बेरोजगार गरीब छात्रों को मोदी सरकार की सौगात
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आर्थिक रुप से पिछड़े वर्ग और अन्य पिछड़े वर्ग(ओबीसी) के मेधावी बच्चों की विदेशों में पढ़ाई का रास्ता खोलने के लिए सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्रालय ने शिक्षा ऋण में रियायत देने के नए स्कीम को शुरू किया है।
डॉ भीमराव अंबेडकर के नाम से शुरू हुई इस योजना के तहत विदेशों में उच्च शिक्षा के लिए सस्ते दर पर कर्ज की व्यवस्था की जाएगी। ताकि उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मिल सके।
इस केंद्रीय योजना के अंतर्गत छात्रों को विदेशों में मास्टर डिग्री, एम फिल, और पीएच डी स्तर की पढ़ाई के लिए 20 लाख रुपए तक शिक्षा ऋण मिल सकेगा। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऐसे बेरोजगार आवेदक जिनके अभिभावक की वार्षिक आय तीन लाख वार्षिक से ज्यादा नहीं है, उन्हें ही इस योजना का लाभ मिल सकेगा।
इन्हें मिलेगी सब्सिडी
वहीं आर्थिक रुप से पिछड़े वर्ग की श्रेणी में उन्हें रखा गया है जिन्हें
एससी, एसटी, ओबीसी में शामिल नहीं हैं और उनकी वार्षिक आय एक लाख रुपए
सलाना से ज्यादा नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि योजना के दिशानिर्देश के
मुताबिक कर्ज आवंटन का 50 फीसदी लड़कियों के लिए आरक्षित किया गया है।
इंटरेस्ट
सब्सिडी को बैंकों के मौजूदा एजुकेशन लोन स्कीम से जोड़ा जाएगा। छात्रों
को इन्हीं योजनाओं में इंटरेस्ट सब्सिडी मिल सकेगी। ऐसे छात्र जिन्होंने
बीच में ही पढ़ाई छोड़ दिया हो या फिर अनुशासनहीनता की वजह से संस्थान से
निकाला गया हो, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा। फर्जी प्रमाण पत्र
देने पर सब्सिडी की राशि को ब्याज के साथ वसूली जाएगी।
वहीं छात्र पर
आपराधिक मामले को भी दायर किया जा सकता है। वहीं कर्ज लेने की अवधि में अगर
कोई छात्र भारतीय नागरिकता को छोड़ दे तो उसे केंद्र की इस योजना से वंचित
रहना पड़ेगा।