फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jharkhand ›   we dont know anything about food security

'ये खाद्य सुरक्षा भला क्या चीज़ है'

Wed, 04 Sep 2013 12:48 PM IST
आलोक प्रकाश पुतुल/ झारखंड
आलोक प्रकाश पुतुल/ झारखंड Updated Wed, 04 Sep 2013 12:48 PM IST
विज्ञापन
we dont know anything about food security

सनीचरी देवी के घर में आज भी अनाज के नाम पर कुछ नहीं है। जो था, वह सुबह पकाकर खा लिया। घर में सामान के नाम पर छह बर्तन, दो बिछावन और दो-चार कपड़े हैं।

विज्ञापन


दो कमरे वाले घर में दरवाज़ा नहीं है। परिवार में बेटा जोगिंदर और बेटी राजकली हैं। पूरा परिवार मिलकर आसपास के इलाके से लकड़ियां एकत्र करता है और बेचकर जो मिलता है, उससे उनका घर चलता है।
विज्ञापन


उनका दावा है कि पिछले साल उनके पिता चलित्तर भुइयां की भूख से और सरकारी भाषा में कहें तो ‘बीमारी’ से मौत हो गई थी।

बंधुआ मजदूरी और अकाल का घर कहे जाने वाले पलामू ज़िला मुख्यालय मेदिनीनगर से लगे चैनपुर का भड़गवां गांव पिछले साल तब चर्चा में आया था, जब गांव में भूख और बीमारी से लोगों के मरने की खबरें सामने आने लगी थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


फुलवारी गांव की सनीचरी देवी के अनुसार उनका पूरा परिवार कमाने-खाने परदेस चला गया था। फिर वहीं उन्हें उनके पिता चलित्तर भुइयां की मौत की ख़बर मिली।

जब तक लौटे, तब तक गांव वालों ने मिल-जुलकर अंतिम संस्कार कर दिया था।

तब सरकारी अफसर आए और अनाज दिया। उसके बाद उनके घर झांकने के लिए कोई नहीं आया। आज भी सनीचरी के पास राशन कार्ड नहीं है। रोज़गार की कोई गारंटी नहीं है।

ज़ाहिर है, उनके पास केंद्र सरकार की खाद्य सुरक्षा बिल की कोई जानकारी भी नहीं है। बताने पर वे कहती हैं-“पहिलहूं तो कहल गेल रहे कि इ मिलतउ, उ मिलतउ। बाकी सब कुछ बढ़ आदमी के मिल जाला। हमनी के के पूछतई?”

मतलब यह कि पहले भी तो कहा गया था कि यह मिलेगा, वह मिलेगा लेकिन सब कुछ बड़े लोगों को मिल जाता है। हम लोगों को कौन पूछता है। खाद्य सुरक्षा बिल की जानकारी नहीं।

गांव में हमें एक भी आदमी ऐसा नहीं मिला, जिसे सरकार के खाद्य सुरक्षा बिल की जानकारी हो।

हालांकि, सनीचरी के अंदाज़ में शिकायत करने वाले लोगों की एक पूरी फौज गांव में है। कुछ ऐसे भी हैं, जो अब ऐसी शिकायत के लिये जिंदा ही नहीं बचे।

गांव के ऐसे लोगों की मौत मीडिया की सुर्ख़ियों में रही, लेकिन थोड़ी हलचल के बाद सब कुछ शांत हो गया।

गांव की सुमित्री देवी की पिछले साल मौत हो गई। उनके परिवार में पति कईल भुइयां कुछ महीनों से बाहर थे।

सुमित्री बीमार हुईं, तो घर में खाने के लाले पड़ गए और वे अपने घर में पड़े-पड़े ही कब मर गईं, किसी को पता न चला। घर में अन्न का दाना नहीं।

गांव के बिगन रजक बताते हैं- “जब तक हाथ-पैर में दम थे, लकड़ी बेचकर उसने घर चलाया। लेकिन जब 45 साल की सुमित्री देवी बीमार पड़ीं, तो कोई देखने वाला नहीं था। उसकी मौत के बाद जब हम लोग उसके घर गए तो घर में अन्न का दाना नहीं था।”


यही हाल गांव की बिगनी देवी का हुआ। बिगनी देवी पति की मौत के बाद अकेली रह गई थीं। साथ में मानसिक रूप से विक्षिप्त देवर मुनी भुइयां रहता था।

बीमार पड़ीं, तो घर में कमाने वाला कोई नहीं बचा। गांव के लोगों का दावा है कि भोजन के अभाव में उनकी मौत हो गई।

खंडहर हो चले घर में अब उनके देवर मुनी भुइयां रहते हैं। घर के प्रवेश द्वार पर बड़ी-बड़ी जंगली घास उग आई है और पूरा घर बदबू से भरा है।

गांव का कोई व्यक्ति लंबे समय से उस घर में नहीं गया है। ऐसे में हमने मुनी भुइयां को उनके घर में घुसकर देखने की कोशिश की।

लेकिन उनके घर में पानी से तरबतर एक दरी के अलावा कुछ नहीं मिला। मिट्टी के फ़र्श पर पानी जमा था और कमरे के भीतर भी जंगली घास उग आई थी।

गांव वालों का अनुमान था कि मुनी कहीं भीख मांगने गए होंगे। गांव के बबन कहते हैं- “कोई देखने वाला है नहीं, खाना मिलता नहीं है। कौन जाने, अगले महीने जब आप यहां आएं, तो आपको मुनी की मौत की ख़बर मिले।”

लेकिन गांव की उपनती भुइयां कहती हैं कि मुनी भुइयां से पहले वे मरेंगी।

उपनती के परिवार में कोई नहीं है। कोई रिश्तेदार भी नहीं। इसी साल बरसात की शुरुआत में उनका एक कमरे का घर ढह गया।

इसके बाद से वे गांव में ही किसी के घर में रहती हैं। कहीं सोने की जगह नहीं मिली, तो किसी के घर के बाहर ही सो जाती हैं।

'बिचौलियों की पकड़ मज़बूत'
इलाके के सामाजिक कार्यकर्ता शैलेंद्र कुमार कहते हैं-“इस गांव में रहने वाले अधिकांश लोग हरिजन हैं और विकास खंड मुख्यालय में जहां सरकारी योजनाओं को अमल में लाना होता है, वहां तक ये कभी पहुंच ही नहीं पाते। बिचौलियों की पकड़ इतनी मज़बूत है कि काग़ज़ों में उनका सारा मामला दुरुस्त रहता है। हक़ीकत में गांव तक कुछ नहीं पहुंचता। खाद्य सुरक्षा बिल का भी यही हाल होगा।”

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed