चुनावी सीजन के चलते अगले साल आ सकती हैं 10 लाख नई नौकरियां, फ्रेशर्स को मिलेंगे बेहतर मौके
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अगले साल होने वाले आम चुनावों को लेकर नियोक्ता काफी सतर्क हो गए हैं। नई नौकरियों के लिहाज से 2019 बेहतर साबित हो सकता है, लेकिन वेतन में ज्यादा इजाफे की संभावना नहीं दिख रही। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी साल में फ्रेशर्स के लिए बेहतर मौके बनेंगे और विशेष दक्षता रखने वाले पेशेवरों को बड़े पैकेज का ऑफर हो सकता है।
दरअसल, देशभर के नियोक्ता आम चुनावों के दौरान राजनीतिक अनिश्चितता को लेकर 2019 की पहली छमाही तक काफी सतर्कता बरतेंगे। पिछले कुछ समय से जॉब और रोजगार का मुद्दा सभी राजनीतिक दलों के लिए प्रमुख रहा है। हालांकि कई सालों से यह 1.20 करोड़ जॉब प्रतिवर्ष के लक्ष्य से पीछे चल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति इसलिए भी ज्यादा बुरी दिखाई देती है, क्योंकि बाजार में नई नौकरियों के पैदा होने का सही-सही आंकड़ा उपलब्ध नहीं हो पाता है। मानव संसाधन प्रबंधन सोसाइटी (एसएचआरएम) के प्रमुख सलाहकार निशीत उपाध्याय का कहना है कि नोटबंदी और जीएसटी जैसे आर्थिक सुधारवादी कदमों के कारण वर्ष 2018 नई नौकरियों के सृजन के लिहाज से फीका रहा।
यह काफी चिंताजनक है कि नौकरी और रोजगार के मुद्दे पर लड़े जाने वाले आम चुनावों के बीच नियोक्ता अपने कारोबार विस्तार को लेकर बहुत सतर्क रहेंगे। नतीजतन, 2019 की पहली छमाही में नई नौकरियों के सृजन पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
इसके अलावा सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर, रोड, एयरपोर्ट जैसी परियोजनाओं से सीधे तौर पर जुड़ी कंपनियां भी अगले साल मई में नई सरकार बनने तक काफी सतर्कता बरतेंगी। एसएचआरएम दुनियाभर में मानव संसाधन पेशेवरों की सबसे बड़ी सोसाइटी है, जो 165 देशों के करीब तीन लाख सदस्यों का प्रतिनिधित्व करती है।
इन क्षेत्रों में बढ़ेंगी नौकरियां
इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन की अध्यक्ष ऋतुपर्ण चक्रवर्ती के अनुसार, अगले साल इंफ्रास्ट्रक्चर, विनिर्माण, रिटेल और एफएमसीजी सेक्टर में नई नौकरियों का ज्यादा सृजन होगा। इसके अलावा लॉजिस्टिक, ई-कॉमर्स, स्टार्ट-अप, उपभोक्ता वस्तुओं और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नौकरियां बढ़ेंगी। नॉन मेट्रो शहरों में रीटेल कारोबार का विस्तार होने से इस क्षेत्र में नई नौकरियों के सृजन की संभावना काफी ज्यादा है।
आईटी क्षेत्र में रहेगी किल्लत
वर्ष 2019 में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नौकरियों का टोटा रहेगा। इससे पहले के दो वर्षों तक नई तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ने और कुशल पेशेवरों की मौजूदगी से इस क्षेत्र में काफी नौकरियां पैदा हुईं। आईटी के अलावा बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और टेलीकॉम क्षेत्र में भी नई नौकरियों का सृजन मुश्किल होगा।
भारत में वेतन बढ़ोतरी सबसे ज्यादा
रिपोर्ट के अनुसार, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में वर्ष 2019 के दौरान भारत में वेतन बढ़ोतरी की दर सबसे ज्यादा रहेगी। इसका औसत आंकड़ा 9 से 10 फीसदी तक रहेगा। ग्लोबल हंट के एमडी सुनील गोयल का कहना है कि बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों की 15 से 20 फीसदी तक वेतन बढ़ोतरी हो सकती है, वहीं औसत प्रदर्शन करने वालों को 5 से 8 फीसदी तक ही संतोष करना पड़ेगा। इस दौरान विशेष दक्षता रखने वालों को कंपनियां 50 फीसदी तक वेतन बढ़ोतरी का तोहफा दे सकती हैं।
तकनीक पर रहेगा जोर
इंडीड इंडिया के प्रबंध निदेशक शशि कुमार का कहना है कि नई नौकरियों के लिए तकनीक पर ज्यादा जोर रहेगा। ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी, ब्लॉकचेन, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले पेशेवरों को कंपनियां मोटे पैकेज पर हायर कर सकती हैं। इसके उलट तकनीक के बढ़ते चलन से उत्पादन और विनिर्माण क्षेत्र की शुरुआती नौकरियों पर संकट आ सकता है।