फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

गोल्ड मेडलिस्ट के पास नहीं थे घी खरीदने तक के पैसे, संघर्ष की कहानी सुन भर आएगी आंखें

Sat, 14 Apr 2018 07:51 AM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 14 Apr 2018 07:51 AM IST
विज्ञापन
CWG 2018: Success story of Commonwealth medalist Bajrang Punia
कॉमनवेल्थ खेल के 9वें दिन भी भारतीय टीम ने अपना शानदार खेल जारी रखा। पहलवान बजरंग पुनिया ने भारत को कुश्ती में 17वां गोल्ड दिलाया। पुरुषों के 65 किग्रा भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए हरियाणा के इस लाल ने कॉमनवेल्थ खेल का अपना दूसरा मेडल जीता। 2014 ग्लासगो कॉमनवेल्थ में बजरंग पुनिया ने सिल्वर मेडल पर कब्जा किया था। धुरंधर भारतीय पहलवान और 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त के चेले बजरंग के इस जादुई सफर पर एक नजर...
CWG 2018: Success story of Commonwealth medalist Bajrang Punia
बजरंग को कुश्ती विरासत में मिली। उनके पिता बलवान पूनिया अपने समय के नामी पहलवान रहे। मगर गरीबी आगे आड़े आ गई। कुश्ती के लिए जरूरी डाइट तक के लाले पड़ जाते। पिता का अधूरा ख्वाब बेटे बजरंग के सपनों में तैरने लगा था। उनके जीवन का एकमात्र लक्ष्य देश के लिए मेडल ही लाना रह गया था। मगर पैसा यहां भी अड़चन पैदा करने वाला बना। पिता के पास बेटे को घी खिलाने के पैसे नहीं होते थे।
CWG 2018: Success story of Commonwealth medalist Bajrang Punia
कहते हैं जिद्द और समर्पण हो तो हर मुश्किल आसान लगने लगती है, कुछ ऐसा ही बजरंग की कहानी में भी होता है। बस का किराया बचाकर उनके पिता अब साइकिल से चलने लगे थे। जो पैसे बचते, उसे वो अपने बेटे की डाइट पर खर्च करते थे। ऐसे हालातों से गुजरते हुए बजरंग ने पहलवानी की दुनिया में देश का नाम रोशन किया। बाद में ओलंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त की नजर उन पर पड़ी, जिनके अखाड़े में बजरंग उन्हीं की देखरेख में ट्रेनिंग करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
CWG 2018: Success story of Commonwealth medalist Bajrang Punia
हरियाणा के बजरंग ने 2014 में कॉमनवेल्थ खेलों में 61 किलोग्राम वर्ग में रजत जीता था और इस बार वह अपने पदक के रंग को बदलने में कामयाब रहे। बजरंग ने पुरुषों की 65 किग्रा वर्ग स्पर्धा के फाइनल में वेल्स के पहलवान केन चैरिग को एकतरफा मुकाबले में 10-0 से मात दी। अपने गुरू योगेश्वर के चिर परिचित अंदाज में उन्होंने चैरिग को हाथों से जकड़कर पटका और दो अंक लिए. इसी अवस्था में उन्होंने वेल्स के पहलवान को रोल कर दो अंक और महज चंद मिनटों के भीतर ही चैरिग को चित करते हुए बजरंग ने सोना जीता।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

 रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed