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शक, साजिश और भ्रम की दुनिया में रहते हैं सिजोफ्रेनिया से पीड़ित लोग

ऊर्जा डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 06 Sep 2018 09:49 AM IST
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सिजोफ्रेनिया से पीड़ित व्यक्ति की सोच, समझ और व्यवहार में परिवर्तन आ जाता है। ऐसा मस्तिष्क में होने वाले रासायनिक असंतुलन के कारण होता है।बिना किसी वजह के हर बात और हर शख्स को शक की नजर से देखना, कल्पना की दुनिया में खोये रहना, वैसी ध्वनि सुनाई देना, जो वास्तव में नहीं होती आदि एक मनोरोग है। इस मानसिक बीमारी से पीड़ित व्यक्ति सिर्फ खुद की कल्पनाशील बातों पर ही विश्वास करता है। उसे दूसरों की बातें झूठ लगती है। वह अपनी सोच को न ही सही दिशा में ले जा पाता है और न ही किसी परिणाम तक पहुंच पाता है। जो लोग इस मनोरोग से घिरे होते हैं, उन्हें खुद भी इस बारे में पता नहीं होता है।
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हालांकि शक करने को सामान्य अर्थों में लिया जाता है, लेकिन डॉक्टर कहते हैं कि यह एक बीमारी है, जो मस्तिष्क में होने वाले रासायनिक असंतुलन के कारण होती है। इसे सिजोफ्रेनिया कहते हैं। इसके लक्षण कई तरह के होते हैं। शुरुआत में ही अगर इसके लक्षण पहचान लिए जाएं तो इस रोग को काबू में किया जा सकता है। अक्सर यह बीमारी किशोरावस्था के बाद से ही शुरू हो जाती है। धीरे-धीरे पीड़ित को हर बात पर और हर किसी पर शक होने लगता है। वह अपनों से ही कटा-कटा रहने लगता है।

पीड़ित इस बात को लेकर हमेशा कंफ्यूज रहता है कि उसे क्या कहना है। वह किसी एक काम में ध्यान नहीं लगा पाता है। कभी-कभी तो वह अपने बचाव में दूसरों के प्रति आक्रामक भी हो जाता है। पीड़ित अपने खयाल और अपनी सोच के अलावा कुछ और मानने के लिए तैयार ही नहीं होता। उसे लगता है कि जो वह सोच रहा है या कर रहा है, वही सही है और बाकी सब गलत।
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