इन्द्रधनुष की सतरंगी दुनिया
देख बोली मुनिया,
वाह! वाह! मैया,
देख जरा कितनी रंगीन है दुनिया।
दिख रहा पास में, है कितनी दूर,
आसमाँ सजा है जैसे सजती दुल्हन,
चमक रहा सारा आँगन,
जैसे चमक रहा शीतलपुर...और पढ़ें
उम्मीद का दीया लिए फिरते हैं
दिल की गलियों में।
जब बढ़ती है ख़्वाहिशो की लौ हर
सांस सुलगने लगती है।।
हर मौसम हो बहारों का ये उम्मीद
दिल को होती नहीं।
ख़िज़ां में भी तरावट हो तो चाह
बहकने लगती है।।...और पढ़ें
काटे मच्छर
रात भर जागा
कीचड़ युक्त
सड़क से भागा
गांव गया था
गांव में जागा।
खेत नहीं था
अभी भी खाली
पानी में डूबी
धान की बाली
डांट रही मेरी
घर वाली
हंसिया लेकर
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अकेलेपन का नाम
उदासी है
हर लम्हे पे
ये तारी है
उदासियों के
प्रवासित जीवन को
जीते जाना
लाचारी है ।
-मं शर्मा...और पढ़ें
हथेली पर दुआ की धूप रख कर,
किसी ने उम्र भर रोपा था जिसको,
उसी इक सब्र के छोटे से पौधे को,
ज़माने ने बहुत बे-आबरू देखा।
मगर वो चुप रहा, सहता रहा सब,
कभी पतझड़ की रुसवाई, कभी यादों की परछाईं,
उसे मालूम...और पढ़ें
रूह प्यासी कहाँ से आती है
ये उदासी कहाँ से आती है
है वो यक-सर सुपुर्दगी तो भला
बद-हवासी कहाँ से आती है
वो हम-आग़ोश है तो फिर दिल में
ना-शनासी कहाँ से आती है
एक ज़िंदान-ए-बे-दिली और शाम...और पढ़ें
यदि मौन मुखर हो जाए तो ,आसान सफ़र हो जाएगा
हम प्रेम का दीप जलाये तो मन प्रेम नगर हो जाएगा
कब तक चुप बैठोगे ऐसे
पत्थर की मूरत हो जैसे
करूँ आचमन पुष्प चढ़ाऊँ
बोलो तो कोई गीत सुनाऊँ
वाह करो इन अधरों से,मेरा गीत...और पढ़ें
आज जिन होंठो पर चुप्पी है
जीवन में कभी तो मुस्कराए होंगे
ये उदासी ये खामोशी ये टूटते सपनों के झिलमिलाते आंखों में साए
कभी तो जीवन के हंसी सपने सजाए होंगे
अब ये अकेलापन दर्द की सर्द सिसकियां
जीवन की बेरंग साए में जीव...और पढ़ें
हुई घर में लड़की,
तो छाई घर में अनबनी,
लोग पूछते हैं, “क्या हुआ?”
तो कहते हैं, “यार, कोई बात न बनी।”
क्योंकि लड़के की चाहत थी सबको,
अब घर उनके बिटिया आई है,
बधाई के चलते घर में,
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मोहब्बत के बाद कुछ भी पहले-सा नहीं रहता
कभी-कभी कोई व्यक्ति
हमारी ज़िंदगी में इस तरह आता है,
जैसे किसी बंद कमरे की खिड़की से
अचानक धूप का एक टुकड़ा भीतर उतर आए।
न कोई आहट होती है,
न आने की कोई वजह समझ...और पढ़ें