फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Lifestyle ›   Relationship ›   When a helpless lady decided to take her own decisions at her own risk

जब 20 साल की विवाहिता ने जन्मे 4 बच्चे तो टूट गया हौंसला, शैतान पति को ऐसे दिया जवाब

Mon, 26 Feb 2018 04:04 PM IST
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 26 Feb 2018 04:04 PM IST
विज्ञापन
When a helpless lady decided to take her own decisions at her own risk

तब मसला कुछ और था। मैंने अपने पति को अपनी तन्ख़्वाह असल से कम बताई थी ताकि कुछ पैसे जमा कर सकूं और उसे शराब में पैसे उड़ाने से रोक सकूं। मालूम था कि पकड़ी गई तो कितनी मार पड़ेगी। आंख सूज जाएगी, आंतों में दर्द रहेगा, कमर पर कुछ निशान होंगे। पर सुकून था कि बैंक की फ़िक्स्ड डिपॉज़िट में जमा किए पैसे वो फिर भी नहीं निकाल पाएगा। ऐसा मैडम ने समझाया था। वर्ना बैंक में खाता खोलना और पैसे जमा करना मेरे जैसी गांव में पली-बढ़ी लड़की के बस की बात कहां।

विज्ञापन


आज भी जो करने जा रही थी उसके बारे में मैडम ने ही बताया था। पर दिल मुंह को आ रहा था। इस बार दांव पर मेरा शरीर था और सुना था कि इस ऑपरेशन में मौत भी हो सकती है पर अब तो ज़िंदगी भी मौत सी लगने लगी थी। मैं थी 22 साल की पर 40 की लगने लगी थी। बदन पतला ज़रूर था पर जवान नहीं। 
विज्ञापन


हड्डियों का ढांचा-सा रह गया था, आंखों के नीचे काले गड्ढे थे और चेहरे पर मासूमियत की जगह ऊबाई-सी थकान थी, चलूं तो लगता था कि कमर भी हल्की-सी झुक गई है और ये तो सिर्फ़ वो था जो सबको दिखाई देता था, जो कुछ अंदर बिखर गया था उसकी चीख तो सिर्फ़ मेरे कानों में ही गूंजती थी। शुरुआत में तो मुझे कुछ ग़लत भी नहीं लगता था। 15 साल की उम्र में शादी हुई और ब्याह कर शहर आ गए। पति काम कर के घर आते तो खाने के बाद बिस्तर में मेरी ज़रूरत होती, सिर्फ़ ज़रूरत, मैं बस एक शरीर थी जिसकी भावनाओं से उसका कोई सरोकार नहीं था।

विज्ञापन
विज्ञापन

पर इससे ज़्यादा की उम्मीद भी नहीं थी। मां ने बताया था ऐसा ही होता है। वहां तक भी ठीक था। फिर पहली बेटी हुई...फिर पहली मारपीट...फिर उसने पहली बार शराब पी...फिर बिस्तर में सारा गुस्सा निकला...फिर दूसरी बेटी हुई...फिर उसने काम छोड़ दिया....फिर मैंने काम करना शुरू किया....फिर तीसरी बेटी हुई।

मुझसे मारपीट, मेरे कमाए पैसों से शराब और बिस्तर में शैतान की तरह मेरे ही शरीर का इस्तेमाल, सब जारी रहा। पर मैं चुप रही। औरत के साथ ये सब होता है। मां ने बताया था। चौथी बार जब मैं पेट से थी तो 20 की हो गई थी। अधमरे से मेरे शरीर को जब मैडम (जिनके घर मैं काम करती थी) ने फिर फूलते देखा तो नाराज़ हो गईं। पूछा, पैदा कर पाओगी?

इतना ख़ून भी है शरीर में? मैंने कहा, हो जाएगा। सोचा बड़े घर की ये औरत क्या समझेगी मेरी ज़िंदगी को। बेटा पैदा होने तक मुझे ये सब झेलना ही था। बैंक में पैसे जमा करने की सलाह और मदद एक बात थी पर घर-परिवार की ये बारीक़ी नहीं समझा सकती थी उन्हें...मन करता था कि सब चुपचाप हो जाए. किसी को पता ना चले कि मैं पेट से हूं, मेरा शरीर ना बदले, मेरी ज़िंदगी की कहानी भरे चौराहे पर ना ला दे। मुझे यक़ीन था कि बेटा हो जाएगा तो सब ठीक हो जाएगा। मारपीट, शराब, बिस्तर का वो मनहूस सिलसिला टूट जाएगा और इस बार बेटा ही हुआ!

