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विश्व स्वास्थ्य दिवसः यही है अपनी सेहत पर ध्यान देने का सही वक्त

Sun, 07 Apr 2019 05:51 PM IST
मोना नारंग डॉ. बिनिता प्रियंबदा, सीनियर कंसल्टेंट, मेडिकल टीम, डॉकप्राइम.कॉम
डॉ. बिनिता प्रियंबदा, सीनियर कंसल्टेंट, मेडिकल टीम, डॉकप्राइम.कॉम Published by: मोना नारंग Updated Sun, 07 Apr 2019 05:51 PM IST
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World health day This is the perfect time to take care of your health
World Health Day

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया में मौतों के तीन सबसे घातक कारण हैं- 8.76 मिलियन मौतों के साथ इस्केमिक हृदय रोग या कोरोनरी धमनी की बीमारी; 6.24 मिलियन को स्ट्रोक दिमागी चोट या विकलांगता का कारण बन सकता है; 3.19 मिलियन को वायरस और बैक्टीरिया की वजह से निचले हिस्से में श्वसन संक्रमण। ये जीवन शैली से जुड़े संचारी रोग हैं और किसी भी व्यक्ति की लंबी आयु में अच्छे स्वास्थ्य के महत्व को उजागर करते हैं।

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सरल शब्दों में सिर्फ बीमारी से मुक्त होना अच्छे स्वास्थ्य का संकेत नहीं है, बल्कि सभी पहलुओं में फिट होना स्वस्थ होने का प्रतीक है। इस तथ्य को उजागर करने के लिए 1950 में 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस घोषित किया गया था। डब्लूएचओ के नेतृत्व में इस दिन कोशिश की जाती है कि किसी एक विशेष बीमारी पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय समग्र स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिए सभी बीमारियों के बारे में बात की जाए। वर्षों से संगठन ने इसके लिए अथक प्रयास किए हैं और दुनिया से चेचक और पोलियो जैसी बीमारियों को मिटाया है। रूबेला, मम्स, खसरा (एमएमआर), अत्यधिक संक्रामक श्वसन रोग जो गंभीर, स्थायी और मृत्यु के कारण भी बन सकते हैं, भी हटने के कगार पर है। 
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2019 की थीम और इसका लक्ष्य- 
इस वर्ष का नामांकित विषय है- यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (यूएचसी): हर एक को, हर जगह। दो मजबूत फ़ोकस है- आर्थिक तंगी के बावजूद अच्छी चिकित्सा सुविधा प्रदान करना, और जब भी और जहाँ भी जरूरत पड़े, इसकी पहुंच सुनिश्चित हो। इस कवरेज का आवश्यक फीचर है सभी समुदायों और लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना। 
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इसके अलावा, यह लोगों को एक मजबूत प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने की मंशा रखता है जो रोकथाम, उपचार, पुनर्वास और दोष हटाने वाली देखभाल पर केंद्रित है।

भारत में इस विषय का महत्व-  

द लांसेट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल लगभग 2.4 मिलियन लोग उपचार-योग्य परिस्थितियों में मौत का शिकार हो जाते हैं। देखभाल और अच्छी स्वास्थ्य सेवा की कमी इस संख्या का एक प्रमुख कारण रही है।

इस समस्या को दूर करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने इस क्षेत्र में कई परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया है। 2018 में शुरू किया गया आयुष्मान भारत दुनिया का केंद्र और राज्य सरकार द्वारा सह-वित्त पोषित सबसे बड़ा कार्यक्रम है। यह कार्यक्रम डब्ल्यूएचओ के यूएचसी के अनुरूप है। इसके तहत ग्रामीणों और वंचित तबकों को एक साल में प्रति परिवार 5 लाख रुपये का बीमा कवर देकर बेहतर स्वास्थ्य सेवा, स्वास्थ्य सुविधाएं और बीमा उपलब्ध कराया गया है। 2019-2020 के लिए इस योजना के लिए धन का आवंटन बढ़ाकर 6,400 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

