{"_id":"8e21763e488b794877aa53da4d96d66f","slug":"tips-to-maintain-aquarium-at-home-hindi-news-pp","type":"story","status":"publish","title_hn":"घर में एक्वेरियम रखना चाहते हैं तो काम के हैं ये टिप्स","category":{"title":"Home Remedies","title_hn":"घरेलू नुस्खे","slug":"home-remedies"}}
घर में एक्वेरियम रखना चाहते हैं तो काम के हैं ये टिप्स
विपुल शर्मा/दुनिया 360, अमर उजाला
Updated Thu, 13 Nov 2014 12:57 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रंग-बिरंगी मछलियों का सुंदर सा एक्वेरियम ड्राइंग रूम में रखा हो, तो माहौल जीवंत हो उठता है। घर में एक्वेरियम रखना सिर्फ एक शौक नहीं, बल्कि अब यह एक आम बात हो गई है।
कई बार घर में एक्वेरियम रखने या मछलियां पालने को लेकर लोग आशंकित भी रहते हैं। उन्हें लगता है कि एक्वेरियम रखना वास्तु और घर की सुख एवं समृद्धि के लिहाज से ठीक नहीं है।
लेकिन मिथक पर भरोसा करने पर आप अपना शौक पूरा करने से वंचित रह जाएंगे। घर में एक्वेरियम रखने की चाहत रखते हैं, तो आशंकाओं से उबरना जरूरी है।
एक्वेरियम में रंग-बिरंगी मछलियों को देखना अच्छा लगता है। लेकिन कई तरह की आशंकाओं के कारण बहुत से लोग अपने घर में एक्वेरियम रखने से कतराते भी हैं।
खर्चीला शौक
एक आम धारणा है कि फिश टैंक का रखरखाव काफी खर्चीला है। यह बात सही नहीं है। वास्तव में एक्वेरियम जितना बड़ा होगा, उसका रखरखाव उतना ही आसान होता है। फ्रेश वाटर में रहने वाली मछलियों का रखरखाव बेहद आसान है और यह ज्यादा खर्चीला भी नहीं है।
विज्ञापन
फ्रेश वाटर में रहने वाली मछलियां नई परिस्थितियों में आसानी से ढल भी जाती हैं। फ्रेश वाटर टैंक के रखरखाव की बात करें, तो फिश फूड, पर्याप्त लाइटिंग और फिल्टरिंग का ध्यान रखना जरूरी है। और इन चीजों का खर्च बेहद कम होता है।
टैंक वाटर बदलने का झंझट
कई लोगों को लगता है कि हर रोज एक्वेरियम का पानी बदलना एक बड़ा झंझट है। जबकि ऐसा नहीं करना होता, क्योंकि हर रोज पानी बदलने से मछलियों की मौत हो सकती है।
पानी में मौजूद बैक्टीरिया मछलियों को जिंदा रखने में मददगार होते हैं। इसलिए टैंक का पानी पूरी तरह नहीं बदलना चाहिए। सप्ताह में एक बार सिर्फ 10-20 प्रतिशत पानी ही बदलें। अगर फिल्टरेशन सिस्टम है, तो एक महीने के अंतराल में 30-50 प्रतिशत तक पानी बदल सकते हैं।
शुरुआत में छोटे टैंक
अगर आप एक्वेरियम रखने जा रहे हैं, तो छोटे टैंक से शुरुआत करना गलत है। छोटे टैंक का रखरखाव मुश्किल होता है। वहीं, बडे़ टैंक का रखरखाव आसान होता है और इसमें मछलियों की मृत्यु दर भी कम होती है।
किसी बॉल में फिश (खासतौर पर गोल्ड फिश) रखना सबसे खराब आइडिया है। चहलकदमी करने का स्पेस बॉल में कम होता है। ऐसे में मछलियों की मौत हो सकती है।
नेचुरल एन्वायरमेंट नहीं
किसी पेट शॉप में मिलने वाली मछलियां प्राकृतिक आवास से नहीं लाई जातीं, बल्कि इन मछलियों की ब्रीडिंग नियंत्रित वातावरण में होती है। प्राकृतिक आवास में इन मछलियों के लिए जिंदा रहना आसान नहीं होगा।
अगर किसी तालाब या फिर नदी में इन मछलियों को डाल दिया जाए तो वो दूसरी मछलियों की आसान शिकार बन सकती हैं।
ज्यादा आबादी नहीं
