फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Literature ›   Noted Indian theater director Ram Gopal Bajaj got National Kalidas Award

कालिदास सम्मान से सम्मानित रंगजगत के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर रामगोपाल बजाज

Mon, 04 Dec 2017 07:25 PM IST
सुनील मिश्र
सुनील मिश्र Updated Mon, 04 Dec 2017 07:25 PM IST
विज्ञापन
Noted Indian theater director Ram Gopal Bajaj got National Kalidas Award
रामगोपाल बजाज
भारतीय रंगमंच के गहरे अनुभवी, गुणी और सुप्रतिष्ठित कलाकार, निर्देशक रामगोपाल बजाज को हाल ही में उज्जैन में मध्यप्रदेश शासन का रंगमंच के क्षेत्र के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय कालिदास सम्मान से विभूषित किया गया है।
विज्ञापन


रामगोपाल बजाज, देश के एकमात्र सबसे बड़े रंग-प्रशिक्षण एवं परिष्कार संस्थान राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के 1965 बैच के स्नातक रहे हैं। आगे चलकर वे इसी संस्थान के छह साल तक निदेशक भी रहे। निदेशक के पद पर रहते हुए उन्होंने बच्चों के लिए नाट्य उत्सव जश्न ए बचपन और परिपक्व रंगकर्म के लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर नाट्य समारोह भारत रंग महोत्सव की परिकल्पना की और स्थापित किया।
विज्ञापन


दोनों ही समारोह इस संस्थान की पहचान को बड़ी व्यापकता प्रदान करने में सफल रहे हैं। भारतीय रंगजगत में अपनी पांच दशक की निरन्तर सक्रियता और उत्कृष्ट प्रतिमानों से महत्वपूर्ण स्थान और आदर प्राप्त करने वाले रंगकर्मी रामगोपाल बजाज का जन्म 5 मार्च 1940 को दरभंगा, बिहार में हुआ था। उन्होंने बिहार विश्वविद्यालय से स्नातक उपाधि प्राप्त की। रंगमंच के प्रति उनका रुझान छोटी उम्र से ही रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन


युवावस्था में उन्होंने अपने रंगकर्मी मित्रों स्वर्गीय ओम शिवपुरी, स्वर्गीय सुधा शिवपुरी, स्वर्गीय बी.वी. कारंत, स्वर्गीय बृजमोहन शाह एवं मोहन महर्षि के साथ मिलकर ‘दिशान्तर’ नामक नाट्य संस्था की स्थापना की और अनेक उत्कृष्ट नाट्य कृतियों के मंचन की शुरुआत की। उस समय उन्होंने जो नाटक मंचित किए, उनमें ‘सुनो जनमेजय’, ‘हयवदन’, ‘बेगम का तकिया’, ‘घासीराम कोतवाल’, ‘अंधा युग’, ‘तुगलक’ एवं ‘किंग लियर’ आदि शामिल हैं।

एक सफल एवं गुणी निर्देशक के रूप में इसी निरन्तरता और सक्रियता के बीच ‘अजातघर’, ‘अषाढ़ का एक दिन’, ‘सूर्य की अन्तिम किरण से सूर्य की पहली किरण तक’, ‘कैद ए हयात’, ‘स्कन्दगुप्त’, ‘मुक्तधारा’ (पंजाबी भाषा में) ‘भूख आग है,’ ‘तलघर’, आदि नाटकों ने उनकी प्रतिष्ठा को समृद्ध करने का काम किया।

आरम्भ में नई दिल्ली आकर रामगोपाल बजाज ने अनेक संस्थानों में नाटक प्रभाग के प्रमुख रहते हुए महती कार्य किया। इनमें 1969 से 73 तक माॅडर्न स्कूल दिल्ली में नाट्यकला का अध्यापन, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के भारतीय थिएटर विभाग के रीडर पद पर कार्य एवं 1979 से 80 तक पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला के नाट्य कला विभाग के प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष के रूप में सक्रियता शामिल हैं।

इसके अलावा वर्ष 2002 में एक वर्ष डाॅ. राधाकृष्णन पीठ, हैदराबाद विश्वविद्यालय के प्रमुख रूप में भी उन्होंने काम किया। वर्ष 2008 में उन्होंने शब्दाकार थिएटर समूह की स्थापना की और लैला मजनूं नाटक को भव्यतापूर्वक मंचित किया। रामगोपाल बजाज एक निर्देशक के रूप में जितने बारीक, सूक्ष्म से सूक्ष्म संवेदनाओं और आवेगों के पारखी रहे हैं, एक कलाकार के रूप में उतने ही गहन, भीतरी त्वरा के विलक्षण एवं असाधारण प्रदर्शन में उनको महारथ हासिल है।

एक गहरे, दृष्टि सम्मत तथा तार्किक गुणों से समृद्ध बज्जू भाई (आत्मीयता और अपनेपन में उनको इसी नाम से सम्बोधित किया जाता है) हमारे समय के एक अत्यन्त विशिष्ट एवं महत्वपूर्ण कलाकार एवं रंगकर्मी हैं, जिनकी प्रतिभा की जरूरत उतनी ही भारतीय सिनेमा को भी है, तभी उनको अनेक फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निरन्तर हासिल हुआ करती हैं।


वे इन दिनों सिनेमा और धारावाहिकों में लगातार काम कर रहे हैं। उनकी कुछ महत्वपूर्ण फिल्मों में टेली फिल्म जेवर का डिब्बा, तमस, बसंती और फीचर फिल्मों में मैं आजाद हूं, उत्सव, गोधूलि, मासूम, मिर्च मसाला, हिप हिप हुर्रे, चांदनी, परजानिया, द मैथ, मैंगो ड्रीम्स, जॉली एल.एल.बी. टू शामिल हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed