भारत में अब तक कोरोना संक्रमण के 27 लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं जबकि 51 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि यह आंकड़ा अमेरिका और ब्राजील जैसे देशों से बेहद कम है। अमेरिका में सबसे ज्यादा संक्रमण के मामले हैं। वहां अब तक 54 लाख 78 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि एक लाख 71 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, ब्राजील में भी संक्रमण का मामला 33 लाख के पार हो गया है जबकि अब तक एक लाख आठ हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर कब कोरोना वायरस कमजोर पड़ेगा? रिपोर्ट बताती है कि भारत उस स्थिति के करीब पहुंच रहा है, लेकिन अभी थोड़ा वक्त और लगेगा। कुछ समय पहले एक रिपोर्ट में कहा गया था कि अगर लोगों में हर्ड इम्यूनिटी विकसित हो जाती है तो कोरोना वायरस को खत्म करना आसान हो सकता है। आइए जानते हैं भारत इसके कितना करीब पहुंचा है, लेकिन उससे पहले ये जानते हैं कि हर्ड इम्यूनिटी आखिर है क्या?
Coronavirus: कब कमजोर पड़ जाएगा कोरोना वायरस? भारत पहुंच रहा उस स्थिति के करीब
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हर्ड इम्यूनिटी क्या है?
अगर कोई बीमारी किसी देश या दुनिया की आबादी के बड़े हिस्से में फैल जाती है और इंसान की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी उस बीमारी के संक्रमण को बढ़ने से रोकने में मदद करती है तो जो लोग बीमारी से लड़कर पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, उनमें प्रतिरक्षात्मक गुण विकसित हो जाते हैं। इसका मतलब ये है कि वैसे लोगों के शरीर में वायरस से लड़ने में सक्षम एंटीबॉडीज तैयार हो जाता है। इसी को हर्ड इम्यूनिटी कहते हैं।
हर्ड इम्यूनिटी से क्या लाभ?
दरअसल, जैसे-जैसे लोग बीमारी से लड़कर ठीक होते जाते हैं यानी उनमें प्रतिरक्षात्मक गुण विकसित होते जाते हैं, वैसे-वैसे वैसे-वैसे संक्रमण फैलने का खतरा कम होता जाता है। इससे उन लोगों को भी सुरक्षा मिल जाती है, जो संक्रमित नहीं हुए हैं। अमेरिकी हार्ट एसोसिएशन के चीफ मेडिकल अफसर डॉक्टर एडुआर्डो सांचेज के मुताबिक, इस प्रक्रिया में समय लगता है।
भारत हर्ड इम्यूनिटी के कितना करीब?
वैज्ञानिकों के मुताबिक, हर्ड इम्यूनिटी के लिए 60 से 70 फीसदी आबादी में एंटीबॉडीज होनी चाहिए। भारत में हर्ड इम्यूनिटी पता करने के लिए सीरो सर्वे कराया जा रहा है। थायरोकेयर लैबोरेटरी के मैनेजिंग डायरेक्टर अरोकियास्वामी वेलुमणि के मुताबिक, फिलहाल देश की करीब 24 फीसदी आबादी में कोरोना वायरस के प्रति एंटीबॉडीज मिली हैं। वैसे तो भारत इस स्थिति से अभी दूर है, लेकिन रिपोर्ट कहती है कि 45 फीसदी सीरो-पॉजिटिविटी पर संक्रमण फैलने का खतरा नीचे जाने लगता है।
सबसे पहले भारत के किन शहरों में आ सकती है हर्ड इम्यूनिटी?
चूंकि दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में बहुत अधिक संख्या में लोग संक्रमित हुए हैं और ठीक भी हो चुके हैं, ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे पहले हर्ड इम्यूनिटी इन्हीं शहरों में आ सकती है। दिल्ली के पहले सीरो सर्वे के मुताबिक, टेस्ट हुए लोगों में से 23 फीसदी सीरो पॉजिटिव थे। दूसरे सीरो सर्वे के नतीजे इसी हफ्ते आ सकते हैं। मुंबई में कई इलाकों में 50 फीसदी के करीब सीरो पॉजिटिविटी देखने को मिली है।