भारतीय इतिहास का, कीजे अनुसंधान
देव-दनुज-किन्नर सभी, किया सोमरस पान

किया सोमरस पान, पियें कवि, लेखक, शायर
जो इससे बच जाये, उसे कहते हैं 'कायर'

कहें 'काका', कवि 'बच्चन' ने पीकर दो प्य...और पढ़ें
13 hours ago
                                                                           दिल आबाद कहाँ रह पाए उस की याद भुला देने से 
कमरा वीराँ हो जाता है इक तस्वीर हटा देने से 

रास्ता सोचते रहने से किधर बनता है 
सर में सौदा हो तो दीवार में दर बनता है ...और पढ़ें
13 hours ago
                                                                           अभी तो वक़्त का काफ़ी हिसाब बाक़ी है 
हमें जो पढ़नी है असली किताब बाक़ी है।

इन्हें सम्भाल कर रखूँगा ग़ुम न जाएँ कहीं,
ख़राबियाँ जो अब देंगी ख़िताब बाक़ी है।

तेरा गुरूर भी तोड़ेगी आबरू मेरी,
अभी तो आख...और पढ़ें
13 hours ago
                                                                           'लेखक विद्वान हो न हो, आलोचक सदैव विद्वान होता है। विद्वान प्रायः भौंडी बेतुकी बात कह बैठता है। ऐसी बातों से साहित्य में स्थापनाएं होती हैं। उस स्थापना की सड़ांध से वातावरण बनता है जिसमें कविताएं पनपती हैं। सो कुछ भी कहो, आलोचक आदमी काम का है। आज...और पढ़ें
                                                
13 hours ago
                                                                           मैं अपने घाव गिन रहा हूँ 
दूर तितलियों के रेशमी परों के नीले पीले रंग 
उड़ रहे हैं हर तरफ़ 
फ़रिश्ते आसमान से उतर रहे हैं सफ़-ब-सफ़ 

मैं अपने घाव गिन रहा हूँ 
आँसुओं की ओस में नहा के भूले-बिसरे ख़्वाब आ गए ...और पढ़ें
13 hours ago
                                                                           अब ख़ल्क अगर ख़ुदा बनाए
मिट्टी के रंग का बनाए

मुझमें भी चराग़ जल उठेंगे
तू ख़ुद को अगर हवा बनाए

तारीफ़ यही तो है हमारी
वो ज़ह्र कि जो दवा बनाए

मैं रात बना रहा हूं ख़ुद को
है कोई...और पढ़ें
13 hours ago
                                                                           मेरे घर के सामने एक
पीपल का पेड़ था
जो रोज गीत नया गुनगुनाता था
कुछ नई कहानी सुनाता था
 
मां रोज जला देती थी दीया
उसे बूढ़े पीपल के पेड़ के नीचे
इस विश्वास से कि बाधाएं दूर रहेंगी
 
रोज चढ़ात...और पढ़ें
16 hours ago
                                                                           'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- प्रखर, जिसका अर्थ है- बुद्धिमत्तापूर्ण, उग्र या तीक्ष्ण। प्रस्तुत है शिवमंगल सिंह सुमन की कविता- यदि क्षण भर तुम्हें झुला न सका

पलकों के पलने पर प्रेयसि 
यदि क्षण भर तुम्हे...और पढ़ें
2 hours ago
                                                                           काश जिंदगी मेरी कोई चित्रावली होती,
देख सकता मैं, उन तस्वीरों को,
कब थोड़ी ख़ुशी मिलेगी, कब दिल रोयेगा,
काश जिंदगी मेरी कोई चित्रावली होती....
हटा सकता मैं उन लम्हों को जिन्होंने मुझे रुलाया हैं,
जोड़ता कुछ तस्वीरेंऔर पढ़ें
11 hours ago
                                                                           हम को आपस में मोहब्बत नहीं करने देते 
इक यही ऐब है इस शहर के दानाओं में 
- क़तील शिफ़ाई...और पढ़ें
13 hours ago
                                                                           जागो ऐ भारतवासी
कदम से कदम बदाना।
अपने प्यारे भारत को है
नई पहचान दिलाना॥

