नौकरीपेशा युवाओं के लिए बेहद काम की है ये खबर
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क्या आपको मालूम है कि आज की कामकाजी युवा पीढ़ी अपनी नौकरी में किस चीज को तरजीह देती है? नियोक्ता नई भर्ती करने और टेलेंटिड युवाओं को कंपनी में रखने की रणनीति में उनकी सोच के मुताबिक क्या बदलाव कर रहे हैं?
1980 और 1990 के दशक में जन्मे 43 देशों के 16 हजार से ज्यादा लोगों पर हुए विस्तृत अध्ययन में पाया गया है कि विभिन्न देशों में युवाओं की उम्मीदें काफी अलग हैं।
बहुराष्ट्रीय कंपनियां पहले पूरी दुनिया में युवाओं को नौकरी पर रखने के लिए, एक ही रणनीति अपनाती थीं। लेकिन अब वो हर देश के युवाओं की प्राथमिकताओं के हिसाब से चलती हैं।
ये भी जाहिर हुआ है कि भारतीय कामकाजी युवा टीम भावना और मैनेजर व सहयोगियों से मिलने वाली इज्जत को सबसे ज्यादा अहमियत देते हैं।
कंपनी से क्या चाहते हैं युवा?
आज की युवा पीढ़ी (जिसे मिलेनियल भी कहते हैं) को काम पर रखने से पहले नियोक्ताओं को अपना नेतृत्व विकास कार्यक्रम कुशलता से तैयार करना चाहिए, ताकि अधीर युवाओं को प्रबंधन के फास्ट ट्रैक पर डाला जा सके। ये नजरिया कितना सही है? काफी हद तक, लेकिन 1980 और 1990 के दशक में पैदा हुई पीढ़ी के बारे में यह परंपरागत विचार है।
फ्रांस जैसे देशों में इस रणनीति को लागू करना निस्संदेह सही होगा, जहां हाल में किए गए एक सर्वेक्षण में आधे से ज्यादा युवा कामकाजी क्षेत्र में लीडर बनना चाहते हैं। पर स्वीडेन और नॉर्वे के हालात ऐसे नहीं हैं। स्वीडेन के 20 प्रतिशत और नॉर्वे के 15 प्रतिशत युवा “लीडर” बनने को महत्वपूर्ण मानते हैं।
यह सही है कि काम और करियर के लक्ष्य के बारे में दृष्टिकोण भिन्न होंगें, पर इस संदर्भ में पिछली सदी में पैदा हुए लोगों के विचार उम्मीद से कहीं ज्यादा जटिल हैं।
परामर्श सेवाएं देने वाली फर्म यूनिवर्सम और इनसीड (आईएनएसईएडी) बिजनेस स्कूल के “एमर्जिंग मार्केट्स इन्स्टीच्यूट” ने एक अध्ययन किया। इसमें आश्चर्यजनक रूप से, एक ही क्षेत्र के विभिन्न देशों में भी, पीढ़ियों के नजरिए में अंतर पाए गए।
नियोक्ता अब यह समझने लगे हैं कि युवाओं का समूह समरस नहीं है, यही वजह है कि अधिकांश बहुराष्ट्रीय नियोक्ता वैश्विक नियुक्ति रणनीति बनाने लगे हैं।
ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको (बैट) में ‘ग्लोबल टैलेंट एक्विजीशन’ के प्रमुख रॉबर्टो ब्लांडा का कहना है, “हम विभिन्न देशों में आंतरिक भर्ती टीम गठित कर रहे हैं ताकि हम अपना ‘एम्ल्प्लाई वैल्यू प्रोपोजीशन’ तैयार कर सकें”।
जापानियों का रुख अलग
एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कामकाजी युवाओं की सोच समझ में सबसे ज़्यादा अंतर जाहिर हुआ। अधिकतर एशियाई देशों में युवा चाहते हैं कि मैनेजर काम की निष्पक्षता से परख करें और उन पर भरोसा कर उन्हें काम सौंपें।
यूनिवर्सम के ग्लोबल डायरेक्टर क्लाउदिया ततानेली का कहना है, “जापान इस मामले में क्षेत्र का सबसे ज्यादा विविधता वाला देश है। उनका रवैया अन्य एशियाई युवाओं से अलग है।
अनेक एशियाई देशों के युवा मैनेजर बनना चाहते हैं जबकि जापानी इसे बहुत ज्यादा अहमियत नहीं देते। जापान के युवा अपने मां-बाप की तुलना में बेहतर जीवन जीने के प्रति ज्यादा आशावान भी नहीं दिखे।"
भारत: टीम, पारदर्शिता और इज्जत
इस अध्ययन में भारतीय युवाओं ने सबसे ज्यादा टीम भावना को अहमियत दी है। इसके अलावा युवा अपने मैनेजरों से सम्मान भी चाहते हैं। भारत में डैल के लिए कर्मचारियों की भर्ती करने वालों के मुताबिक भारत में इज़्ज़त दिए जाने के मुद्दे को ज़्यादा महत्व दिया जाता है।
डैल ने जोर देकर कहा कि वे भारत में खुली बातचीत और पारदर्शिता पर विशेष ज़ोर दे रहें और अपने लीडरों के साथ ‘ओपन डोर पॉलिसी’ अपनाने पर जोर दे रहे हैं।
ग्लोबल टैलेंट की वरिष्ठ प्रबंधक जेनिफर न्यूबिल ने कहा, “भारतीय युवाओं के संदर्भ में हम जानबूझकर “खुला” (ओपन) और “ईमानदार” (इंटीग्रिटी) जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं।"
डैल ने अपने एक कर्मचारी म्यूरीयल अविनेंस के आगे बढ़ने को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए अभियान का हवाला देकर फ्रांसीसी लोगों के नेतृत्व संबंधी महत्वाकांक्षाओं को उभारने का प्रयास भी किया है जो एक सेल्स रिप्रेजेंटेटिव से सेल्स डाइरेक्टर बन गया।
स्थायित्व या प्रतिस्पर्धी भावना?
