UPSC: सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के तुरंत बाद जारी होनी चाहिए उत्तर कुंजी; संसदीय समिति ने पेश की रिपोर्ट
UPSC: संसदीय समिति ने गुरुवार को सुझाव दिया कि विश्वसनीयता, निष्पक्षता और उम्मीदवारों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के तुरंत बाद यूपीएससी द्वारा उत्तर कुंजी जारी की जानी चाहिए।
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UPSC: संसदीय समिति ने गुरुवार को सुझाव दिया है कि यूपीएससी को सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा की उत्तर कुंजी परीक्षा के तुरंत बाद जारी कर देनी चाहिए। इससे परीक्षा की विश्वसनीयता, निष्पक्षता और उम्मीदवारों का आत्मविश्वास बढ़ेगा।
पूरी चयन प्रक्रिया के बाद प्रकाशित होती है उत्तर कुंजी
यूपीएससी हर साल सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करता है। इस परीक्षा के जरिए आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों का चयन किया जाता है। इस परीक्षा के लिए निर्धारित चयन प्रक्रिया में प्रारंभिक, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार शामिल है। आयोग ने समिति को सूचित किया कि वह संपूर्ण चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही प्रारंभिक परीक्षा की उत्तर कुंजी प्रकाशित करता है।
कार्मिक, लोक शिकायत, विधि एवं न्याय पर संसदीय स्थायी समिति ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) से संबंधित अनुदानों की मांगों (2025-26) पर अपनी 145वीं रिपोर्ट में कहा, "इससे उम्मीदवारों की अगले चरण में आगे बढ़ने से पहले संभावित त्रुटियों को चुनौती देने की क्षमता में देरी होती है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता कम होती है। इस तरह की प्रथा उम्मीदवारों का मनोबल गिरा सकती है और परीक्षा की वैधता के बारे में चिंताएं पैदा कर सकती है।"
उम्मीदवारों को मिले उत्तर कुंजी को चुनौती देने का मौका
समिति का मानना है कि यदि उत्तर कुंजी पहले जारी हो, तो उम्मीदवार अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और संभावित गलतियों को समय रहते सुधारा जा सकेगा। समिति ने कहा कि देर से उत्तर कुंजी जारी होने से उम्मीदवारों का मनोबल गिरता है और परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
समिति ने इस मुद्दे पर पहले भी अपनी सिफारिश दी थी और अब इसे दोहराया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूपीएससी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रारंभिक परीक्षा के तुरंत बाद उत्तर कुंजी जारी हो और उम्मीदवारों को आपत्ति दर्ज करने का अवसर मिले।
बसवान समिति की सिफारिशों को जल्द लागू करना चाहिए: संसदीय पैलन
इसके अलावा, समिति ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग से बसवान समिति की सिफारिशों को जल्द लागू करने के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय करने की सिफारिश की है। बसवान समिति का गठन सिविल सेवा परीक्षा के पाठ्यक्रम और प्रक्रिया में बदलावों के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए किया गया था।
इस रिपोर्ट में परीक्षा के नियम, आयु सीमा, उत्तर कुंजी जारी करने और प्रश्न बैंक जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई थी। सरकार ने इस रिपोर्ट की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय समिति बनाई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंप दी है। अब संसदीय समिति चाहती है कि इस रिपोर्ट को लागू करने के लिए स्पष्ट योजना बनाई जाए।
रिपोर्ट में दिया गया ये सुझाव
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए उम्मीदवारों और विशेषज्ञों से सलाह ली जाए। साथ ही, सुधारों की नियमित जानकारी सार्वजनिक की जाए। यदि किसी बदलाव के लिए सरकारी मंजूरी की जरूरत हो, तो उसे जल्द से जल्द स्वीकृति के लिए भेजा जाए।
समिति का मानना है कि यदि इन सुझावों पर अमल किया जाए, तो यूपीएससी परीक्षा प्रणाली और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और आधुनिक बन सकेगी।