ऊँच- नीच का भेद मिटा
सबको ही गले लगाएँ।
जाति-धर्म के नाम पर अब
ना कोई लड़ने पाए।
नफरत का नासूर मिटाकर
प्र...और पढ़ें
19 hours ago
                                                                           धीरे धीरे क्षमाभाव समाप्त हो जाएगा
प्रेम की आकांक्षा तो होगी मगर जरूरत न रह जाएगी
झर जाएगी पाने की बेचैनी और खो देने की पीड़ा
क्रोध अकेला न होगा वह संगठित हो जाएगा
एक अनंत प्रतियोगिता होगी जिसमें लोग
पराजित न होने क...और पढ़ें
14 hours ago
                                                                           तुम्हारी एक आवाज पर, हाजिर रहे।
आज तुम ही हम से, गैर हाजिर रहे।
शायद भूल, या गलती हो गई तुमसे।
जिसे छिपाने में, 'उपदेश' माहिर रहे।

लगता अकेले में, तुम्हारे आँसू बरसे।
शायद तुम्हारा दिल, मिलने को तरसे...और पढ़ें
15 hours ago
                                                                           उम्र निकल गई घर की फ़िक्र में दोस्तो,
हो सके तो अब अपना भी ख्याल कर लेना।

थक गई है जिंदगी उलझनों के जिक्र में दोस्तो,
बच्चों की घर-गृहस्थी को अब आज़ाद छोड़ देना।

बोझ कंधों से हटा कर खुशियों से रूबरू होना दो...और पढ़ें
11 hours ago
                                                                           चंचल चितवन चाँदनी
मोहक सी है रागिनी

वो छैल छबीली मंडराती
नटवर लाल को बहुत सताती

कभी ठुमक-ठुमक कभी झूम-झूम
यमुना के तीर, वो घूम-घूम
कान्हा के धुन में गाती जाती

उनकी प्रीत को सब ज...और पढ़ें
11 hours ago
                                                                           डरते हैं वो, कहीं मैं उनसे आगे ना बढ़ जाऊं,
नारी हूँ मैं, पुरुषों पे भारी ना पड़ जाऊं।

कभी समय की सीमा का प्रतिबिंब लगा कर,
रोका मुझे कई बार स्वावलंबी ना बना कर।

रहते चौकन्ने हर बढ़ते कदमों पर मेरे,
...और पढ़ें
11 hours ago
                                                                           माँ के लिए
वो मुझे आज भी बच्चा समझती है,
प्यार करती है और डपटती हैl
सोती नहीं रातभर दुखों में मेरे
उसकी आँखों से ममता झलकती हैll

दुखों में याद आती है माँ
सुखों में खो जाती है माँl
आज घिरा हूँ त...और पढ़ें
19 hours ago
                                                                           "मेरा सत्य मैं ही हूं।"

सत्य और असत्य
एक दिन दोनों ही
सामने आ खड़े हुए
तकरार करने लगे।

सत्य बोला वत्स !
अकड़ के लिए नहीं,
बल्कि आत्मसम्मान हेतु
हमेशा मुझे ही चुना करो।
...और पढ़ें
13 hours ago
                                                                           अच्छे थे वो, जब दूर से देखता था,
जब पास पहुँचा, तो उन्हे जान सा गया हूं,
मोहब्बत बर्बाद करती है, मैं मानता नही था,
पर अब इस बात को, मान सा गया हूं,
वो बदले, सब बदला, हम क्या करें?
ए जिस्म, मैं हो, बे-जान सा गया हूं...और पढ़ें
19 hours ago
                                                                           प्यार, रिश्तों का व्यापार नहीं।
प्यार, जरूरतों का आधार नहीं।
प्यार, अनुकंपाओं का आभार नहीं।
प्यार, अनुकंठाओं का सार नहीं।
प्यार, मजबूरियों का भार नहीं।
प्यार, कामनाओं का बाजार नहीं।
प्यार, निष्पक्ष मित्र-सा ए...और पढ़ें
1 hour ago
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