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                                                                           भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात हुई। पीएम मोदी ने पुतिन का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए उन्हें गले लगाया। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक में ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और सहयोग से जुड़े अहम मुद्...और पढ़ें
                                                
18 hours ago
                                                                           इश्क़ हमारे ख़याल पड़ा है ख़्वाब गई आराम गया
जी का जाना ठहर रहा है सुब्ह गया या शाम गया

इश्क़ किया सो दीन गया ईमान गया इस्लाम गया
दिल ने ऐसा काम किया कुछ जिस से मैं नाकाम गया

किस किस अपनी कल को रोवे हिज्राँ...और पढ़ें
19 hours ago
                                                                           फल्गु नदी के किनारे
होते पिंडदान ढेर सारे
फल्गु नदी के तट पर
बसा है गया शहर
है यह बुद्ध का शहर
है यह ज्ञान का शहर
है यह उत्थान का शहर
बोधगया यहां हैं
बोधि मंदिर यहां है
गया का पुराना नाम...और पढ़ें
21 hours ago
                                                                           आप पहले से ही किसी के है।
फिर मेरे ज़ख्म कैसे टटोले है।।

तुम्हारी बाते पहले से अच्छी।
किस दिल के बारे में बोले है।।

करते रहो बात बन जाएगी।
जैसे नाप तोलकर मुँह खोले है।।

लोगों के आगे रो...और पढ़ें
21 hours ago
                                                                           बाज़ के पंजों में
एक साँप काँपता है,
साँप के फन में
एक चिड़िया की आँख।

चिड़िया की आँख में
आकाश उलटा है—
नीला,
मगर बंद।

नीचे नदी है;
मछली जल को चीरती है,
फिर उसी जल...और पढ़ें
22 hours ago
                                                                           खत-ओ-चिट्ठी तार के, ज़माने कहां गये।
डांक और इंतजार के, ज़माने कहां गये।।

बदलते वक्त ने , सब कुछ बदल दिया।
वो गिल्ली-डंडे,यार के ज़माने कहां गये।।

एक सी लगती है, सुबह-शाम शहर की।
वो फाल्गुनी बयार के...और पढ़ें
22 hours ago
                                                                           जब आना ही इस पथ को तू और राह को क्यों जाये
चलता चल राही मेरी तरफ भले चाल तेरी कुछ मध्यम है ।

ये राह बनी बस तेरा साथी कोई और साथ न दे पाया
चलते चलते इस राह पे राही तेरी आँख भला अब क्यों नम है।

जो साथी थे संघ...और पढ़ें
21 hours ago
                                                                           मुहब्बत केवल तुम से है और हसरतें, अरमान बहुत हैं,
इंसान तो बहुत मिले लेकिन सच्चा हमसफ़र कोई नहीं मिला...और पढ़ें
22 hours ago
                                                                           मैं बाहर ही भटकता रहा

जिसकी ख़ातिर मैं ज़माने में बहुत दूर गया,
वो मेरे भीतर था—मैं बाहर ही भटकता रहा।

बीज मुट्ठी में लिए खेत बदलता ही रहा,
मैं उसे बोता नहीं था—फ़सलें माँगता रहा।

चाबी हाथों...और पढ़ें
22 hours ago
                                                                           जीवन के कुछ पल थे,
जो अब यादें बन गई हैं।
कुछ किस्से है मेरे,
जिन्हें यादों के रूप मे,
संजोया है मैने।
जब मैं मुस्कुराती हूं,
तो पति पूछते है क्यों मुस्करा रही हो,
अब उन्हें क्या बताऊ, कुछ याद आ गया...और पढ़ें
21 hours ago
                                                                           लूट मची है लूट लो जितना , मत बैठो बेकार
देख के यह सोने की चिड़िया , सब है कहीं फरार

आपस में सब करते हैं देखो कितनी मारामारी
कौन बनेगा इनका शिकार, सब कातिल हैं शिकारी
सब के हाथ में है भाला, बरछी , तलवार
देख क...और पढ़ें
22 hours ago
                                                                           हिंदी है हमारे हिंदुस्तान की भाषा
हिंदी है हमारे सारे जहान की भाषा
हिंदी है हमारे मन की भाषा
हिंदी है हमारे जन जन की भाषा
जब मुंह खोलो
हिंदी ही बोलो
हिंदी को किसी से मत तोलो
हिंदी से सारा समाज संजो लो।...और पढ़ें
22 hours ago
                                                                           हाँ हाँ,,,,,, मैं हिन्दी हूँ।
हाँ हाँ,,,,, मैं हिन्दी हूँ।
मेरा ऐसा हाल बना डाला,खुद ही खुद शर्मिंदी हूँ
हाँ,,,,,

कल भारत की परिभाषा थी,
हर हृदय की अभिलाषा थी,
इस धरती का ध्रुव तारा थी,
मै ही ज...और पढ़ें
22 hours ago
                                                                           प्रिय, फिर कभी हम मिल भी गए,
तो वह पहले-सा कहाँ परिदृश्य होगा।
आँखों में सावन ठहरा होगा,
अधरों पर कोई मौन खिला होगा।

जिन पगडंडियों पर साँझ ढली थी,
उन पर अब धुँधली धूप मिलेगी,
कदंब तले जो गंध बसी थी...और पढ़ें
21 hours ago
                                                                           तुम्हारा
कुछ भी
मेरा बहुत कुछ है
प्रिय
तुम्हारा होना ही
काफी है
मेरे लिए
तुम्हारा मौन
मेरे लिए
संभाषण से कम नहीं
तुम्हारी मुस्कान
मेरे लिए
खुशियों का अंबार
तुम...और पढ़ें
22 hours ago
                                                                           नील नभांगन निःशब्द हुआ, नक्षत्र सुधा बरसाते हैं,
शांत सरोवर के उर पर, चंद्र-किरण झिलमिलाते हैं।
श्वास-सरोरुह धीरे खिलता, अंतर-गंध जगाता है,
बूँद-बूँद में सिंधु समाकर, भेद सभी मिट जाते हैं।

वन-वीणा के तार थमे तो, पर...और पढ़ें
21 hours ago
                                                                           अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली...और पढ़ें
                                                
21 hours ago
                                                                           रिक्त घटों में शब्द बहुत, अंतर किंतु उजाड़ है,
छिछले जल पर धूप अधिक, तल में गहरा ज्वार है।
जिसके भीतर दीप न जला, जग को ज्ञान सिखाता है,
थोथा चना बाजे घना—युग का सत्य बताता है।

अक्षर थोड़े क्या पढ़ डाले, पांडित्य इत...और पढ़ें
21 hours ago
                                                                           न हो साथ कोई, मैं अकेला सहस्रबाहु बन जाऊंगा।
आज अकेला हूँ मैं, कल शून्य से हजार बनाऊंगा।
नहीं चाटूंगा मैं किसी के तलवे, न कहीं शीश झुकाऊंगा।
आज वक्त नहीं मेरे साथ, पर मैं अब वक्त को भी गुलाम बनाऊंगा।
चाहे लगा दूं जी-जान मै...और पढ़ें
21 hours ago
                                                                           मोहब्बत का उन सब को लुफ्त मिलता।
प्यार का रास्ता घूमकर जब कहीं मिलता।।

शिद्दत से चाह कुबूल मुझे भी उन्हें भी।
जिस्म के हर हिस्से को उफान मिलता।।

जिज्ञासा झलकती जिनकी ढलान के बाद।
उन्हीं की नजर को नजर...और पढ़ें
21 hours ago
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4.3
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