एक अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रम है मिशन इन्द्रधनुष। इसका उद्देश्य टीकाकरण कवरेज को शहरी व ग्रामीण दोनों इलाकों में 90 प्रतिशत तक बढ़ाना है। साथ ही इसमें ऐसे बच्चों को लक्ष्य करना है जिन्हें बिल्कुल भी टीके नहीं लगाए गए या आंशिक रूप से टीकाकरण पूरा किया गया है। 2014 से रोटावायरस वैक्सीन, न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (पीसीवी), मीजल्स-रूबेला (एमआर) वैक्सीन और वयस्कों के लिए जेई वैक्सीन को इस वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल के तहत लॉन्च किया गया है।
 
 भारत सरकार इस दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इस वर्ष के अंतरिम बजट में सरकार ने 2018 के स्वास्थ्य सेवा खर्च को US $ 7.45b से बढ़ाकर 2019 में $ 7.45b कर दिया, जिससे इसमें 13.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 

चुनौतियां- 
भले ही अब तक सत्ता में रही विभिन्न सरकारों ने कई स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं को लागू किया है और गरीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों को चिकित्सा बीमा भी प्रदान किया है, लेकिन इसने गरीब लोगों के स्वास्थ्य पर खर्च को कम नहीं किया है। 
 
इसके अलावा, एक रिपोर्ट के अनुसार भारत सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्चों में सबसे नीचे है। यहां तक कि श्रीलंका, नेपाल, और भूटान जैसे देश, जिनकी राष्ट्रीय आय भारत की तुलना में कम आय है, इस पर अधिक खर्च करते हैं। बजट आवंटन के अनुसार 2016-17 में सार्वजनिक स्वास्थ्य पर देश का खर्च मामूली रूप से बढ़कर 1.4% हो गया, लेकिन यह अभी भी दुनिया के औसत के 6% से कम था।
 
भारत में एक अन्य महत्वपूर्ण चुनौती डॉक्टर-रोगी अनुपात है। 2017 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रत्येक 921 रोगियों के लिए भारत में एक डॉक्टर है। इससे परिदृश्य चिंता बढ़ाने वाला बनता है। हालांकि, वास्तविक समय में ऑनलाइन परामर्श के लिए टेली-मेडिसिन जैसे समाधानों का उद्देश्य इस अंतर को दूर करना है। लेकिन चुनौती अभी भी कायम है। इन लोगों को आवश्यक दवाएं और उच्च तकनीकी चिकित्सा उपकरणों को किफायती मूल्य पर उपलब्ध कराने की चुनौती बनी हुई है।
 
देश दूषित पेयजल और स्वच्छ शौचालय सुविधाओं से संबंधित गंभीर मुद्दों का सामना कर रहा है, जिसने लोगों के जीवन को खतरे में डाला है। ये कारक कई बीमारियों की आशंका बढ़ाते हैं। स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों तक पहुंच न होने से सिर्फ समस्या बढ़ती ही है। 
  
इस वजह से भारत जैसे देश के लिए जहां स्वास्थ्य सुविधाओं के वितरण में भारी असमानता और दुर्गमता है, यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज बहुत जरूरी है।
 
विश्व स्वास्थ्य दिवस भले ही वर्ष में एक बार मनाया जाता है, लेकिन भारत जैसे देश के लिए और इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में प्रगति की आवश्यकता को देखते हुए बस एक दिन पर्याप्त नहीं है। सभी को यूएचसी प्रदान करने के लिए कठोर और निरंतर कार्य किए जाने की आवश्यकता है। वर्तमान में लागू विभिन्न सरकारी कार्यक्रम सही दिशा में उठाए गए कदम हैं। ये प्रक्रिया को गति देने में मदद कर सकते हैं। 

इसलिए विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर, आइये हम एक नागरिक के रूप में, पर्यावरण को संरक्षित रखने, परिवेश को सुव्यवस्थित रखने, और जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं या डॉक्टरों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए छोटे-छोटे कदम उठाने, हिस्सेदारी लेने और पालन करने का संकल्प लें। 

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