भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात हुई। पीएम मोदी ने पुतिन का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए उन्हें गले लगाया। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक में ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और सहयोग से जुड़े अहम मुद्...और पढ़ें
इश्क़ हमारे ख़याल पड़ा है ख़्वाब गई आराम गया
जी का जाना ठहर रहा है सुब्ह गया या शाम गया
इश्क़ किया सो दीन गया ईमान गया इस्लाम गया
दिल ने ऐसा काम किया कुछ जिस से मैं नाकाम गया
किस किस अपनी कल को रोवे हिज्राँ...और पढ़ें
आप पहले से ही किसी के है।
फिर मेरे ज़ख्म कैसे टटोले है।।
तुम्हारी बाते पहले से अच्छी।
किस दिल के बारे में बोले है।।
करते रहो बात बन जाएगी।
जैसे नाप तोलकर मुँह खोले है।।
लोगों के आगे रो...और पढ़ें
बाज़ के पंजों में
एक साँप काँपता है,
साँप के फन में
एक चिड़िया की आँख।
चिड़िया की आँख में
आकाश उलटा है—
नीला,
मगर बंद।
नीचे नदी है;
मछली जल को चीरती है,
फिर उसी जल...और पढ़ें
खत-ओ-चिट्ठी तार के, ज़माने कहां गये।
डांक और इंतजार के, ज़माने कहां गये।।
बदलते वक्त ने , सब कुछ बदल दिया।
वो गिल्ली-डंडे,यार के ज़माने कहां गये।।
एक सी लगती है, सुबह-शाम शहर की।
वो फाल्गुनी बयार के...और पढ़ें
जब आना ही इस पथ को तू और राह को क्यों जाये
चलता चल राही मेरी तरफ भले चाल तेरी कुछ मध्यम है ।
ये राह बनी बस तेरा साथी कोई और साथ न दे पाया
चलते चलते इस राह पे राही तेरी आँख भला अब क्यों नम है।
जो साथी थे संघ...और पढ़ें
मुहब्बत केवल तुम से है और हसरतें, अरमान बहुत हैं,
इंसान तो बहुत मिले लेकिन सच्चा हमसफ़र कोई नहीं मिला...और पढ़ें
मैं बाहर ही भटकता रहा
जिसकी ख़ातिर मैं ज़माने में बहुत दूर गया,
वो मेरे भीतर था—मैं बाहर ही भटकता रहा।
बीज मुट्ठी में लिए खेत बदलता ही रहा,
मैं उसे बोता नहीं था—फ़सलें माँगता रहा।
चाबी हाथों...और पढ़ें
जीवन के कुछ पल थे,
जो अब यादें बन गई हैं।
कुछ किस्से है मेरे,
जिन्हें यादों के रूप मे,
संजोया है मैने।
जब मैं मुस्कुराती हूं,
तो पति पूछते है क्यों मुस्करा रही हो,
अब उन्हें क्या बताऊ, कुछ याद आ गया...और पढ़ें
लूट मची है लूट लो जितना , मत बैठो बेकार
देख के यह सोने की चिड़िया , सब है कहीं फरार
आपस में सब करते हैं देखो कितनी मारामारी
कौन बनेगा इनका शिकार, सब कातिल हैं शिकारी
सब के हाथ में है भाला, बरछी , तलवार
देख क...और पढ़ें
हिंदी है हमारे हिंदुस्तान की भाषा
हिंदी है हमारे सारे जहान की भाषा
हिंदी है हमारे मन की भाषा
हिंदी है हमारे जन जन की भाषा
जब मुंह खोलो
हिंदी ही बोलो
हिंदी को किसी से मत तोलो
हिंदी से सारा समाज संजो लो।...और पढ़ें
हाँ हाँ,,,,,, मैं हिन्दी हूँ।
हाँ हाँ,,,,, मैं हिन्दी हूँ।
मेरा ऐसा हाल बना डाला,खुद ही खुद शर्मिंदी हूँ
हाँ,,,,,
कल भारत की परिभाषा थी,
हर हृदय की अभिलाषा थी,
इस धरती का ध्रुव तारा थी,
मै ही ज...और पढ़ें
प्रिय, फिर कभी हम मिल भी गए,
तो वह पहले-सा कहाँ परिदृश्य होगा।
आँखों में सावन ठहरा होगा,
अधरों पर कोई मौन खिला होगा।
जिन पगडंडियों पर साँझ ढली थी,
उन पर अब धुँधली धूप मिलेगी,
कदंब तले जो गंध बसी थी...और पढ़ें
तुम्हारा
कुछ भी
मेरा बहुत कुछ है
प्रिय
तुम्हारा होना ही
काफी है
मेरे लिए
तुम्हारा मौन
मेरे लिए
संभाषण से कम नहीं
तुम्हारी मुस्कान
मेरे लिए
खुशियों का अंबार
तुम...और पढ़ें
नील नभांगन निःशब्द हुआ, नक्षत्र सुधा बरसाते हैं,
शांत सरोवर के उर पर, चंद्र-किरण झिलमिलाते हैं।
श्वास-सरोरुह धीरे खिलता, अंतर-गंध जगाता है,
बूँद-बूँद में सिंधु समाकर, भेद सभी मिट जाते हैं।
वन-वीणा के तार थमे तो, पर...और पढ़ें
अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली...और पढ़ें
रिक्त घटों में शब्द बहुत, अंतर किंतु उजाड़ है,
छिछले जल पर धूप अधिक, तल में गहरा ज्वार है।
जिसके भीतर दीप न जला, जग को ज्ञान सिखाता है,
थोथा चना बाजे घना—युग का सत्य बताता है।
अक्षर थोड़े क्या पढ़ डाले, पांडित्य इत...और पढ़ें
न हो साथ कोई, मैं अकेला सहस्रबाहु बन जाऊंगा।
आज अकेला हूँ मैं, कल शून्य से हजार बनाऊंगा।
नहीं चाटूंगा मैं किसी के तलवे, न कहीं शीश झुकाऊंगा।
आज वक्त नहीं मेरे साथ, पर मैं अब वक्त को भी गुलाम बनाऊंगा।
चाहे लगा दूं जी-जान मै...और पढ़ें
मोहब्बत का उन सब को लुफ्त मिलता।
प्यार का रास्ता घूमकर जब कहीं मिलता।।
शिद्दत से चाह कुबूल मुझे भी उन्हें भी।
जिस्म के हर हिस्से को उफान मिलता।।
जिज्ञासा झलकती जिनकी ढलान के बाद।
उन्हीं की नजर को नजर...और पढ़ें