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                                                                           इस को नाम जुनूँ का दे लो प्यार कहो कि दुलार कहो
ऐसा और किसी का देखा दिल का कारोबार कहो

बस्ती में दीवाना समझो दश्त में हम को ख़्वार कहो
उन से एक न एक बहाने होना था दो चार कहो

और किसी के दर पर जाएँ छोड़ के उन...और पढ़ें
16 hours ago
                                                                           क्या कोई अपने तन की त्वचा और मन की मैल से बाहर आ सकता है? कहीं भी जाओ, ये दोनों चीज़ें पीछा नहीं छोड़तीं।
- निर्मल वर्मा  
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12 hours ago
                                                                           कहाँ ले जाऊँ दिल दोनों जहाँ में इसकी मुश्क़िल है 
यहाँ परियों का मजमा है, वहाँ हूरों की महफ़िल है ।

इलाही कैसी-कैसी सूरतें तूने बनाई हैं,
हर सूरत कलेजे से लगा लेने के क़ाबिल है।

ये दिल लेते ही शीशे की तरह प...और पढ़ें
13 hours ago
                                                                           'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- विक्रम, जिसका अर्थ है- पराक्रम, बहादुरी, शक्ति। प्रस्तुत है मैथिलीशरण गुप्त की कविता- कहो आज किस ओर चलोगे?

कहो आज किस ओर चलोगे?
देखोगे किस ओर भला?
एक ओर वीरत्व-विभव है...और पढ़ें
13 hours ago
                                                                           अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली ...और पढ़ें
                                                
16 hours ago
                                                                           बहुत घुटन है कोई सूरत-ए-बयाँ निकले
अगर सदा न उठे कम से कम फ़ुग़ाँ निकले

फ़क़ीर-ए-शहर के तन पर लिबास बाक़ी है
अमीर-ए-शहर के अरमाँ अभी कहाँ निकले

हक़ीक़तें हैं सलामत तो ख़्वाब बहुतेरे
मलाल क्यूँ हो कि...और पढ़ें
14 hours ago
                                                                           भोर के जामुनी एकांत में
जब रात का थका-हारा उनींदा शुक्रतारा
टूट कर गिरने को होगा अपनी नींद की भंवर में
और सुबह की पहली ट्रेन की सीटी के बीच
शहर की नींद आखिरी अँगड़ाइयाँ ले रही होगी

मैं छोड़ रहा होऊँगा
...और पढ़ें
13 hours ago
                                                                           कहाँ कहाँ पे लुटे हो शुमार मत करना
मगर किसी पे भी अब ए'तिबार मत करना

हमारी राह में कलियाँ नहीं हैं काँटे हैं
हमारी राह कभी इख़्तियार मत करना

बहुत ही क़ीमती है ये तिरे बदन का लिबास
किसी ग़रीब के ब...और पढ़ें
13 hours ago
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