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इन चार कसरतों में लापरवाही पड़ सकती है भारी
तोयज कुमार सिंह
Updated Fri, 29 Mar 2013 05:13 PM IST
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जिम में लगने वाली चोट आपको कुछ दिनों से लेकर हमेशा के लिए बैठा सकती है। मैं तो एक ऐसी घटना भी जानता हूं, जिसमें जिम में लगी चोट की वजह से एक शख्स की हाइट लगभग दो इंच छोटी हो गई और आज वो थोड़ी देर भी एक जगह पर खड़ा नहीं हो पाता। चलने-फिरने में उसे कोई दिक्कत नहीं मगर एक जगह सीधा खड़ा होना उसके बस की नहीं।
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हम आपको आज कुछ ऐसी कसरतों के बारे में बता रहे हैं, जिनसे चोट लगने के चांस ज्यादा होते हैं। हालांकि एक बात ये भी याद रखें कि खतरा तो पूड़ियां तलने में भी है, पर रसोई घर में आजतक पूड़ियां बननी बंद नहीं हुई। कहने का मतलब ये है कि जिम की चोट को काफी हद तक टाला जा सकता है। तो ये रहीं वो कसरतें।
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1. इंक्लाइन बेंच प्रेस
कुछ बेंच ऐसी होती हैं, जिनमें हाइट के हिसाब से सीट ऊंची-नीची करने का इंतजाम होता है। दुर्घटना तक होती है जब, जिस पर आप टिकते हैं वो सीट ही नीचे भाग जाती है। ऐसा सिर्फ एक वजह से होता है नट का कसा न होना।
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दूसरी बात, यहां अगर आप वेट लेकर डगमगाए और उसे आपने वापस रखने की कोशिश की तो आपकी कमर पर चोट लगना तय है। क्योंकि इस मशीन पर हम आधे लेटे हुए होते हैं और बॉडी पीछे की ओर झुकी होती है।
जब वेट डिसबैलेंस होता है तो पैर जमीन से ताकत ले लेते हैं, अपर बॉडी वेट थामे होती है इसलिए उसमें ताकत होती है तो सारा नुकसान कमर पर जाता है। मैंने जिस शख्स का जिक्र किया था उसे इसी मशीन पर चोट लगी थी। उसकी सीट नीचे भाग गई और रीढ़ की हड्डी धंस गई। डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने की बजाय उन्हें ऐसे ही जीवन बिताने की सलाह दी।
कहां लगती है चोट : कमर और कंधों पर।
बचाव : अगर आपने सीट को ऊंचा किया है तो बैठने से पहले वजन डालकर या ताकत लगाकर देख लें कि सीट नीचे तो नहीं भाग रही। हैवी वेट लगाते वक्त किसी को साथ रखें वो भी पीछे की ओर आगे नहीं।
2 पुलओवर
डंबल की रॉड में वेट कसने के बाद पुलोवर लगा रहे हैं तो जरा ध्यान रखें। सबसे बड़ा खतर होता है वेट खुलने से। बेशक आपने नट टाइट किया है लेकिन अगर पीछे जाने के बाद वेट जमीन से टच हो रहा है तो नट धीरे-धीरे अपने आप खुलने लगता है।
अगर वेट आपके बाजुओं से टच हो रहा है और ढीला है तो भी नट अपने आप खुलने लगता है। इस कसरत में मैं खुद भी चोट लगवा चुका हूं। दस-दस किलो की दो प्लेटें सीधे मुंह पर गिरी थीं।
बचाव : वेट को कभी नीचे टच न होने दें। हो सके तो दो नट लगाएं। अगर प्लेटें आपके बाजुओं से टच होकर घूम रही हैं तो हाथ खोल लें या छोटे साइज की प्लेट लगाएं।
3. 45 डिग्री लेग प्रेस
दो खतरे- एक घुटना और दूसरा कमर। जब वेट नीचे आता है तो घुटनों पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है और ज्यादातर लोग वेट को अपने पेट के इतना करीब ले आते हैं कि पीछे से कमर गोल हो जाती है।
क्या करें : पहला जवाब- ना करें। इसकी बजाए स्क्वेट लगाएं। अगर इसे ही करना है तो घुटनों पर नी बैंड पहनें और कमर गोल न होने दें।
4. डिप बार
यह बेहतरीन एक्सरसाइज कंधों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है। हालांकि यह उतनी खतरनाक नहीं है। ऐसे लोग जिनका वेट ज्यादा है या जो लोग एक्स्ट्रा वेट लेकर इसे करते हैं वो सिर्फ इस बात का ध्यान रखें कि आपके कंधे कुहनियों से नीचे न आएं। इस स्टेज से ऊपर-ऊपर कसरत करें।