपू के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने हाथों में मशालें लेकर विधान भवन की ओर मार्च भी किया।
शिक्षा मंत्री का बयान
मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा में निष्पक्षता और समानता को बढ़ावा देना है और उन्होंने शिक्षण संस्थानों से इन्हें जिम्मेदारी से लागू करने का आग्रह किया। उनकी यह टिप्पणी देश भर में नए नियमों को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों और बहसों के बीच आई है, जिसमें समर्थक और विरोधी दोनों ही अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।
#WATCH | On new regulation of UGC, Union Education Minister Dharmendra Pradhan says," I assure everyone there will be no discrimination and no one can misuse the law." pic.twitter.com/0ZRgWaU76H
— ANI (@ANI) January 27, 2026
यूपी के कई जिलों में प्रदर्शन तेज
प्रदर्शन कर रहे एक छात्र का बयान
VIDEO | Varanasi, UP: As students protest against the University Grants Commission (UGC) Bill 2026, student Anuj Tripathi says, “We strongly oppose this... People from all castes come here to study. If you only consider one perspective, if you believe that only the upper castes… pic.twitter.com/D5syW4y52g
— Press Trust of India (@PTI_News) January 27, 2026
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
यूजीसी के नए कानून को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कई याचिकाकर्ताओं ने नए नियम को चुनौती देते हुए इसे संविधान और यूजीसी अधिनियम, 1956 का उल्लंघन बताया। याचिकाएं खास तौर पर इन नियमों के विनियम 3(सी) को लेकर दायर की गईं, जिसे याचिकाकर्ताओं ने मनमाना, बहिष्कर करने वाला और भेदभावपूर्ण करार दिया है। अधिक पढ़ें...यह भी पढ़ें: क्या है यूजीसी का इक्विटी कानून, क्यों हो रहा इसका विरोध? जानें पूरा मामला
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिक्रिया
#WATCH | Delhi | Azad Samaj Party (Kanshiram) President and MP Chandrashekhar Azad says, "The pain of an SC/ST/OBC can be understood by an SC/ST/OBC only. The guidelines have not been made by members of the SC/ST/OBC but by the committee based on the rising number of such cases… pic.twitter.com/SViTfK2MfH
— ANI (@ANI) January 27, 2026
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