कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने के क्रम में सोमवार को दुनिया का सबसे बड़ा ट्रायल शुरू हुआ। इस ट्रायल में 30 हजार लोगों ने हिस्सा लिया है। दुनिया भर में कोरोना वैक्सीन की खोज के लिए जो कोशिश हो रही है, उनमें जो वैक्सीन आखिरी फेज में हैं, उसमें अमेरिका भी शामिल है। हालांकि अभी तक इसकी कोई गारंटी नहीं है कि नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मॉडर्ना इंक के जरिए बनाई गई ये वैक्सीन सचमुच में कोरोना से बचा लेगी। वॉलंटियरों को ये भी नहीं बताया जाएगा कि उनको वास्तविक वैक्सीन दी गई है या फिर नकली वैक्सीन से टेस्ट किया गया है।
2 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Social Media
दो खुराक दिए जाने के बाद वैज्ञानिक इस बात का बहुत नजदीक से अध्ययन करेंगे कि अपने रोजमर्रा के काम करने के दौरान कौन सा ग्रुप ज्यादा संक्रमित होता है, खासकर उन इलाकों में जहां अभी इस वायरस पर काबू नहीं पाया जा सका है और वो तेजी से फैल रहा है।
3 of 6
Moderna Vaccine
- फोटो : Instagram
अमेरिका में कोरोना विशेषज्ञ डॉक्टर एंथनी फाउची ने हाल ही में कहा था, 'दुर्भाग्यवश अमेरिका में अभी बहुत सारे संक्रमित लोग हैं, इसका जवाब जानने के लिए।' मॉडर्ना का कहना है कि वैक्सीन का टेस्ट जॉर्जिया के सवाना में किया गया था जो कि अमेरिका भर में फैले सात दर्जन से ज्यादा ट्रायल केंद्रों में से एक है।
4 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
न्यूयॉर्क के बिंगैंमटन में कार्यरत एक नर्स मेलिसा हार्टिंग भी 30 हजार वॉलंटियर्स में से एक हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस काम में मदद करने के लिए इसे अपनी ड्यूटी समझकर किया। हार्टिंग ने कहा, 'मैं बहुत उत्सुक हूं। कोरोना की लड़ाई में सबसे आगे रहने वाले लोग, जिन्हें वायरस संक्रमण का खतरा है, उनके साथ मिलकर इस वायरस को खत्म करना मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।'
5 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Amar Ujala
चीन और ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के जरिए बनाई गई वैक्सीन का इस महीने के शुरू में अंतिम-स्टेज टेस्ट ब्राजील और दूसरे ज्यादा प्रभावित देशों में शुरू हुआ, लेकिन अमेरिका में किसी भी वैक्सीन को इस्तेमाल करने के लिए जरूरी है कि खुद अमेरिका में उसका ट्रायल हुआ हो और अमेरिका में ट्रायल का पैमाना भी ऊंचा है।