{"_id":"6034bc678ebc3ee925571e92","slug":"vishwa-hindu-parishad-counter-the-statement-of-jharkhand-cm-hemant-soren-on-tribal-peoples","type":"story","status":"publish","title_hn":"झारखंड मुख्यमंत्री के बयान पर विश्व हिंदू परिषद का पलटवार, आदिवासी समाज की श्रद्धा तोड़ रहे हैं हेमंत सोरेन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
झारखंड मुख्यमंत्री के बयान पर विश्व हिंदू परिषद का पलटवार, आदिवासी समाज की श्रद्धा तोड़ रहे हैं हेमंत सोरेन
Tue, 23 Feb 2021 01:57 PM IST
Harendra Chaudhary
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Tue, 23 Feb 2021 01:57 PM IST
सार
हेमंत सोरेन ने बयान दिया था कि आदिवासी कभी न हिंदू थे, न हैं। आदिवासी समाज प्रकृति पूजक है और इनका अलग रीति-रिवाज है। सदियों से आदिवासी समाज को दबाया जाता रहा है, कभी इंडिजिनस, कभी ट्राइबल तो कभी अन्य के तहत पहचान होती रही...
विज्ञापन
हेमंत सोरेन (फाइल फोटो)
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आदिवासियों को लेकर दिए गए बयान पर विश्व हिंदू परिषद ने उन पर जमकर हमला बोला है। वीएचपी का कहना है कि सोरेन का यह बयान वनवासी समाज की आस्था व विश्वास पर चोट पहुंचाने वाला है। वीएचपी इस गैर-जिम्मेदाराना बयान की निंदा करती है।
विज्ञापन
विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने अमर उजाला से कहा कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वनवासी समाज को दिग्भ्रमित कर उनकी श्रद्धा को तोड़ने का पाप कर रहे हैं। उनका बयान देशभक्त और धर्मनिष्ठ वनवासी समाज की आस्था व विश्वास पर चोट पहुंचाने वाला है।
विज्ञापन
उन्होंने आगे कहा, ऐसा लगता है कि देश, धर्म व संस्कृति के लिए वनवासी समाज और उससे जुड़े महापुरुषों के योगदान को नकारते हुए सोरेन ईसाई मिशनरियों, कम्यूनिस्ट और नक्सली गतिविधियों के षड्यंत्रों को सहयोग प्रदान कर रहे हैं। इसे हम स्वीकार नहीं करेंगे। समाज के राजनैतिक नेतृत्व को बहुत जिम्मेदारी से वक्तव्य देने चाहिए। वे सुनियोजित तरीके से वनवासी समाज को दिग्भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं, उसमें वे सफल नहीं होंगे।
विज्ञापन
परांडे ने आगे बताया कि सीएम सोरेन को याद रखना चाहिए कि वनवासी समाज, अनंत काल से देश, धर्म व भारतीय संस्कृति की रक्षा हेतु अग्रणी भूमिका में रहा है। रामायण काल में माता शबरी का उदाहरण हो या राजस्थान में राणा पूंजा भील का, जिन्होंने महाराणा प्रताप का समर्थन मुगलों से लड़ने के लिए किया।
झारखंड में भगवान बिरसा मुंडा ने तो ना सिर्फ रामायण-महाभारत का अभ्यास किया अपितु, अंग्रेजों व ईसाई मिशनरियों के धर्मान्तरण के षडयंत्रों का भी डटकर विरोध किया। आज राम मंदिर निधि समर्पण अभियान के प्रति झारखंड सहित समस्त वनवासी क्षेत्र में उत्साह नजर आ रहा है।
हाल ही में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बयान दिया था कि आदिवासी कभी न हिंदू थे, न हैं। आदिवासी समाज प्रकृति पूजक है और इनका अलग रीति-रिवाज है। सदियों से आदिवासी समाज को दबाया जाता रहा है, कभी इंडिजिनस, कभी ट्राइबल तो कभी अन्य के तहत पहचान होती रही।