यह समझना सही नहीं है कि टैंक में मछलियों की अधिक संख्या नुकसानदायक हो सकती है। इतना जरूर समझ लें कि मछलियों को अपने उत्सर्जित अपशिष्ट को मैनेज करना होता है।
ऐसा नहीं होगा, तो अपशिष्ट जहर बनकर मछलियों की जान ले सकता है। इसलिए निर्धारित मात्रा में पानी की उपलब्धता और तय समय पर पानी बदलना एक्वेरियम की मछलियों की सेहत के लिए फायदेमंद होता है।
विज्ञापन
कई बार घर में एक्वेरियम रखने या मछलियां पालने को लेकर लोग आशंकित भी रहते हैं। उन्हें लगता है कि एक्वेरियम रखना वास्तु और घर की सुख एवं समृद्धि के लिहाज से ठीक नहीं है।
विज्ञापन
लेकिन मिथक पर भरोसा करने पर आप अपना शौक पूरा करने से वंचित रह जाएंगे। घर में एक्वेरियम रखने की चाहत रखते हैं, तो आशंकाओं से उबरना जरूरी है।
एक्वेरियम में रंग-बिरंगी मछलियों को देखना अच्छा लगता है। लेकिन कई तरह की आशंकाओं के कारण बहुत से लोग अपने घर में एक्वेरियम रखने से कतराते भी हैं।
खर्चीला शौक
एक आम धारणा है कि फिश टैंक का रखरखाव काफी खर्चीला है। यह बात सही नहीं है। वास्तव में एक्वेरियम जितना बड़ा होगा, उसका रखरखाव उतना ही आसान होता है। फ्रेश वाटर में रहने वाली मछलियों का रखरखाव बेहद आसान है और यह ज्यादा खर्चीला भी नहीं है।
विज्ञापन
फ्रेश वाटर में रहने वाली मछलियां नई परिस्थितियों में आसानी से ढल भी जाती हैं। फ्रेश वाटर टैंक के रखरखाव की बात करें, तो फिश फूड, पर्याप्त लाइटिंग और फिल्टरिंग का ध्यान रखना जरूरी है। और इन चीजों का खर्च बेहद कम होता है।
टैंक वाटर बदलने का झंझट
कई लोगों को लगता है कि हर रोज एक्वेरियम का पानी बदलना एक बड़ा झंझट है। जबकि ऐसा नहीं करना होता, क्योंकि हर रोज पानी बदलने से मछलियों की मौत हो सकती है।
पानी में मौजूद बैक्टीरिया मछलियों को जिंदा रखने में मददगार होते हैं। इसलिए टैंक का पानी पूरी तरह नहीं बदलना चाहिए। सप्ताह में एक बार सिर्फ 10-20 प्रतिशत पानी ही बदलें। अगर फिल्टरेशन सिस्टम है, तो एक महीने के अंतराल में 30-50 प्रतिशत तक पानी बदल सकते हैं।
शुरुआत में छोटे टैंक
अगर आप एक्वेरियम रखने जा रहे हैं, तो छोटे टैंक से शुरुआत करना गलत है। छोटे टैंक का रखरखाव मुश्किल होता है। वहीं, बडे़ टैंक का रखरखाव आसान होता है और इसमें मछलियों की मृत्यु दर भी कम होती है।
किसी बॉल में फिश (खासतौर पर गोल्ड फिश) रखना सबसे खराब आइडिया है। चहलकदमी करने का स्पेस बॉल में कम होता है। ऐसे में मछलियों की मौत हो सकती है।
नेचुरल एन्वायरमेंट नहीं
किसी पेट शॉप में मिलने वाली मछलियां प्राकृतिक आवास से नहीं लाई जातीं, बल्कि इन मछलियों की ब्रीडिंग नियंत्रित वातावरण में होती है। प्राकृतिक आवास में इन मछलियों के लिए जिंदा रहना आसान नहीं होगा।
अगर किसी तालाब या फिर नदी में इन मछलियों को डाल दिया जाए तो वो दूसरी मछलियों की आसान शिकार बन सकती हैं।
ज्यादा आबादी नहीं
यह समझना सही नहीं है कि टैंक में मछलियों की अधिक संख्या नुकसानदायक हो सकती है। इतना जरूर समझ लें कि मछलियों को अपने उत्सर्जित अपशिष्ट को मैनेज करना होता है।
ऐसा नहीं होगा, तो अपशिष्ट जहर बनकर मछलियों की जान ले सकता है। इसलिए निर्धारित मात्रा में पानी की उपलब्धता और तय समय पर पानी बदलना एक्वेरियम की मछलियों की सेहत के लिए फायदेमंद होता है।