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अगर चाहते हैं लंबी उम्र तो रखिए सकारात्मक सोच, रिसर्च में हुआ खुलासा

Sun, 14 Jan 2018 03:25 PM IST
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Updated Sun, 14 Jan 2018 03:25 PM IST
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If you want long life then keep thinking positive research
positive thoughts

मन का संबंध सेहत से होता है। अगर मन में नकारात्मक विचार होंगे, तो इसका असर सेहत पर भी पड़ेगा। अगर आप बीमार नहीं पड़ना चाहते, तो सकारात्मक सोच रखिए।  सेन डियागो में हुए एक शोध के मुताबिक, नकारात्मक सोच अगर दिमाग पर हावी रहे, तो इससे उम्र कम होती है और असमय मौत का खतरा बना रहता है। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपुल ने नकारात्मक और सकारात्मक विचार पर एक शोध किया।

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शोध में पाया गया कि जिन लोगों के दिमाग में नकारात्मकता हमेशा हावी रहती है, तो इससे उनके दिमाग की सेहत को नुकसान पहुंचता है। यूएस के नेशनल साइंस फाउंडेशन का शोध कहता है कि हमारे दिमाग में आने वाले विचारों में 70 प्रतिशत विचार नकारात्मक ही होते हैं। इसलिए जरूरी है कि तथ्यों और कल्पनाओं को आधार बनाकर मन पर कब्जा करने वाले नकारात्मक विचारों से बचा जाए। इससे दिमाग और शरीर दोनों की सेहत संवरती है। सकारात्मक सोच हमें उदासी, तनाव से दूर करती है और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। 
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आसान है इससे बचना
अगर आप चाहते हैं कि आपके दिमाग में नकारात्मकता हावी न हो, तो नकारात्मक सोच वाले लोगों से दूर रहें। अगर ऐसी सोच वाले लोग आपके आसपास होते हैं, तो आपके दिमाग में भी इस तरह के विचार आने लगते हैं। इससे आप तनावग्रस्त हो सकते हैं। तनाव दिल, दिमाग और अन्य गंभीर बीमारियों का सबसे बड़ा कारण है।
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चिकित्सकों के अनुसार, यदि दिमाग में नकारात्मक विचार लगातार चलते रहेंगे, तो इससे आपकी दिनचर्या भी प्रभावित होगी। नकारात्मक सोचने से दिमाग से ऐसे केमिकल का स्राव होता है, जो हमें बीमार बनाता है। इससे खानपान प्रभावित होता है, नींद नहीं आती। चिड़चिड़ापन हावी रहता है, गुस्सा अधिक आता है। अगर दिमाग में ऐसा कुछ चल भी रहा है, तो योगा करें, मेडिटेशन करें। मनोरंजन के साधन ढूढ़ें। 

वजह को पहचानिए 
किसी परेशानी की वजह से नकारात्मक विचार दिमाग में चलते हैं। यह परेशानी घर, ऑफिस, कारोबार या निजी संबंधों के कारण भी हो सकती है। परेशानी को पहचानें, उसका हल खोजें। इसका लाभ यह होगा कि दिमाग शांत होगा और आप बेहतर तरीके से अपने कार्यों को कर पाएंगे।

यदि नकारात्मकता दिमाग पर हावी हो रही है, तो सबसे अच्छा माध्यम है कि आप अपने मन की बात अपने परिवार, दोस्त या किसी खास व्यक्ति से साझा करें। इससे दिमाग शांत होगा और आप बेहतर महसूस करेंगे। 

शोधकर्ताओं की माने, तो हमारे इमोशंस हमारे इम्यून सिस्टम को प्रभावित करते हैं। मन के अंदर चलने वाली उलझन से बाहरी बदलाव भी दिखने लगते हैं। यह बढ़ते वजन का कारण भी होती है। इससे याददाश्त भी कम होने लगती है। नींद न आना, अवसाद बढ़ना भी इसी कारण से होता है।

चिकित्सकों के अनुसार, तनाव से दिल संबंधी बीमारी, ब्रेन हेमरेज, बीपी बढ़ना आदि बीमारी हो सकती हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ कैर्लिफोनिया के शोधकर्ताओं का मानना है कि कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियां मन और उसके व्यवहार से जुड़ी होती हैं। 

डॉक्टर कहते हैं 
एम्स दिल्ली के मनोचिकित्सक डॉ. हर्षित गर्ग बताते हैं कि यदि नकारात्मक विचार लगातार बने रहें, तो इनसे हमारी आत्मशक्ति कम हो जाती है। हम डिप्रेशन में जा सकते हैं। इससे हमारे काम, दिनचर्या, कार्यक्षमता पर असर पड़ सकता है। साथ ही कई बीमारियों के होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

कई शोधों में यह बात सामने आई है कि इससे हमारा इम्यून सिस्टम भी प्रभावित होता है। ज्यादा नकारात्मक सोचने वाले लोग या तो कम खाने लगते हैं या ज्यादा खाने लगते हैं। इसका नींद प्रभावित होती है और व्यक्ति ब्‍ल्ड प्रेशर, डायबिटीज का शिकार भी हो सकता है।

अमर उजाला के खुला पन्ना से साभार

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