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जिम की इन आदतों को बदल डालें
तोयज कुमार सिंह
Updated Sat, 23 Mar 2013 05:52 PM IST
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मसल्स का विज्ञान बहुत तरक्की कर चुका है। हर रोज नए तथ्यों का खुलासा हो रहा है। ऐसे में खुद आंखें मूदना और जो बात दस साल पहले किसी ने कही थी उसी पर चलते रहना कहीं की समझदारी नहीं है।
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थोड़ा टटोल कर देखें, कहां बदलाव हो रहे हैं। आज हम आपको मसल्स से जुड़े चंद मिथकों के बारे में बताएंगे।
1. बाबा जी ने कहा था : लंबे अर्से से यह बात कही जा रही है कि बड़े मसल्स बनाने के लिए रैप रेंज (रैप का मतलब किसी एक एक्शन को दोहराना) को आठ से 10 के बीच में रखना चाहिए। यह बात कुछ हद तक ठीक भी है।
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दुबले लोगों में मसल्स के विकास के लिए यही रैप रेेंज सबसे मुफीद होती है। लेकिन आप इससे बाहर ही न निकलें तो गलत बात है।
विज्ञान कहता है : मसल्स को टेंशन में डालने के दो तरीके हैं। एक थोड़ी सी देर के लिए जबरदस्त टेंशन, हैवी वेट से और दूसरा लंबी टेंशन ज्यादा रैप से। कभी पांच रैप से शुरुआत करें और 20 तक पहुंच जाएं।
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इसे यूं समझिए पहला सेट 5 रैप का, दूसरा 10, तीसरा 15 और चौथा 20 का। कभी 20 से शुरू करें और 5 तक आएं।
2. हर बार हइशा : ताकत बढ़ाने और मसल्स का साइज बढ़ाने के लिए हैवी वेट लगाना होता है, यह बात सही है। लेकिन हर बार अपनी हद तक हैवी वेट लगाने से नुकसान होने लगता है।
इससे मसल्स की फंक्शनल फिटनेस खत्म हो जाती है। आप थोड़ी देर के लिए एक बैग पकड़ लेंगे तो कंधा और हाथ दुखने लगेगा। छोटे-छोटे कामों में भी मसल पेन होगा।
विज्ञान की सुनें : शरीर को तगड़ा और काम का बनाए रखने के लिए हल्की कसरतें भी करें। कभी बिना वेट लगाए ही एक्सरसाइज करें। इससे आपकी फॉर्म भी सुधरेगी और मसल्स में नई जान आएगी।
3. चार सेट से ऊपर नहीं जाऊंगा : सब कहते हैं तीन सेट से चार सेट लगाओ। बॉडी बिल्डिंग में जो भी शेड्यूल बनाया जाता है उसमें आमतौर पर सेट की संख्या तीन से चार और एक्सरसाइज की गिनती चार से पांच रखी जाती है और ये शेड्यूल दशकों से चला आ रहा है।
विज्ञान ने कहा : सेट की गिनती रैप की गिनती के हिसाब से घटती-बढ़ती है। अगर आप एक सेट में महज तीन से चार रैप निकाल रहे हैं तो सेट की गिनती पांच या छह तक जा सकती है। अगर आप दस के आसपास रैप निकाल रहे हैं तो तीन से चार सेट ठीक हैं।
4 स्क्वेट मतलब घुटनों का विनाश : स्क्वेट को लेकर तरह-तरह की बातें जिमों में की जाती हैं। इनमें सबसे ज्यादा बात घुटनों को लेकर होती है। कुछ लोग कहते हैं घुटनों को बचाने के लिए हाफ स्क्वेट ही मारें।
विज्ञान की बात : दशकों बीत गए पर क्लासिक स्क्वेट का मुकाबला कोई नहीं कर पाया। सही फॉर्म में फुल स्क्वेट लगाएं घुटनों को कोई नुकसान नहीं होगा। कान खुजाने का तरीका गलत हो ईयर बड भी पर्दा फाड़ सकता है। दोष कसरत का नहीं कसरत के तरीके का होता है।