Alert: रोज इस्तेमाल होने वाला शैंपू-लोशन भी बन सकता है कैंसर का कारण, अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा
- अध्ययन की रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने सावधान किया है कि रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले शैंपू, लोशन, आईलैश ग्लू जैसे उत्पादों में कैंसर फैलाने वाला रसायन फॉर्मल्डिहाइड और कई अन्य हानिकारक तत्व हो सकते हैं।
विस्तार
सुबह उठते ही आप सबसे पहले क्या करते हैं? कोई शैंपू से बाल धोता है, कोई चेहरे पर क्रीम लगाता है तो कोई बॉडी लोशन से त्वचा को मॉइस्चराइज करता है। ये उत्पाद हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन खूबसूरत पैकेजिंग वाले शैंपू, क्रीम, लोशन की बोतल में छिपे हानिकारक रसायन आपकी सेहत के लिए कितने हानिकारक हो सकते हैं? कई शोध इस बात की ओर इशारा कर चुके हैं कि इन प्रोडक्ट्स में मौजूद कुछ तत्व शरीर पर लंबे समय तक असर डालकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं।
इसी से संबंधित एक हालिया अध्ययन की रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने सावधान किया है कि रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले शैंपू, लोशन, आईलैश ग्लू जैसे उत्पादों में कैंसर फैलाने वाला रसायन फॉर्मल्डिहाइड और कई अन्य हानिकारक तत्व हो सकते हैं। आमतौर पर इन रसायनों का इस्तेमाल उत्पादों की शेल्फ लाइफ (लंबे समय तक इस्तेमाल के योग्य रखने) बढ़ाने के लिए किया जाता रहा है, पर इंसानी सेहत के लिए ये कई प्रकार से हानिकारक हो सकते हैं।
इसी तरह जुलाई में अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने आपको बताया था कि किस तरह से लिपस्टिक-ब्लश जैसे उत्पादों में प्रयोग में लाई जानी वाली चीजें अस्थमा के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
दैनिक इस्तेमाल के उत्पादों में पाए गए कैंसर बढ़ाने वाले तत्व
बोस्टन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में पाया कि हेयर रिलैक्सर का ज्यादा इस्तेमाल करने वाली पोस्टमेनोपॉजल अश्वेत महिलाओं में गर्भाशय कैंसर का खतरा 50% से ज्यादा बढ़ जाता है। अमेरिका स्थित साइलेंट स्प्रिंग इंस्टीट्यूट की डॉ. रॉबिन डॉडसन ने कहा कि यह सिर्फ हेयर स्ट्रेटनर की बात नहीं है, बल्कि ये रसायन हमारे रोजमर्रा के कई उत्पादों में मौजूद हैं, जिनपर अक्सर हमारा ध्यान नहीं जाता है और ये शरीर को भीतर ही भीतर गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाती जाती हैं।
एनवायर्नमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी लेटर्स में प्रकाशित इस शोध से पता चलता है कि शैम्पू, बॉडी सोप, लोशन और आईलैश ग्लू में भी कई हानिकारक तत्व हो सकते हैं जिनसे इंसानी सेहत को गंभीर खतरा रहता है।
फॉर्मेल्डिहाइड यौगिक और इसका बढ़ता उपयोग खतरनाक
शोधकर्ताओं ने बताया कि कंपनियां पर्सनल केयर उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए उनमें फॉर्मेल्डिहाइड मिलाती हैं। कई अध्ययनों से पता चला है कि फॉर्मेल्डिहाइड कंपाउंड के लंबे समय तक संपर्क के कारण कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
उत्पादों में इन रसायनों के इस्तेमाल और इससे होने वाले नुकसान को समझने के लिए, शोधकर्ताओं ने लॉस एंजिल्स क्षेत्र में रहने वाली 70 महिलाओं को चुना और उनसे पांच से सात दिनों की अवधि में पर्सनल केयर उत्पादों के अपने इस्तेमाल पर नजर रखने को कहा।
अध्ययन में क्या पता चला?
हर बार जब प्रतिभागियों ने किसी उत्पाद का इस्तेमाल किया, तो उन्होंने एक स्मार्टफोन ऐप का इस्तेमाल करके उस उत्पाद की जानकारी दर्ज की। ऐप में प्रतिभागियों को प्रत्येक उत्पाद के सामग्री के लेबल की एक तस्वीर डालने को कहा गया। इस तरह से टीम ने 1,100 से ज्यादा उत्पादों का विश्लेषण किया और उत्पादों की सामग्री सूची में फॉर्मल्डिहाइड और अन्य हानिकारक तत्वों की जानकारी प्राप्त की।
53 प्रतिशत प्रतिभागियों ने बताया कि उन्होंने कम से कम एक पर्सनल केयर उत्पाद का उपयोग किया है जिसके लेबल पर फॉर्मल्डिहाइड कंपाउंड रिलीज करने वाले तत्व सूचीबद्ध थे। लगभग 47% स्किन केयर और 58% बालों से संबंधित उत्पादों में ये हानिकारक तत्व पाए गए। मसलन इस तरह के उत्पादों में 50% तक कैंसर बढ़ाने वाले तत्व मिले।
विशेषज्ञों की इस सलाह पर दें ध्यान
मेडिकल एक्सपर्ट्स कहते हैं, दरअसल, कॉस्मेटिक और पर्सनल केयर उत्पादों को बनाने वाली कंपनियां प्रोडक्ट्स को चमकदार बनाने, उन्हें लंबे समय तक टिकाऊ रखने और खुशबूदार बनाने के लिए तरह-तरह के केमिकल का इस्तेमाल करती हैं। इनमें से कुछ तत्व जैसे पैराबेन, फॉर्मल्डिहाइड, ट्राइक्लोसन, फथैलेट्स और बेंजीन संभावित रूप से कैंसर पैदा करने वाले पाए गए हैं।
इससे पहले जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंड एक्सपेरिमेंटल डर्मेटोलॉजी रिसर्च में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चला था कि शेंपू और क्रीम में मौजूद कुछ रसायन त्वचा से अवशोषित होकर खून तक पहुंच सकते हैं। लंबे समय में यह डीएनए को नुकसान पहुंचाकर कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं।
विशेषज्ञों ने कहा कि सिर्फ ब्रांड या विज्ञापन देखकर आंख मूंदकर किसी उत्पाद पर भरोसा न करें, बल्कि लेबल पर लिखे इंग्रेडिएंट्स को समझें।
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स्रोत
Formaldehyde and Formaldehyde Releasing Preservatives in Personal Care Products Used by Black Women and Latinas
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