रूस में बैट (ब्रिटिश अमेरिकन टोबैको) ने पाया कि युवा पीढ़ी में कंपनी के स्थायित्व, उसकी अंतरराष्ट्रीय स्थिति, करियर में विकास की संभावना और कामकाज-जीवन संतुलन के प्रति रुझान ज्यादा नजर आया।
लेकिन मैक्सिको में कंपनी ने युवा वर्ग की प्रतिस्पर्धी भावना पर ज्यादा ध्यान दिया। ब्लांडा ने कहा, “मेक्सिको में हमने पाया कि युवाओं में खुद को चुनौती देने और अपने सहयोगी या सहकर्मी से बेहतर करने की ललक है।"
अगर कंपनियां स्थानीय पसंदों का ख्याल रखती हैं तो कर्मचारी नौकरी बदलने को तरजीह नहीं देते। इसके अलावा पूर्वी यूरोप के युवाओं ने चुनौतीपूर्ण कार्यों को अलग तरह से परिभाषित किया।
रूस के अधिकांश युवा (57 प्रतिशत) ऐसे प्रतिभाशाली लोगों के साथ काम करना चाहते हैं जो उनको प्रेरित कर सकें, पोलैंड के ऐसे युवा (64 प्रतिशत) नई चीजें सीखने की उम्मीद रखते हैं जबकि 39 प्रतिशत चेक ऐसे काम से जुड़ना चाहते हैं जिससे वो कुछ नया कर सकें।
लातीनी अमरीकी और ब्राजीली युवा खुद को रोल मॉडल और तकनीकी और मामलों के विशेषज्ञ के रूप में देखना चाहते हैं।जबकि अर्जेंटीना, चिली, कोलंबिया और मेक्सिको के युवाओं का मत है कि सुपरवाइजरों को अपने कर्मचारियों को सशक्त कर उन्हें काम सौंपना चाहिए।
यूनिवर्सम के ग्लोबल निदेशक क्लाउदिया ततानेली ने बताया, “इस तरह की सूचनाएं कंपनियों को प्रबंधकीय गुणों को समझने में मदद करती हैं। यह युवाओं को प्रेरित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं और किसी भी देश में सर्वाधिक उपयुक्त मैनेजरों की पहचान में इसका प्रयोग किया जा सकता है।"
उत्तरी अमरीकी युवाओ में कामकाजी चिंताएं कुछ दूसरी तरह की देखी गई हैं। एक-तिहाई अमरीकी युवा बहुत ज़्यादा काम नहीं करना चाहते हैं जबकि कनाडा के 24 फ़ीसदी कामकाजी युवाओं की यही सोच है।
अमरीका सर्वेक्षण में जिन युवाओं ने भाग लिया उनमें से 40 फीसदी को नौकरी में आगे नहीं बढ़ पाने की चिंता थी जबकि कनाडा के 30 फीसदी युवा ही इस बारे में चिंतित दिखे।
कार्य-जीवन संतुलन
यूनिवर्सिटी ग्रेजुएट्स के बीच में जनरल इलेक्ट्रिक के लीडरशिप प्रशिक्षण कार्यक्रम की मज़बूत साख है, लेकिन वह खास देश की स्थितियों को देखते हुए इसमें बदलाव भी लाती है।
सऊदी अरब में कंपनी महिला लीडर्स की सफलताओं को ज्यादा उभारती है जबकि तुर्की में लोगों को विदेश में जाकर काम करने की बात ज्यादा आकर्षित करती है।
मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका और तुर्की के लिए टैलेंट डेवलपमेंट लीडर हिशाम अल मुथन्ना कहते हैं, “संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के युवाओं के बीच कार्य-जीवन संतुलन के बारे में ज्यादा बातें होती हैं।
यूएई के समाज में परिवार बहुत अहम होता है और हम यूनिवर्सिटी के छात्रों को बताते हैं कि काम के घंटों के मामले में उनका रुख लचीला हो।"
वहीं यूनिलीवर के तुर्की, रूस, मध्य पूर्व, उत्तरी अमेरिका, मध्य एशिया और कॉकेशिया क्षेत्र के लिए लीडरशिप डेवेलपमेंट डाइरेक्टर इरेम ओज़्बाल्याली का कहना है, “हर व्यक्ति निजी जिंदगी के लिए समय चाहता है, लेकिन इसको लेकर कुछ देशों में अपेक्षाएं अलग होती हैं।" जहां लेबनान में युवा माँ और बाप छुट्टी को तरजीह देते हैं, वहीं तुर्की में काम में लचीलापन प्राथमिकता होती है।