फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jharkhand ›   Ranchi News ›   jharkhand brain stroke 94 percent patients miss golden hour rims study

झारखंड: ब्रेन स्ट्रोक के 94% मरीज समय पर नहीं पहुंचते अस्पताल, रिम्स के अध्ययन में खुलासा

Thu, 29 Oct 2026 02:45 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Thu, 29 Oct 2026 02:45 PM IST
सार

झारखंड में ब्रेन स्ट्रोक के 93.7 प्रतिशत मरीज शुरुआती साढ़े चार घंटे यानी गोल्डन आवर के भीतर अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे हैं। रिम्स के न्यूरोलॉजी विभाग के अध्ययन में यह बात सामने आई है।

विज्ञापन
jharkhand brain stroke 94 percent patients miss golden hour rims study
राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स)। फाइल फोटो - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

झारखंड में ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाना गंभीर चिंता का विषय बन गया है। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के एक अध्ययन के मुताबिक, ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित 93.7 प्रतिशत मरीज शुरुआती साढ़े चार घंटे यानी ‘गोल्डन आवर’ के भीतर अस्पताल नहीं पहुंच पाते। इस वजह से उन्हें जीवनरक्षक थ्रोम्बोलिसिस उपचार नहीं मिल पाता, जो दिमाग की बंद नस को खोलने में मदद करता है। आंकड़ों के अनुसार, हर 16 मरीजों में से केवल एक ही समय रहते अस्पताल पहुंच पाता है।

विज्ञापन

रिम्स के अध्ययन में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

रिम्स के न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र कुमार के मार्गदर्शन में तन्नू कुमारी, युवराज सिन्हा और उनकी टीम ने वर्ष 2022 से 2024 के बीच यह अध्ययन किया। शोध पत्र प्रसिद्ध न्यूरोलॉजी जर्नल ‘एनल्स ऑफ न्यूरोसाइंसेज’ में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन के दौरान स्ट्रोक के कुल 1,562 मरीजों की जांच की गई। इनमें दिमाग की नस बंद होने के कारण होने वाले एक्यूट इस्केमिक स्ट्रोक के 237 मरीज शामिल थे। इनमें से केवल 15 मरीज ही शुरुआती साढ़े चार घंटे की निर्धारित समय सीमा के भीतर अस्पताल पहुंचे। वहीं, 222 मरीज यानी करीब 94 प्रतिशत मरीज समय सीमा बीत जाने के बाद अस्पताल पहुंचे। ऐसे में समय पर इलाज नहीं मिल पाने के कारण मरीजों के लिए जीवनरक्षक उपचार का अवसर प्रभावित होता है।

विज्ञापन

ग्रामीण इलाकों के मरीजों की संख्या अधिक, जागरूकता की कमी भी बड़ी वजह

अध्ययन में स्ट्रोक के मरीजों की सामाजिक और भौगोलिक स्थिति का भी विश्लेषण किया गया। इसके मुताबिक, मरीजों में 70 प्रतिशत लोग ग्रामीण क्षेत्रों से थे, जबकि कुल मरीजों में 49 प्रतिशत निरक्षर थे। स्ट्रोक के लक्षणों और समय पर इलाज के महत्व की जानकारी कम होने के कारण भी अस्पताल पहुंचने में देरी हो रही है। अध्ययन में सामने आया कि केवल 14 प्रतिशत लोग ही ब्रेन स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों के बारे में जानते थे। इन लक्षणों में मुंह टेढ़ा होना, हाथ में कमजोरी महसूस होना और बोलने में परेशानी होना शामिल है। वहीं, केवल 5.5 प्रतिशत लोगों को ही थ्रोम्बोलिसिस उपचार के बारे में जानकारी थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

इस वर्ष विश्व स्ट्रोक दिवस का मुख्य विषय ‘द टाइम इज नाउ’ रखा गया है। इसका उद्देश्य स्ट्रोक के लक्षणों की पहचान करने और मरीजों को बिना देरी अस्पताल पहुंचाने के प्रति लोगों को जागरूक करना है।

ब्रेन स्ट्रोक में साढ़े चार घंटे क्यों हैं अहम?

चिकित्सकों के अनुसार, ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों के लिए शुरुआती साढ़े चार घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस अवधि को ‘गोल्डन आवर’ कहा जाता है। यदि मरीज समय रहते अस्पताल पहुंच जाता है, तो जांच के बाद पात्र मरीजों को थ्रोम्बोलिसिस उपचार दिया जा सकता है। इस प्रक्रिया में दवा की मदद से दिमाग की बंद नस को खोलने की कोशिश की जाती है, जिससे रक्त प्रवाह बहाल करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अस्पताल पहुंचने में देरी होने पर यह उपचार देना संभव नहीं रह जाता है। इसलिए ब्रेन स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को पहचानना और मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाना जरूरी है। मुंह टेढ़ा होने, हाथ में अचानक कमजोरी आने या बोलने में परेशानी होने पर समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। जल्द इलाज मिलने से मरीज के लिए बेहतर परिणाम की संभावना बढ़ सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed