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कोरोना वायरस: खुल गए हैं स्कूल, इन सावधानियों से करें बच्चे को लैस, लापरवाही पड़ सकती है भारी

Thu, 02 Sep 2021 08:44 AM IST
Dr. Nameet Jerath डॉ. नमित जेरथ
Updated Thu, 02 Sep 2021 08:44 AM IST
सार

बच्चे के स्कूल जाने से भी उसकी इम्यूनिटी और सेहत जुड़ी हुई है। सामान्य तौर पर जब एक बच्चा स्कूल जाता है तो वहां उसे बहुत अलग अलग परिवेश से आने वाले अलग-अलग तरह के बच्चे और बड़े मिलते हैं, वह धूप, खुली हवा और धूल में खेलता है, क्लासेस में एक्टिविटीज और पढ़ाई में दिमाग लगाता है। इससे उसका शरीर और दिमाग दोनों ही अच्छी तरह विकसित होते हैं। 

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Coronavirus in India school reopen covid 19 precaution and prevention tips for children
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

Medically Reviewed by Dr. Nameet Jerath

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डॉ. नमित जेरथ
सीनियर कंसल्टेंट पीडियाट्रिक्स, पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर एंड पलमोनोलॉजी
इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल
नई दिल्ली


आखिरकार तमाम चर्चाओं के बीच स्कूलों फिर से खुल गए। कोरोना महामारी के आने के बाद से देशभर में स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए थे। बीच में कुछ समय बड़ी क्लासेस के लिए स्कूल ओपन किए गए थे, लेकिन संक्रमण के बढ़ते मामलों के कारण फिर बंद कर दिए गए। अब एक सितंबर से फिर देश के कई राज्यों में स्कूल खुल गए हैं। शासकीय स्तर पर यह निर्णय बहुत सोच विचार के साथ लिया गया है। इस बीच कई राज्यों में कोरोना फिर से सिर उठाने लगा है। महामारी की तीसरी लहर को लेकर भी आशंका जताई जा रही है। वयस्कों का टीकाकरण अब भी जारी है, लेकिन सभी बच्चों के लिए वैक्सीन अभी उपलब्ध नहीं हैं। स्कूल खोलना भी जरूरी है, क्योंकि बच्चों का नुकसान तो हो ही रहा है। तो जानिए क्या सुझाव देते हैं एक्सपर्ट, किन बातों का रखना है आपको ख्याल। 

पूरी सेहत का मामला 

इसके पहले कि हम सावधानियों के बारे में जानें, यह समझना जरूरी है कि बच्चे के स्कूल जाने से भी उसकी इम्यूनिटी और सेहत जुड़ी हुई है। सामान्य तौर पर जब एक बच्चा स्कूल जाता है तो वहां उसे बहुत अलग अलग परिवेश से आने वाले अलग-अलग तरह के बच्चे और बड़े मिलते हैं, वह धूप, खुली हवा और धूल में खेलता है, क्लासेस में एक्टिविटीज और पढ़ाई में दिमाग लगाता है। इससे उसका शरीर और दिमाग दोनों ही अच्छी तरह विकसित होते हैं। 
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पढ़ाई के अलावा खेलों के द्वारा व दोस्त बनाकर वह सामाजिक स्थिति को भी जीना सीखता है। जीवन के शुरुआती दौर की यह स्थिति आगे उसके पूरे स्वास्थ्य पर असर डालती है। अलग-अलग तरह के बच्चों के साथ ही वह अलग-अलग तरह के संक्रमणों और कीटाणुओं के संपर्क में भी आता है। इससे उसकी इम्यूनिटी और बढ़ती है। इसलिए स्कूल जाना बच्चे के सम्पूर्ण विकास के लिहाज से सही है। यही कारण है कि कई विशेषज्ञ कोरोना काल मे ज्यादा दिन तक स्कूल बंद करने के पक्ष में नहीं थे। 
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इन बातों का रखें ध्यान 

अब जब कई बातों को ध्यान में रखते हुए पूरी गाइडलाइंस का पालन करते हुए स्कूल खोले जा रहे हैं, तब पैरेंट्स की भी जिम्मेदारी बन जाती है कि वे बच्चों को इस स्थिति से लड़ना और जीतना सिखाएं। कुछ इस तरह-

  • चूंकि अभी सभी कक्षाओं के लिए स्कूल नहीं खुल रहे हैं, इसलिए छोटे बच्चों को लेकर यह टेंशन नहीं करना होगा कि वे हाथ धोने और मास्क पहनने जैसी चीजों का ध्यान कैसे रखेंगे। यही समय है जब आप छोटे बच्चों को घर में ही आने वाले दिनों के लिए तैयार कर सकते हैं। 
  • बच्चों से बात करें, उन्हें बिना डराए आज की स्थिति के बारे में बताएं और यह भी बताएं कि हाइजीन का ध्यान सामान्य दिनों में भी रखना क्यों जरूरी है। इससे उनके दिमाग में हाइजीन को लेकर डर नहीं होगा और वे इसे रूटीन की चीज समझकर हमेशा ध्यान रखेंगे। 
  • बच्चों के साथ एक एक्स्ट्रा मास्क, सेनेटाइजर आदि जरूर रखें। 
  • बच्चों का टिफिन और पानी घर से ही साथ रखें। उन्हें बाहर का कुछ भी खाने- पीने को मना करें। 
  • अगर आपके बच्चे पहले दिन की क्लास अटैंड करके घर आए हैं तो उन्हें तुरंत अपना सामान एक तरफ रखकर, कपड़े तुरंत धुलने में डालने और हाथ पैर अच्छी तरह धोने या नहाने के लिए कहें। 
  • बच्चों का स्कूल शुरू होते ही उनकी व्यस्तता बढ़ जाएगी। ऐसे में उनके लिए एक तय रूटीन होना जरूरी है। उनकी पर्याप्त नींद, डाइट और फिजिकल फिटनेस का भी ध्यान रखें। 
  • बच्चों को पूरी सावधानी के साथ साइकिलिंग करने, प्रणायाम, योगासन करने, रस्सी कूदने, जैसी गतिविधियों से जोड़ें। अगर आपके घर के पास कोई गार्डन हो तो वहां कोरोना गाइडलाइंस का ध्यान रखते हुए बच्चे को खेलने के लिए ले जाएं।
  • यदि नहीं है तो घर की छत, बरामदे या किसी हवादार कमरे में  बच्चे को एक्सरसाइज करवाएं। 
  • जंक फूड, बहुत ज्यादा मीठा, आर्टिफिशियल कलर वाले खाद्य पदार्थ खाने से बच्चे को रोकें। 
  • ऐसे बच्चे जिन्हें पहले से कोई स्वास्थ्यगत समस्या है, जैसे कि डायबिटीज, अधिक मोटापा, इम्यूनिटी संबंधी कोई डिसऑर्डर, अस्थमा, एलर्जी या कोई गंभीर समस्या जैसे कैंसर आदि है उन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के स्कूल न भेजें। 
  • सबसे बड़ी बात यह ध्यान में रखें कि बच्चों पर कोरोना के घातक असर का अब तक कोई प्रमाण नहीं है। इसलिए ये सोचना कि आने वाले समय मे केवल बच्चों को ही समस्या होगी, गलत है। इसके उलट सामान्यतौर पर बच्चों को समस्या कम से कम होगी। इसका उदाहरण हम पहले भी देख चुके हैं। हां वे बच्चे जो पहले से किसी समस्या से गुजर रहे हैं उन्हें तकलीफ ज्यादा हो सकती है। 
  • इसलिए बिना डरे और बिना डराए, पूरी सावधानी का पालन करते हुए अपने बच्चे को स्कूल भेजें। इससे उसके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर अच्छा असर होगा। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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