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जैसे हमारा ख्याल होगा, ठीक वैसा ही व्यवहार, सबूत देख लीजिए
amarujala.com- Presented by: मंजू ममगाईं
Updated Sun, 26 Nov 2017 09:53 AM IST
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मंगलवार को प्रोफेसर सिमी जब क्लास में घुस ही रही थीं, तब एक लड़का जल्दबाज़ी में अपनी सीट पर पहुंचने के चक्कर में दूसरे लड़के से टकरा गया। दूसरा लड़का बोतल से पानी पी रहा था। धक्का लगने की वजह से पानी गिर गया और दोनों के ऊपर पड़ा। दोनों की कमीज गीली हो गई। दूसरा लड़का पहले लड़के पर चिल्लाया, देखकर नहीं चल सकते क्या?
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पहले लड़के ने विनम्रता से जवाब देते हुए कहा, माफ करना, गलती से लग गया। लेकिन पहला लड़का जितनी विनम्रता से माफी मांग रहा था, दूसरा लड़का उस पर उतना ही भड़क रहा था। वह बोला, तुम्हारे माफी मांग लेने से क्या होगा? पानी वापस बोतल में चला जाएगा क्या? पूरी क्लास यह सब देख रहा था।
यही सब प्रोफेसर सिमी भी देख रही थीं। उनको देखते ही दूसरे लड़के का गुस्सा शांत हो गया और सब अपनी-अपनी सीटों पर जाकर बैठ गए।
यही सब प्रोफेसर सिमी भी देख रही थीं। उनको देखते ही दूसरे लड़के का गुस्सा शांत हो गया और सब अपनी-अपनी सीटों पर जाकर बैठ गए।
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प्रोफेसर सिमी बोलीं, मुझे याद है, जब मैं अपनी साइकॉलोजी क्लास में पढ़ा करती थी, तब मेरे सर एक उदाहरण दिया करते थे। एक बार एक कॉन्फ्रेंस में दो लोग हिस्सा लेने गए। दोनों के हाथ में चाय के कप थे और दोनों एक दूसरे से टकरा गए। जब वे दोनों टकराए, तब उनके कप से चाय एक दूसरे के ऊपर छलक गई और दोनों जल गए।
कितनी साधारण-सी बात है। है न? लेकिन अगर मैं यह कहूं कि सिर्फ उस चाय के गिरने से दोनों की जिंदगी बदल गई और वे दोनों जेल में पहुंच गए, तो क्या आप मानेंगे? सारे छात्र हैरान थे।
कितनी साधारण-सी बात है। है न? लेकिन अगर मैं यह कहूं कि सिर्फ उस चाय के गिरने से दोनों की जिंदगी बदल गई और वे दोनों जेल में पहुंच गए, तो क्या आप मानेंगे? सारे छात्र हैरान थे।
प्रोफेसर बोलीं, असल में कप उनका मन था, जिसमें गर्म-गर्म चाय यानी गुस्से वाले भाव भरे हुए थे। जैसे ही दोनों में टकराव हुआ, दोनों के मन के भाव, यानी गुस्सा, जिसे हम चाय कह रहे हैं, एक दूसरे पर बरस पड़े। दोनों में झड़प हो गई। हम सब के हाथ में हमारा कप होता है।
यदि हम उसमें चाय भरेंगे, तो चाय ही गिरेगी न। अगर ठंडा पानी भरेंगे, तो गिरेगा भी ठंडा पानी। तो अब आप लोग ही तय करिए कि आपको अपने कप में क्या भरना है! जैसे हमारे ख्याल होंगे, ठीक वैसा ही हमारा व्यवहार होगा।
यदि हम उसमें चाय भरेंगे, तो चाय ही गिरेगी न। अगर ठंडा पानी भरेंगे, तो गिरेगा भी ठंडा पानी। तो अब आप लोग ही तय करिए कि आपको अपने कप में क्या भरना है! जैसे हमारे ख्याल होंगे, ठीक वैसा ही हमारा व्यवहार होगा।