अस्पताल में जब नर्स ने आकर ये बताया तो मैं रोने लगी। बच्चा पैदा करने के लिए 10 घंटे से सहा दर्द और नौ महीने तक कमज़ोर शरीर में पालने की थकान मानो एक पल में ग़ायब हो गई। पर फिर... फिर कुछ नहीं बदला... वो मनहूस सिलसिला जारी रहा। अब मेरी क्या ग़लती थी? अब तो मैंने बेटा भी पैदा कर दिया था। पर मेरे पति को शायद शैतान बनने की आदत पड़ गई थी।

मेरा शरीर बहुत टूट गया था।फिर से पेट से ना हो जाऊं, ये ख़ौफ़ हर व़क्त सताता रहता था। एक दिन मेरी मैडम ने मेरा बेजान चेहरा देख मुझसे पूछा, एक चीज़ बदलनी हो तो क्या बदलोगी अपनी ज़िंदगी में... मैं हंस दी. अपनी चाहत के बारे में ना मैंने कभी सोचा था ना किसी ने कभी पूछा था। पर बात हंसी में टाली नहीं... ख़ूब सोचा.... एक हफ़्ते बाद मैडम से कहा कि मेरा जवाब तैयार है... वो तो तब तक भूल भी गई थीं शायद...मैंने कहा कि मैं फिर मां नहीं बनना चाहती, पर अपने पति को कैसे रोकूं ये नहीं जानती। मैंने समझाने की कोशिश की थी। 

चार बच्चों को खिलाने के लिए पैसे नहीं हैं, ये भी कहा था. पर बिस्तर उससे नहीं छूटता। मेरे कमज़ोर शरीर की परवाह नहीं और बच्चों की ज़िम्मेदारी जब कभी ली ही नहीं तो उससे क्या डर। तब मैडम ने कहा, नसबंदी का ऑपरेशन करवा लो. ये तुम्हारे हाथ में है. तुम उसे रात में चाहे ना रोक पाओ, कम से कम गर्भवती होने से तो खुद को बचा लोगी।

मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता था। कई दिन बीत गए... मेरे बहुत से सवाल थे। जब मैडम जवाब देते-देते थक गईं तो एक क्लीनिक का पता दिया। वहां मेरे जैसी और औरतें थीं। उन्हीं से पता चला कि नसबंदी का ऑपरेशन जल्दी से हो तो जाता है पर कुछ गड़बड़ हो जाए तो जान भी जा सकती है।

महीनों की उधेड़बुन के बाद जब पति और बच्चों से झूठ बोलकर अकेले क्लीनिक आई तो भी दिमाग़ में बस यही डर छाया हुआ था...पर मैं थक गई थी। डर भी था और हताशा भी। ये करना ख़तरनाक था पर उम्मीद थी कि कम से कम इसके बाद मेरी ज़िंदगी का एक सिरा तो मेरे क़ाबू में होनेवाला था।

फिर मेरा ऑपरेशन हुआ और मैं मरी नहीं। कुछ दिन लगे, कमज़ोरी रही, दर्द रहा पर अब सब ठीक है। 10 साल हो गए हैं। अब 32 की हो गई हूं। मैं फिर कभी मां नहीं बनी। मेरे पति को कुछ अजीब भी नहीं लगा। उसकी ज़िंदगी अब भी नशे, मारपीट और बिस्तर के बीच आराम से कट रही है। शायद उसे कोई फ़र्क ही नहीं पड़ता और मैं... मैं भी वही कर रही हूं जो मुझे करना है। 

मैडमों के घरों में सफ़ाई-बरतन, जिससे मिलनेवाले पैसों से बच्चे बड़े हो रहे हैं। पति को नहीं छोड़ सकती... मां ने कहा था... ना उसकी आदत बदल सकती हूं इसलिए उसकी आदत डाल ली है मैंने। बाक़ि सुकून है, कि उसने नहीं रखा तो क्या, अपना थोड़ा ख़्याल मैंने रख लिया। मेरा ऑपरेशन मेरा राज़ है. फख्र है। एक फैसला तो था जो मैंने सिर्फ़ अपने लिए किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed