महिलाओं से तीन गुना पुरूषों को है यह खतरा
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नींद के दौरान बार-बार सांस लेने में दिक्कत, जिसे स्लीप ऐप्निया की समस्या कहते हैं, सुनने में जितनी आम लगती है इसका परिणाम उतना ही गंभीर हो सकता है।
आईआईएमएस के एक शोध की मानें तो भारतीय पुरुषों में नींद के दौरान सांस लेने में दिक्कत महिलाओं की अपेक्षा तीन गुना अधिक हैं।
नींद नहीं आती है तो आजमाएं ये आसान उपाय
इतना ही नहीं, शोध में यह भी माना गया है कि इस बीमारी में अधिकतर लोग डॉक्टर के पास जाने की सोचते ही नहीं हैं। यही वजह है कि हमारे देश में केवल चार प्रतिशत लोग ही अपनी समस्या को बीमारी मानकर इसका उपचार कराने के लिए डॉक्टरी परामर्श लेते हैं।
शोध में यह भी पाया गया कि दूसरे देशों की अपेक्षा हमारे देश में इस बीमारी के मामले कहीं अधिक हैं। इस बारे में ईएनटी विशेषज्ञ (शल्यचिकित्सा रोबोटिक तंत्र तथा एंडोस्कोपी) डॉ.विकास अग्रवाल ने बताया, ''भारतीय लोगों का चेहरा गोरे लोगों की तुलना में समतल होता है और जबड़े का हिस्सा भी बाहर उभरकर नहीं आता है। इसके परिणाम स्वरूप, हमारी जुबान से गले के पीछे की तरफ अधिक दबाव पड़ता है। कंटिन्युअस एअर प्रेशर थेरपी (सीपीएपी) यह उपचार पद्धति पश्चिमी देशों की तुलना में भारतीय रोगीयों में अधिक सफल ना होने की यह भी एक वजह है।''
गौरतलब है कि यह समस्या रात को नींद के दौरान पाई जाती है। इस समस्या की वजह से सोते समय व्यक्ति की सांस सेंकड़ों बार रुक जाती है। श्वसनक्रिया में आनेवाले इस अंतर को ऐप्निया कहा जाता है।
कार्डियाक केयर हॉस्पिटल 'एशियन हार्ट इंस्टिट्यूट' में ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप ऐप्निया के लिए हाल में लाइव रोबोटिक सर्जरी कोर्स का आयोजन किया गया था। दो रोगियों पर की गई इस शल्यचिकित्सा को दुनियाभर से 2000 से भी अधिक डॉक्टर्स ने वेबकास्ट की मदद से देखा।