फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Lifestyle ›   Stress Management ›   This Is How Social Media Is Destroying Your Life

आपकी पूरी जिंदगी तबाह कर देगी इस चीज की लत, फौरन बदल लें आदत

Sun, 28 Jan 2018 10:26 AM IST
बीबीसी हिन्दी
बीबीसी हिन्दी Updated Sun, 28 Jan 2018 10:26 AM IST
विज्ञापन
This Is How Social Media Is Destroying Your Life
Social Media

सोशल मीडिया आज के दौर में बेहद ताकतवर माध्यम बन गया है। लोग खुलकर इजहार-ए-खयाल कर रहे हैं। दुनिया को बता रहे हैं कि वह क्या कर रहे हैं। कब कहां हैं। किस चीज का लुत्फ उठा रहे हैं। किस बात से उन्हें परेशानी हो रही है। मगर सोशल मीडिया के हद से ज्यादा इस्तेमाल से मुश्किलें भी खड़ी होने लगी हैं। चूंकि ये संवाद का नया माध्यम है, इसलिए इस बारे में ठोस रिसर्च कम है और हौव्वा ज्यादा। आज लोग सोशल मीडिया की लत पड़ने की बातें करते हैं।

विज्ञापन

This Is How Social Media Is Destroying Your Life
smartphone

क्या होता है सोशल मीडिया के ज्यादा इस्तेमाल से?
सवाल यह है कि सोशल मीडिया पर कितना वक्त बिताना ठीक है? और किस हद के पार जाना इसकी लत पड़ने में शुमार होता है? यूं तो सोशल मीडिया की लत को लेकर कुछ रिसर्च होनी शुरु हुई हैं, मगर अभी इनसे भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका है। हां, अब तक सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर जो तजुर्बे हुए हैं, उनसे एक बात तो सामने साफ तौर पर आई है। वह यह कि बहुत ज्यादा सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाले दिमागी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। डिप्रेशन और नींद न आने की समस्या से जूझ रहे हैं।

किसी चीज की लत पड़ना सिर्फ उसमें जरूरत से ज्यादी दिलचस्पी को नहीं दर्शाती है। बल्कि लत पड़ने का मतलब यह है कि लोग उस चीज पर अपनी मानसिक और जज्बाती जरूरतों के लिए भी निर्भर हो गए हैं। वो अपनी असली दुनिया के रिश्तों की अनदेखी करने लगते हैं। फिर काम और बाकी जिंदगी के बीच जो तालमेल होना चाहिए, वह भी गड़बड़ाने लगता है। यह ठीक उसी तरह है जैसे लोगों को शराब या ड्रग्स की लत लग जाती है। जरा सी परेशानी हुई नहीं कि शराब के आगोश में चले गए, या सिगरेट जला ली।

विज्ञापन
विज्ञापन

This Is How Social Media Is Destroying Your Life
Facebook

नींद की समस्या बढ़ती है
बीबीसी ने एक मोटे तजुर्बे से पाया है कि अगर कोई शख्स दो घंटे या इससे ज्यादा वक्त सोशल मीडिया पर गुजारता है, तो आगे चलकर वो डिप्रेशन का शिकार हो जाता है, जज्बाती तौर पर अकेलापन महसूस करता है। सोशल मीडिया पर हमेशा डटे रहने की वजह से हमारी सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है। देर रात तक ट्विटर या फेसबुक देखते रहने से हमारी नींद पर बहुत बुरा असर पड़ता है। मोबाइल या कंप्यूटर की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रौशनी हमारे शरीर की बॉडी क्लॉक को कंट्रोल करने वाले हारमोन मेलाटोनिन का रिसाव रोकती है। मेलाटोनिन हमें नींद आने का एहसास कराता है। मगर इसका रिसाव रुक जाने की वजह से हम देर तक जागते रहते हैं। नींद ठीक से नहीं ली, तो यकीनन दूसरी परेशानियां होने लगती हैं।

लंदन के सेंट थॉमस हॉस्पिटल के डॉक्टर चार्ल्स टियक कहते हैं कि अगर बेडरूम में मोबाइल या लैपटॉप है, तो आम तौर पर लोग उसका इस्तेमाल करते हैं। नतीजा यह होता है कि वो अपनी नींद से समझौता करते हैं। इससे खास तौर से युवाओं को नई चीजें सीखने में मुश्किलें आती हैं। 

विज्ञापन

This Is How Social Media Is Destroying Your Life
Whatsapp

कौन करते हैं सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल?
एक रिसर्च के मुताबिक, ज्यादातर युवा, महिलाएं या अकेले लोग ही सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं। सोशल मीडिया के ज्यादा इस्तेमाल की वजहें कम तालीम, कम आमदनी और खुद पर भरोसे की कमी होना भी होती हैं। आत्ममुग्ध लोग भी सोशल मीडिया का बहुत इस्तेमाल करते हैं। लोग सोशल मीडिया पर जाते हैं ताकि अपना खराब मूड ठीक कर सकें। मगर, रिसर्च बताती हैं कि सोशल मीडिया पर जाकर भी इससे आपको राहत नहीं मिलती।

लंदन के मनोवैज्ञानिक डॉक्टर जॉन गोल्डिन कहते हैं कि वर्चुअल दुनिया में वे लोग दोस्त बनाने जाते हैं, जो असल जिंदगी में बहुत अकेले होते हैं। वर्चुअल दोस्त काम के हो सकते हैं। मगर ये असली दोस्तों के विकल्प नहीं हो सकते। इसलिए डॉक्टर गोल्डिन सलाह देते हैं कि लोगों को घर से बाहर निकलकर, असल दुनिया में लोगों से मिलना और बात करनी चाहिए।

This Is How Social Media Is Destroying Your Life
twitter blue badge

डिप्रेशन की वजह बना सोशल मीडिया

पूर्वी यूरोपीय देश हंगरी में सोशल मीडिया एडिक्शन स्केल नाम का पैमाना इजाद किया गया है। इसके जरिए पता लगाते हैं कि किसे सोशल मीडिया की कितनी लत है। इस स्केल की मदद से पता चला कि हंगरी के 4.5 फीसद लोगों को सोशल मीडिया की लत पड़ गई है। ऐसे लोगों के अंदर खुद पर भरोसे की कमी साफ दिखी। वे डिप्रेशन के भी शिकार हो चुके हैं। इन लोगों को सलाह दी गई कि वेस्कूल-कॉलेज में सोशल मीडिया डिएडिक्सन क्लास में जाएं और खुद का इलाज कराएं।

हंगरी में हुई यह रिसर्च हमें आगाह करने के लिए काफी है। सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल करने की आदत सभी लोगों में नहीं होती। हमें इसके इस्तेमाल को लेकर खुद पर कुछ बंदिशें लगानी होंगी। वरना हम में से कई लोगों के हंगरी के उन 4.5 फीसद लोगों में शामिल होने का डर है, जो सोशल मीडिया की लत के शिकार हैं। बीमार हैं। सोशल मीडिया का जरूरत से ज्यदा इस्तेमाल हमें बीमार, बहुत बीमार बना सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News App अपने मोबाइल पे|
Get all update about bollywood news, fitness news, cricket news, Entertainment news in Hindi. Stay updated with us for all breaking hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed